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जेटलीजी, ये क्या है अभिव्यक्ति की आजादी या घृणा भरे बयान?

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

आखिर राष्ट्रविरोधी नारे या घृणा फैलाने वाले नारे कैसे अभिव्यक्ति की आजादी हो सकते हैं? सवाल यह है कि क्या हम उन लोगों को सम्मान देने जा रहे हैं जिनकी सोच देश तोड़ने की है. क्या घृणा की भाषा को फ्री स्पीच के दायरे में रखा जा सकता है?

ये सारी बेहद तार्किक और मौजूदा समय में जारी विवाद को परिभाषित करने वाली बातें वित्तमंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने 25 फरवरी को संसद में जेएनयू विवाद और कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी पर हुई चर्चा के दौरान कही थी. आज उन्हीं के सवाल अरुण जेटली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं.

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बीते सिर्फ दो हफ्ते के दौरान खुद अरुण जेटली की पार्टी के जितने नेताओं ने उल-जुलूल बयान दिए हैं वे सिर्फ और सिर्फ घृणा फैलाने वाले बयान हैं, लेकिन अब तक न तो जेटली ने, न ही उनकी पार्टी ने घृणा फैलाने और समाज को हिंसा में झोंक सकने वाले इन बयानों पर कोई प्रतिक्रिया दी है या कोई कार्रवाई की है.

दो हफ्ते के दौरान खुद अरुण जेटली की पार्टी के जितने नेताओं ने उल-जुलूल बयान दिए हैं वे सिर्फ औऱ सिर्फ घृणा फैलाने वाले बयान हैं

शायद जेटलीजी के घृणास्पद बयानों की परिभाषा सिर्फ गैर भाजपाई लोगों पर लागू होती है.

भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है. अनुच्छेद 19 ए में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की व्याख्या की गई है.

भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सरकार जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी (जेएनयू) में कथित नारेबाजी के मामले में बेहद मुखर है. उसका हर बड़ा-छोटा नेता राष्ट्रवाद पर 'गंभीर' बहस में लगा हुआ है. 'राष्ट्रवाद' की आड़ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले किए जा रहे हैं.

संसद में अरुण जेटली का भाषण

यह तय बात है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश-समाज तोड़ने और धार्मिक-जातीय भेदभाव फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है.

लेकिन क्या जेटली बीजेपी के सांसद और विधायकों की घृणा की भाषा को सुन पा रहे हैं? जेएनयू प्रकरण के बाद ही बीजेपी के तमाम सांसद, विधायक और आम कार्यकर्ता खुद को देश, कानून और संविधान से ऊपर समझने लगे है. उन्हें लगता है कि वे ही देश की न्यायपालिक हैं या फिर उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा नहीं रह गया है. 

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भाजपा के तमाम नेता किसी की जीभ काटने वालों को इनाम देना चाहते हैं, किसी का सिर काट कर छह इंच छोटा कर देना चाहते हैं, किसी को दफन कर देना चाहते हैं, किसी की तमन्ना मुसलमानों को सबक सिखाने की है. लेकिन शायद ये सब जेटलीजी की परिभाषा में घृणा फैलाने वाले बयान नहीं हैं.

जेटलीजी, जिन अपराधों की बात हो रही है अब तक उनमें से किसी भी आरोपी का अपराध सिद्ध नहीं हुआ है. क्या आप उन्हें गोली मारने का समर्थन करते हैं? किसी की जीभ काटने का समर्थन करते हैं? क्या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और बीजेपी की विचारधारा से असहमति दर्ज करने वाले को आप दफन करने की इजाजत देंगे?

पिछले एक महीने में बीजेपी सांसद, विधायक और पदाधिकारियों द्वारा घृणापूर्ण बयानों की बाढ़ आ गई है. यहां कुछ बयानोंं की फेहरिश्त दी जा रही है:

कुलदीप वार्ष्णेय, जिला अध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा

उत्तर प्रदेश में बदायूं के भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष कुलदीप वार्ष्णेय ने कहा है कि अगर कोई कन्हैया की जीभ काटकर लाता है तो वह उसे पांच लाख का ईनाम देंगे.

उन्होंने कहा, 'हमारे पिता तुल्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उसने गालियां दी. ऐसे शख्स की अगर कोई जीभ काटकर लाता है तो मैं उसे 5 लाख का ईनाम दूंगा. देशद्रोह का आरोपी कन्हैया जेल से छूटने के बाद से लगातार जेएनयू कैंपस में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी के खिलाफ उल्टे-सीधे बयान दे रहा है.'

राम शंकर कठेरिया, मानव संसाधन राज्य मंत्री

ram shankar katheria

कुछ दिन पहले केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया ने आगरा में भाषण देते हुए मुसलमानों के खिलाफ विषवमन किया. संसद में विपक्ष ने उन्हें बर्खास्त करने की मांग कर हंगामा शुरू भी किया. इसकी वजह से राज्यसभा और लोकसभा की कार्रवाई बार-बार स्थगित हुई.

आगरा के रामलीला मैदान में एक शोकसभा में उन्होंने कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था. उन्होंने हिन्दुओं को अपनी ताकत दिखाने के लिए ललकारा. आगरा के विश्व हिंदु परिषद के नेता अरुण माहौर की हत्या के बाद श्रद्धांजलि सभा में शरीक होने पहुंचे कठेरिया के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने कहा कि प्रशासन ये न समझे की मंत्री बनने से उनके हाथ बंध गए हैं, वे भी कभी लाठी-डंडा उठा सकते हैं.

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आगरा में आयोजन का रुख मुस्लिम विरोध में तब्दील हो गया. सभा को संबोधित करते हुए कठेरिया ने कहा, 'हिन्दू समुदाय के खिलाफ षड्यंत्र किया जा रहा है, इसे पहचानने के लिए हमें अलर्ट रहना होगा और खुद को मजबूत करना होगा. हमें इसके खिलाफ लड़ना होगा, क्योंकि अगर अब हम इसे नहीं करते हैं तो आज हमने एक अरुण को खोया है और कल कोई दूसरा अरूण होगा. इससे अच्छा है कि हत्यारे मरें. हमें ऐसा उदाहरण पेश करना होगा.'

योगी आदित्यनाथ, सांसद, बीजेपी

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ भी अपनी भड़काऊ भाषण शैली के लिए मशहूर हैं. कभी अपनी सरकारी सुरक्षा हटाए जाने के लिए संसद में आंसू बहा चुके योगी आदित्यनाथ ने भी जेएनयू विवाद में अपनी तरफ से बयानों की आहूति दी है.

उन्होंने कहा कि जेएनयू में कोई जिन्ना पैदा नहीं होने पाएगा, पैदा होने की कोशिश की तो उसे वहीं दफन कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जेएनयू जैसे संस्थान को राष्ट्रद्रोह का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा.

दिलीप घोष, पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष

पश्चिम बंगाल में अगले महीने चुनाव होने वाले हैं. वहां भाजपा की हालत पतली है. ऐसे कठिन समय में बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने एख बान दिया है जो सीधे-सीधे मुसलमानोंं के खिलाफ जाता है.

पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी सरकार ने पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. हम इस तरह की चीजों को नजरअंदाज नहीं कर सकते. जो लोग देश विरोधी बयान देंगे, उनको सजा दी जाएगी और देश के खिलाफ बोलने वालों को छह इंच छोटा कर दिया जाएगा.

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माना जा रहा है कि आगामी चुनाव से पहले बंगाल में अपने कार्यकर्ताओं के टूटे मनोबल और क्षीण संभावनाओं के चलते हताशा में दिलीप घोष ने यह बयान दिया है.

अनंत कुमार हेगड़े, सांसद, बीजेपी

उत्‍तर कन्‍नड़ से बीजेपी सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने रविवार को कर्नाटक के सिरसी में इस्‍लाम को आतंक का टाइम बम बताते हुए इसे खत्‍म किए जाने की बात कही.

इसके अलावा हेगड़े ने जेएनयू के गिरफ्तार छात्र उमर खालिद के पिता के बयानों को प्रसारित करने के लिए मीडिया पर आतंकियों की मदद करने का आरोप भी लगाया.

कर्नाटक पुलिस ने हेगड़े पर मुस्लिमों के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज किया है.

साक्षी महाराज, सांसद, बीजेपी


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उत्तर प्रदेश में उन्नाव के बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने जेएनयू में हुई कथित नारेबाजी पर सीधे कहा कि देश विरोधी किसी भी गतिविधि में लिप्त हो क्षमा योग्य बिलकुल नहीं है. देश विरोधी नारे लगाना गलत है. ऐसे लोगों को गोली मार देनी चाहिए या फिर फांसी पर लटका देना चाहिए.

कैलाश चौधरी, विधायक, बीजेपी


राजस्थान में बाड़मेर की बायतु विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक कैलाश चौधरी ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को गद्दार करार देते हुए कहा कि उन्हें फांसी पर लटका कर गोली मार दी जाए. विधायक ने कहा कि जेएनयू में देश विरोधी हरकतें करने वालों का समर्थन करके कांग्रेस ने देश के खिलाफ काम किया है.
First published: 7 March 2016, 11:37 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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