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सोलर पावर ने बदली किस्मत जहां की किस्मत

लमत आर हसन | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कटिया गांव में रहने वाली किस्मत की जिंदगी वैसी ही रहती अगर सोलर पावर प्रोजेक्ट उनकी जिंदगी में दखल नहीं देता. कटिया में आज भी महिलाएं टॉयलेट के डर से रात का खाना नहीं खाती. मोबाइल चार्ज कराने के लिए उन्हें न केवल लंबी दूरी तय करनी होती है बल्कि इसके लिए कभी-कभी पांच रुपये तक भुगतान भी करना पड़ता है. 

लेकिन सोलर एनर्जी ने उनकी किस्मत बदल दी. आज किस्मत धमाका नमकीन ब्रांड से अपना कारोबार चला रही हैं. अब उन्हें रात का डिनर छोड़ने की जरूरत नहीं और न ही मोबाइल चार्ज कराने की चिंता है. किस्मत अब मुंबई में काम कर रहे अपने पति से मोबाइल पर रोजाना बात भी करती हैं.

हाल ही में किस्मत दिल्ली आई थीं. उन्हें वीमेन इन द वर्ल्ड इवेंट में बतौर मेहमान आमंत्रित किया गया था जहां उन्होंने सोलर एनर्जी से ग्रामीण जीवन में हो रहे बदलावों से लोगों को रूबरू कराया.

किस्मत ने बताया, 'आप अपनी आंख बंद कर जिस अंधेरे का एहसास करते हैं, पिछले साल अप्रैल तक मेरी जिंदगी उससे भी ज्यादा अंधेरी थी.' किस्मत अब एक कम्युनिटी चलाती हैं और गांव में सोलर एनर्जी को प्रोमोट करने का काम करती हैं.

स्मार्ट पावर

दुनिया भर में करीब 1.3 अरब लोगों तक अभी भी बिजली नहीं पहुंची है. भारत में ऐसे लोगों की आबादी करीब 30 करोड़ है. अप्रैल 2015 में रॉकफेलर फाउंडेशन ने बिहार और उत्तर प्रदेश में स्मार्ट पावर इंडिया प्रोजेक्ट की शुरुआत की.

बिहार और उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में सोलर प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है. फाउंडेशन की सीनियर एसोसिएट डायरेक्टर दीपाली खन्ना ने कहा, 'सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को नेशनल ग्रिड सिस्टम के साथ जोड़ने की योजना बनाई है लेकिन इसके बावजूद गांवों में बिजली की सप्लाई न के बराबर है.'

भारत सरकार की 24 घंटे बिजली की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए फाउंडेशन ने उन कम्युनिटी का चयन किया है जहां नेशनल ग्रिड से 10 पर्सेंट से भी कम बिजली का उपयोग किया जाता है. 

विकास तक पहुंच

स्मार्ट पावर मॉडल के तहत टॉवर बिजनेस में लगी टेलीकॉम कंपनी ने बिजली की डिमांड को बढ़ाया जिसकी वजह से एनर्जी सर्विस कंपनी को इस इलाके में पावर प्लांट बनाने की प्रेरणा मिली. खन्ना ने कहा, 'इस सिस्टम की मदद से एनर्जी सर्विस कंपनी बिजली बेच रही है जिससे गांव में रहने वाले परिवारों और कारोबारियों को फायदा हो रहा है.' उनके लिए यह मॉडल इस लिहाज से कारगर है कि यह सरकार के भविष्य के ग्रिड प्लान के साथ आसानी से घुलमिल सकता है. 

इसके अलावा यह मार्केट मॉडल है. इसका विस्तार किया जा सकता है और साथ ही यह टिकाऊ भी है. गांव में रहे रही आबादी के लिए यह आर्थिक मुनाफे का जरिया बनने की क्षमता रखता है. हालांकि फाउंडेशन के लिए बिजली की सप्लाई ही एकमात्र मुद्दा नहीं है. यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया कदम है, ताकि वह अधिक सुरक्षित और मजबूती के साथ बिना किसी निर्भरता के अपनी जिंदगी जी सकें. 

बदलाव की शुरुआत

क्योंकि शहरों से बाहर रहने वाली महिलाओं की जिंदगी अभी भी बेहद कठिन है. अंधेरा ढलते ही महिलाओं की जिंदगी थम जाती है. ऐसे में बिजली उनके लिए उम्मीद की रोशनी बनकर आती है. किस्मत इसकी सबसे बड़ी मिसाल है. मिनी ग्रिड से मिली बिजली ने उन्हें अपना कारोबार खड़ा करने में मदद दी.

अब उनकी योजना अपने कारोबार को बढ़ाने की है. किस्मत बताती हैं, 'अगर मैं अच्छा कर पाती हूं तो मेरे पति अमीन खान मुंबई से लौट कर मेरे काम में मेरी मदद करेंगे.'

अब किस्मत की तीनों बेटियां रात में देर तक पढ़ाई कर पाती हैं. केवल घरों तक बिजली पहुंचाना ही आखिरी मकसद नहीं हो सकता. इस प्रोजेक्ट को आर्थिक विकास के मौकों से जोड़ा जाना चाहिए. खन्ना कहती हैं, 'मॉडल का यह पहलू बेहद जरूरी है क्योंकि भारत के ग्रोथ का फायदा सभी तक पहुंचाने के लिए आर्थिक अवसरों का बढ़ना जरूरी है.' 

प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए इसे अन्य राज्यों में भी शुरू किया जा सकता है. जैसे कि अभी 65 ऑपरेशन सेंटर के साथ 5,000 कस्टमर्स जुड़े हुए हैं. इनमें 1,000 स्थानीय कारोबारी हैं. खन्ना को अगले तीन सालों में 1,000 गांवों तक पहुंचने की उम्मीद है ताकि लाखों की संख्या में भारतीयों की जिंदगी को रोशन किया जा सके. उन्होंने कहा, 'साल के अंत तक हमारा लक्ष्य 100 पावर प्लांट बनाने का है.'

solar village

फाउंडेशन का मकसद महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करना है. अन्य संगठन भी सोलर एनर्जी की मदद से सामाजिक समीकरणों को बदलने की कोशिश में लगे हुए हैं. 

संचिता गजपति राजू की संस्था एसएएनए (सोशल अवेयरनेस न्यूयर ऑल्टरनेटिव्स) पीने के साफ पानी को उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पि ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करती है. डब्लूआईटीडब्ल्यू के पैनल में शामिल राजू कहती हैं, 'यह एक लंबी लड़ाई है जिसे रातों रात नहीं जीता जा सकता.'

अशोक खोसला के नेतृत्व में चल रहा डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स, गांवों को माइक्रो ग्रिड के माध्यम से सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है. "बिजली आज मूल अधिकार में आता है. इसके लिए बिजली को किफायती दर पर मुहैया कराना होगा. तीनों संगठनों की राय है कि यह किया जा सकता हैं, और गांवों में बिजली देश के भविष्य को बदलने का काम करेगी.

First published: 28 November 2015, 9:21 IST
 
लमत आर हसन @LamatAyub

संवाददाता, कैच न्यूज़

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