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जनसंघ के संस्थापक सदस्य बलराज मधोक का निधन

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 May 2016, 13:16 IST

जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक बलराज मधोक का आज निधन हो गया है. 96 साल के प्रोफेसर बलराज मधोक का जन्म 5 फरवरी, 1920 को अस्कार्दू (जम्मू कश्मीर) में हुआ था.

बलराज मधोक के निधन की जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ट्वीट करके दी. हर्षवर्धन ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा,"बलराज मधोक के स्वर्गवास से देश ने एक महान विचारक और समाज सुधारक खो दिया है. उनकी आत्मा को शांति मिले."

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बलराज मधोक ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर अक्टूबर 1951 में जनसंघ की स्थापना की थी. मधोक दक्षिणी दिल्ली से लोकसभा के सांसद भी रह चुके थे. वो दो बार लोकसभा के सदस्य रहे.

मधोक की उच्च शिक्षा लाहौर यूनीवर्सिटी से हुई थी. 18 साल की आयु में मधोक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आए. 1942 में मधोक को आरएसएस प्रचारक की जिम्मेदारी मिली.

आडवाणी-मधोक का चर्चित विवाद


बलराज मधोक और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का विवाद भी काफी सुर्खियों में रहा. फरवरी 1973 में कानपुर में जनसंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सामने मधोक ने एक नोट पेश किया.

उस नोट में मधोक ने आर्थिक नीति, बैंकों के राष्ट्रीयकरण पर जनसंघ की विचारधारा के उलट बातें कही थीं. इसके अलावा मधोक ने कहा था कि जनसंघ पर आरएसएस का असर बढ़ता जा रहा है.

मधोक ने संगठन मंत्रियों को हटाकर जनसंघ की कार्यप्रणाली को ज्यादा लोकतांत्रिक बनाने की मांग भी उठाई थी. उस वक्त लालकृष्ण आडवाणी जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे.

मधोक की इन बातों से आडवाणी इतने नाराज हो गए कि उन्होंने मधोक को पार्टी का अनुशासन तोड़ने और पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए तीन साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया.

इस घटना से बलराज मधोक इतने आहत हुए थे कि फिर वो कभी पार्टी में नहीं लौटे. मधोक जनसंघ के जनता पार्टी में विलय के भी खिलाफ थे.

आरएसएस ने जताया दुख


बलराज मधोक ने जनसंघ की स्थापना में हिस्सेदारी निभाने के साथ-साथ उसका संविधान भी लिखा था. इस बीच मधोक के निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी गहरा दुख जताया है.

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मधोक ने इस बात का दावा किया था कि उन्होंने ही सबसे पहले 1968 में अयोध्या में विवादित राम मंदिर को हिंदुओं को देने की मांग रखी थी.

इसके अलावा 1947 में कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे से बचाने और 1951 में स्थापित भारतीय जनसंघ को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा.

First published: 2 May 2016, 13:16 IST
 
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