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क्या जेएनयू विवाद का इस्तेमाल सरकार बजट सत्र से ध्यान हटाने में कर रही है?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 17 February 2016, 8:41 IST
QUICK PILL
  • बजट सत्र के ठीक पहले जेएनयू विवाद को हवा देने के पीछे क्या सरकार का कोई और मकसद है? सरकार संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में बुरी तरह से घिर सकती थी लेकिन जेएनयू प्रकरण ने विमर्श की दिशा मोड़ दी है.
  • शीतकालीन सत्र के कुछ दिन पहले ही ईडी के कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह के घर छापा मारा था और इसके बाद पूरा शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया था.

अर्थव्यवस्था से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर जब सरकार को संसद में घेरा जा सकता था तब सरकार को संसद के भीतर राहत मिलती दिख रही है. तो क्या यही वजह है कि सरकार अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर विपक्ष को अशांत करने की कोशिश कर रही है. कुछ ही हफ्तों के भीतर संसद के बजट सत्र की शुरुआत की है.

नवंबर में कांग्रेस पार्टी ने वीरभद्र सिंह के घर पर पड़े ईडी के छापे का कड़ा विरोध किया था. सिंह के घर पर ईडी का छापा शीतकालीन सत्र शुरू होने के छह दिन पहले पड़ा था. फिर पूरा सत्र विपक्ष के विरोध की भेंट चढ़ गया.

अब 23 फरवरी से बजट सत्र की शुरुआत होने वाली है और सरकार ने एक बार फिर से नए विवाद को जन्म दे दिया है. जेएनयू विवाद अब पूरी तरह से सामाजिक-राजनीतिक विवाद की शक्ल अख्तियार कर चुका है.

वीरभद्र सिंह के घर ईडी का छापा शीतकालीन सत्र के ठीक पहले पड़ा था. फिर पूरा सत्र विपक्ष के विरोध की भेंट चढ़ गया

एबीवीपी आरएसएस की छात्र ईकाई है और निश्चित तौर पर जेएनयू मामले को आगे बढ़ाने के मामले में पार्टी और संघ परिवार के नेतृत्व की सहमति रही होगी. इस मामले को आगे बढ़ाने के मामले में सरकार की मंशा को इस बात से भी समझा जा सकता है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कैंपस में दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को भेजे जाने का आदेश दिया.

सिंह की भूमिका केवल पुलिसिया कार्रवाई का आदेश देने के साथ ही खत्म नहीं हो जाती है. उन्होंने इस मामले में जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जेएनयू में अफजल गुरु के समर्थन में किया गए कार्यक्रम को हाफिज सईद का समर्थन था. बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने ब्लॉग लिखकर कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी पर देश को बांटने वाली ताकतों का साथ देने का आरोप लगाया.

इतना ही नहीं राज्यसभा में विपक्ष के नेता आनंद शर्मा पर जेएनयू परिसर में हमला हुआ. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सूरजेवाला ने आरोप लगाया कि शर्मा 'पर सरकार समर्थित एबीवीपी के गुंडों ने धारदार हथियार से हमला किया.' शर्मा के साथ राहुल गांधी भी जेएनयू गए थे और हमले की आशंका के बाद उन्हें एसपीजी ने सुरक्षित कैंपस के बाहर निकाल लिया. शर्मा का दावा है कि राहुल के वाहन पर भी हमला किया गया. 

कांग्रेस ने जेएनयू मामले को देश के लोकतांत्रिक इतिहास में 'काला दिन' करार दिया

जेएनयू विवाद ने पहले से ही खराब चल रहे केंद्र और कांग्रेस के संबंधों को खराब किया है. कोई भी इस बात का अंदाजा लगा सकता है कि बजट सत्र में क्या होने जा रहा है. पिछले डेढ़ साल के दौरान विपक्ष ने संसद को सरकार के विरोध के मंच के तौर पर इस्तेमाल किया है. हालांकि वह संसदीय मंच के जरिये सरकार की विफलता को सबके सामने लाने में विफल रही है.

हालांकि इस मामले में ऐसा लग रहा है कि सरकार विपक्ष की मदद कर रही है ताकि आसानी से संसदीय राजनीति की चुनौतियों का सामना किया जा सके. इससे सरकार को कार्यपालिका की मदद से सरकार चलाने का मौका मिलेगा और उसे संसद का सामना भी नहीं करना होगा.

कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. अजय कुमार ने कैच को बताया कि आरएसएस जीएसटी बिल के पक्ष में नहीं है और उसे लगता है कि संसद बाधित होने की वजह से उसे बचाव का बेहतरीन मौका मिल जाएगा.

कुमारने कहा कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर अपनी विफलताओं से ध्यान हटाना चाहती है. कुमार ने कहा, 'आरएसएस को इस बात का अंदाजा हो चुका है कि उसकी राजनीतिक ईकाई गवर्नेंस के सभी मुद्दों पर विफल हो चुकी है. इसलिए उसने धु्रवीकरण की राजनीति के रास्ते पर जाने का फैसला किया है और प्रधानमंत्री मोदी एंव अमित शाह गुजरात में इस राजनीति के मास्टर रह चुके हैं.'

कांग्रेस प्रवक्ता अजय कुमार के मुताबिक संघ जीएसटी बिल के पक्ष में नहीं है, संसद बाधित होने की वजह से उसे बचाव का बेहतरीन मौका मिल जाएगा

सीपीएम के नेता मोहम्मद सलीम ने कहा कि जेएनयू प्रकरण को जानबूझकर बढ़ाया गया क्योंकि संसद के बजट सत्र में आर्थिक मुद्दे उठने थे. इसके अलावा हैदराबाद यूनिवर्सिटी और एफटीआईआई का मामला भी उठता. 

सलीम ने कहा, 'सरकार इन मुद्दों पर सवाल जवाब से बचना चाहती है. उनकी रणनीति नई समस्या पैदा करने की है क्योंकि वह मौजूदा समस्याओं को सुलझाने में विफल रहे हैं. यह उनकी केंद्रीय विचारधारा है जिसमें वह अपने विपक्षी नेताओं को राष्ट्र विरोधी करार देते हैं. जबकि यह संसदीय रणनीति की विफलता है और वह अपने खिलाफ विपक्ष को एकजुट कर रहे हैं.'

विपक्षी दलों के बयान बजट सत्र के पहले का संकेत है. विपक्षी दलों के लिए सलाह यह होगी कि वह सत्र चलने दें और सरकार को संसद के भीतर घेरें. हालांकि ऐसा लगता है कि उकसावे की कार्रवाई काम कर चुकी है और विपक्ष के लिए बजट सत्र का एजेंडा तय हो चुका है. 

First published: 17 February 2016, 8:41 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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