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जे. जयललिताः 'मैं दुनिया में कुछ भी करने के लिए खुद को तैयार कर सकती हूं'

लमट र हसन | Updated on: 6 October 2016, 7:25 IST
(फ़ाइल फोटो)
QUICK PILL
  • जयललिता ने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ देखा है. अपनी पहली फिल्म के सैट पर उन्हें बिना किसी गलती के ‘कुतिया’ कह कर पुकारा गया. 
  • एमजीआर के भतीजे ने उन्हें ‘वेश्या’ कहा, मारा और उस गाड़ी से धकेल कर दूर कर दिया जिसमें एमजीआर का शव ले जाया जा रहा था. 
  • मगर हर बार जयललिता एक विजेता की तरह मुसीबत से बाहर निकलीं और बतौर आयरन लेडी ख़ुद को स्थापित किया. 

चाहे किसी भी नाम से पुकारो, अम्मू,अन्नी या फ़िर अम्मा लेकिन जे. जयललिता नाम की पहेली को सुलझाना काफी मुश्किल है. तमिलनाडु में काम करते हुए वरिष्ठ पत्रकार वासंती ने बहुत कड़ी मेहनत की कि वे जयललिता के जटिल व्यक्तित्व की कुछ परतें खोल सकें. 

दो साल तक गहन शोध करने के बाद उन्होंने जयललिता की बायोग्राफी ‘जयललिता-ए पोर्टेट इन 2011 लिखना तय किया. मगर पेंग्विन द्वारा इसे रिलीज किए जाने से पहले ही इस पर स्थाई तौर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

आउटलुक इंडिया के एक लेख में वासंती का दर्द छलक उठा. आउटलुक में पहली बार जयललिता की बायोग्राफी पर एक कर्टेन रेजर प्रकाशित किया जा रहा है. उन्होंने लिखा, ‘मैं अदालत की एक सुनवाई के दौरान उपस्थित थी और मैंने खुद को काफी अपमानित महसूस किया. दूसरे पक्ष के वकील जोर-जोर से चिल्ला कर मुझे झूठा बता रहे थे और कह रहे थे कि मैंने छह करोड़ लोगों के एक नेता को बदनाम करने की कोशिश की. मैं अब तक उस सदमे से बाहर नहीं निकली हूं.’

पहेली

जयललिता ने अभी 2011 के चुनाव जीते ही थे कि फोबिया जैसा माहौल बनाया जाने लगा. वासंती को जान का डर था और पेंग्विन को अपने ऑफिस में तोड़-फोड़ का. जब पेंग्विन केस हार गई तो उसने उच्चतर अदालतों में अपील न करने का निर्णय किया. और वासंती के पास अकेले लड़ने के लिए समय और संसाधन दोनों ही कम थे. 

चार साल बाद उन्होंने एक और बायोग्राफी लिखी, अम्माः फिल्म स्टार से लेकर राजनेता तक जयललिता का सफर. इसका प्रकाशन जगर्नाॅट एप एंड बुक्स करेगा. जब जयललिता ‘बुखार’ के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थीं तो आधिकारिक वक्तव्य यह जारी किया गया कि जयललिता की हालत बहुत गंभीर है. जयललिता के जीवन के कुछ रहस्य वासंती की किताब में खोले गए हैं.

एक महिला जिसने बहुत सारी विषमताओं का पार करते हुए उन सभी चुनौतियों का सामना किया जो एक महिला होने के नाते उन्हें झेलनी पड़ी. इसलिए भी झेलनी पड़ी क्योंकि वे एक अभिनेत्री हैं, एक ब्राह्मण हो कर द्रविड़ पार्टी को चला रही हैं और इसलिए भी कि उन्हें कभी एएम जी रामचंद्रन का सहारा नहीं मिला, जिन्हें उन्होंने अपना सब कुछ दे दिया.

गोपनीयता जयललिता का हथियार बन गया. एक ऐसा हथियार जिसे उन्होंने अपने विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया. 68 की उम्र में भी जब वे असपताल में भर्ती हैं, विरोधी उनके बारे में सिर्फ अनुमान ही लगा रहे हैं. उनके धुर विरोधी करुणानिधि उनके स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें फैलाने में देखते हैं किस हद तक जा सकते हैं. 

फ्लैशबैक

परिवार वाले जयललिता को अम्मू कहकर पुकारते थे. उनका परिवार अपने सुंदर व्यक्तित्व और गोरे रंग के लिए मशहूर था. पति की अचानक मृत्यु के बाद उनकी मां ने एक्टिंग का काम किया. अम्मू एक होशियार लड़की थी जो सदा अपनी मां के पीछे हाथ में एक किताब लिए दिखती थी. उसका सपना आईएएस बनने का था. वे अच्छे स्कूलों में पढीं और मां के अक्सर घर में न रहने के बावजूद उन्हें काफी अच्छी परवरिश मिली.

जब कभी मां घर होती भी तो फिल्मोद्योग के लोग उनके साथ होते, जिन्हें अम्मू बिल्कुल पसंद नहीं करती थी. दसवीं की परीक्षाएं खत्म होने के बाद जयललिता को जबर्दस्ती फिल्म में काम करने के लिए कहा गया क्योंकि उनकी मां की कमाई कम होती जा रही थी. पहले उन्होंने पढ़ाई और शूटिंग दोनों एक साथ जारी रखीं लेकिन इससे बात नहीं बनी. उन्होंने अपना पढ़ाई का सपना छोड़ दिया. 

‘मैं लापरवाही नहीं कर सकती, क्योंकि मैं ऐसी ही हूं. अगर मै कोई काम हाथ में लेती हूं तो उसे कभी आधे-अधूरे मन से नहीं करती, भले ही यह मेरे डॉगी को नहलाना जैसा छोटा सा ही काम क्यों न हो. फिल्मों में एक्टिंग करना भी मेरे लिए ऐसा ही था. मुझे कोई संघर्ष नहीं करना पड़ा. मैं रातों रात स्टार बन गई और सफल हुईं. 

दो भाषाओं की लीड हीरोइन-तमिल और तेलगू.’ उनका सीधा सा मंत्र है, ‘मैं दुनिया में कुछ भी करने के लिए खुद को तैयार कर सकती हूं.’ यह उनके व्यक्तित्व से भी झलकता है.

देवी

वासंती जयललिता से पहली बार 1984 में मिली थी, जब वे राज्य सभा सांसद थीं और तुरंत ही वह उनसे प्रभावित हो गईं. लेकिन केवल वासंती ही नहीं जयललिता ने अपने आकर्षक व्यक्तित्व और जबर्दस्त इंग्लिश से इंदिरा गांधी से लेकर खुशवंत सिंह तक सबको प्रभावित किया है. 

एक सम्पादक ने वासंती को कहा, ‘पहली चीज, जिसने मुझे प्रभावित किया, वह थी जयललिता की सादगी और उनका गरिमापूर्ण व्यक्तित्व. साथ ही वे कोई मेक अप नहीं करतीं. मुश्किल से ही कोई यकीन करेगा कि किसी जमाने में वे दक्षिण भारत की सबसे चहेती ग्लैमर क्वीन रही हैं.’

 वासंती खुद ही जयललिता के व्यावसायिक रवैये की कायल हो गईं और उनके तेज तर्रार जवाबों से चकित भी. वे लिखती हैं, 'वे अपने बारे में काफी आश्वस्त दिखाई देती हैं. मैं सोच भी नही सकती कि एक ब्राहमण होते हुए वे द्रविड़ पार्टी के नेता के रूप में स्वीकार्यता पाने में कामयाब रही हैं. यह एक ऐसी पार्टी है, जो ब्राह्मणों के खिलाफ आंदोलन में शामिल रही है.'

वासंती उन्हें काफी कुशल लेकिन लाचार बताती हैं, ऐसा व्यक्तित्व जिसे कमतर आंका गया, आज दक्षिण में उनके प्रति आदर और डर दोनों ही है. ‘जे. जयललिता का ग्लैमर क्वीन से कद्दावर राजनेता बनने का सफर भारतीय राजनीति की अनोखी कहानी है. एक ऐसी कहानी जिसे सुनाया जाना जरूरी है. वह इसलिए कि यह एक आम महिला की कहानी है, जो अपने दम पर जीने के लिए संघर्ष करती है और इस पुरूष प्रधान समाज में इतनी शक्तिशाली नेता बन कर उभरीं.’

दूसरी बार वासंती की किताब पर प्रतिबंध नहीं लगा. लेकिन वासंती ने किताब में यह जरूर लिखा  कि ‘वे स्वयं खुल कर अपने बारे में नहीं बतातीं क्योंकि वे काफी जटिल और संकोची स्वभाव की हैं.'

प्रेम प्रसंग

जब जयललिता अपनी पहली फिल्म में काम कर रही थीं तो निर्देशक पंथुलु ने उन्हें अपनी अगली फिल्म आयिरात्थिल कुरवां के लिए अनुबंधित कर लिया, जिसमें उनके हीरो मैटिनी के स्टार एमजी रामचंद्रन उर्फ एमजीआर थे. जो उम्र में जयललिता से 35 साल बड़े थे और वे 16 साल की.

जयललिता को एमजीआर के साथ पहला ही सीन सुहाग रात का मिला. वे शर्माई हुई और बुरी तरह घबराई हुई थीं. फिल्म सुपरहिट हुई. एमजीआर और जयललिता उस जमाने की हिट जोड़ी बन गई. वे करीब पचास साल के थे और जयललिता किशोर अवस्था में.

जयललिता की तरफ एमजीआर का झुकाव किसी से छिपा नहीं रह सका लेकिन इतने बड़े स्टार पर कमेंट करने का दुस्साहस किसी के पास नहीं था. वे इस बात पर जोर देते कि उनकी सभी फिल्मों में जयललिता को ही उनकी हीरोइन बनाया जाए. अगर प्रोड्यूसर मना कर देते तो वे शूट पर इंतजार करवाते और अनिश्चित समय तक टालते रहते.

वासंती ने जयललिता के हवाले से थार में शूटिंग का एक वाकया लिखा है, जिसमें उन्हें नंगे पांव चलना पड़ा था. ‘मैं एक कदम भी नहीं चल पा रही थी. मैंने कुछ कहा तो नहीं लेकिन एमजीआर को मेरी तकलीफ का एहसास हो गया. वे अचानक पीछे से आए और मुझे बाहों में भर लिया. वे ऑफ स्क्रीन भी हीरो ही थे.

दर्द

कुछ समय बाद जयललिता को लगने लगा कि एमजीआर काफी ज्यादा ‘झिलाऊ और रौब जमाने वाले हो रहे हैं. ‘उन्होंने जयललिता की सारी गतिविधियों पर नियंत्रण रखना शुरू कर दिया, यहां तक कि वे क्या कपड़े पहनेंगी क्या नहीं, इस पर भी. एमजीआर ने उनके पैसे पर भी नियंत्रण करना शुरू कर दिया और उन्हें अपना ही पैसा लेने के लिए एमजीआर के अच्छे मूड का इंतजार करना पड़ता. वे एक दम खामोश-सी हो गईं और आजाद होना चाहती थीं.

एमजीआर राजनीति से गहरे जुड़ते चले गए और जयललिता तेलगू स्टार शोबन बाबू के नजदीक आ गईं. उन्हें लगा शोबन बाबू के रूप में अपना जीवनसाथी मिल गया जबकि वे शादीशुदा थे और उनके किशोर उम्र का एक बेटा भी था. उनके एक स्कूली दोस्त के मुताबिक उसने जयललिता और शोबन बाबू की शादी के फोटो भी देखे थे. एक अन्य दोस्त ने बताया शोबन बाबू ने अपनी गुपचुप शादी के बारे में किसी को नहीं बताया.

जयललिता का वैवाहिक जीवन अच्छा रहा. उस समय वे एक्टिंग के अपने करियर मे काफी ऊंचाई पर थीं. 1982 में वे अन्नाद्रमुक की सदस्य बन गईं. कोई नहीं जानता इसकी वजह क्या थी, लेकिन बहुत से लोगों का मानना है कि शोबन बाबू के साथ प्रेम में विफल रहने और फिल्मों में अपना करियर खत्म होता दिखाई देने के बाद, उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था.

एमजीआर अब तक दूसरी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके थे. उन्हें अपने जीवन के इस दूसरे पड़ाव पर उनमें ही थोड़ी उम्मीद दिखाई दी.

आयरन लेडी

जयललिता ने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ देखा था. अपनी पहली फिल्म के सैट पर उन्हें बिना किसी गलती के ‘कुतिया’ कह कर पुकारा गया. लाठियां लिए भीड़ उनकी ओर दौड़ी. फिल्म जगत में लोग उन्हें ‘अन्नी’ कहकर पुकारते थे जिसका मतलब था, बड़े भाई की बीवी. यहां भाई का मतलब एमजीआर से था, जो उनसे खुले आम प्यार जताते लेकिन उनके साथ शादी कभी नहीं की.

जब वे अन्नाद्रमुक में शामिल हुईं तो उन्होंने कुड्डलूर में एक ‘उत्सव जैसा जलूस’ निकाला गया. अखबारों ने इसे ‘कुड्डलूर कैब्रे’ नाम दिया. उन्हें एमजीआर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जबर्दस्ती घुसना पड़ा. वह दो दिन तक एमजीआर के शव के साथ खड़ी रही, भले ही इसके लिए उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़नाएं झेलनी पडीं. ‘लोग उनके पैरों पर चढ़ कर जा रहे थे. उन्हें नाखूनों से चूंटी काट रहे थे और उन्हें पिंच कर रहे थे ताकि वे वहां से चली जाएं.’

एमजीआर के भतीजे ने उन्हें ‘वेश्या’ कहा, मारा और उस गाड़ी से धकेल कर दूर कर दिया जिसमें एमजीआर का शव ले जाया जा रहा था. तमिलनाडु विधानसभा में द्रमुक के एक सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश में उनकी साड़ी ही खींच डाली. जयललिता जमीन पर गिर पड़ी. मगर हर बार वे एक विजेता की तरह मुसीबत से बाहर निकलीं जैसे कि उनका मंत्र है, ‘मैं दुनिया में कुछ भी करने के लिए खुद को तैयार कर सकती हूं.’

जीवन से बड़ा व्यक्तित्व

बहुत से समझदार लोग दूसरों को ऐसी सलाह देते रहते हैं कि चेन्नई न जाएं. उत्तर भारत में बैठ कर कोई यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि जयललिता चेन्नई के लोगों के लिए क्या है?

वासंती उन्हें एक देवी मानती हैं. वे बताती हैं इस देवी की फोटो ग्राइंडर, मिक्सी, चावल के कट्टे, लैपटॉप, हर घरेलू सामान पर मिल जाएगी. वे जब हेलीकॉप्टर से हवाई दौरे पर होती हैं तो उनके भक्त जमीन पर उन्हें देखकर दण्डवत हो जाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कि वे उनकी हाजिरी में खड़े हों.

वासंती लिखती हैं, 'वे अलग ही दिखाई देती हैं, अलौकिक और बड़ी, ठीक वैसे ही जैसे कि उनके पार्टी कार्यकर्ता उनके कट आउट होर्डिंग्स लेकर तमिलनाडु की गलियों में लगा देते हैं. फिलहाल जयललिता के अपोलो हॉस्पिटल से बाहर आने तक ‘समझदारों’ को झेलें.

First published: 6 October 2016, 7:25 IST
 
लमट र हसन @LamatAyub

Bats for the four-legged, can't stand most on two. Forced to venture into the world of homo sapiens to manage uninterrupted companionship of 16 cats, 2 dogs and counting... Can read books and paint pots and pay bills by being journalist.

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