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आईआईएमसी के झंडे तले आ सकते हैं एफटीआईआई और एसआरएफटीआई

प्रणेता झा | Updated on: 16 July 2016, 8:23 IST
(कैच न्यूज)

अब जबकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रलय ने आईआईएमसी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है तो संभावना है कि भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन प्रशिक्षण संस्थान (एफटीआईआई), पुणे और सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन प्रशिक्षण संस्थान (एसआरएफटीआई), कोलकाता को भी इससे संबद्ध कर दिया जाय.

डीएनए में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रस्ताव में कहा गया है कि एफटीआईआई, एसआरएफटीआई और एनीमेशन, गेमिंग व विजुअल इफेक्ट्स पर एक प्रस्तावित संस्थान नेशनल सेंटर फॉर एक्सीलेंस भी आईआईएमसी से संबद्ध किया जाएगा. फिलहाल आईआईएमसी के डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के इस प्रस्ताव को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की ओर से स्वीकृति मिलने का इंतजार है.

परस्पर फायदे का सौदा

आईआईएमसी के महानिदेशक और एफटीआईआई की संचालक परिषद के सदस्य केजी सुरेश ने इस रिपोर्ट से इनकार नहीं किया है लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर उनका टिप्पणी करना उचित नहीं है.

आईआईएमसी की कार्यकारी परिषद ने 21 जून को डीम्ड यूनिवर्सिटी का यह प्रस्ताव पारित कर दिया था, परन्तु सुरेश ने बताया कि प्रस्ताव में एफटीआईआई और एसआरएफटीआई को आईआईएमसी से संबद्ध करने की बात नहीं कही गई.

उन्होंने कहा, 'अब यह संस्थानों पर निर्भर है कि वे इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दें. आईआईएमसी और एफटीआईआई के बीच करीबी संबंध दोनों के लिए ही लाभकारी होगा.'

एफटीआईआई के विवादास्पद अध्यक्ष गजेन्द्र चौहान ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. चौहान ने कहा, 'स्वायत्त संस्था एफटीआईआई को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से वित्तीय सहायता मिलती है. एफटीआईआई ही अपने लिए विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने की मांग कर रहा है और भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अधिकारी शीघ्र ही संस्थान के दौरे पर आएंगे.' यद्यपि उन्होंने कहा वे ऐसे निर्णय का स्वागत करेंगे क्योंकि यह संस्थान और छात्रों दोनों के ही हित में है.

हास्यास्पद

कैच टीम ने जब इस मुद्दे पर छात्रों और एफटीआईआई एलुमिनाई से बात की तो उन्होंने कहा यह हास्यास्पद है. एफटीआईआई में सिनेमैटोग्राफी के फाइनल ईयर के छात्र विकास उर्स ने कहा, 'अगर यह सही है तो बहुत अजीब है.' उर्स गत वर्ष एफटीआईआई प्रमुख गजेंन्द्र चौहान की नियुक्ति के खिलाफ 139 दिन की हड़ताल करने वाले छात्र संघ के महासचिव थे. उन्होंने कहा यह कदम देश के दो बेहतरीन फिल्म संस्थानों एफटीआईआई और एसआरएफटीआई को नाकारा करने जैसा होगा.

वे कहते हैं, 'एक फिल्म संस्थान और एक जन संचार संस्थान कार्यशैली और विचारधारा की दृष्टि से दो बिलकुल अलग-अलग संस्थान हैं. प्रस्तावित कदम से संस्थानों के केंद्रीकरण के अलावा कोई और लाभ नहीं होगा और सारे संस्थानों को दिल्ली स्थित एकल पावर सेंटर से ही नियंत्रित किया जाएगा.'

उर्स के मुताबिक हाल ही में जुलाई माह के प्रारंभ में एफटीआईआई ने एक प्रस्ताव पारित किया था कि बाजार की मांग पर आधारित 25 नए पाठ्यक्रम शुरू कर एफटीआईआई को डिजिटल मीडिया यूनिवर्सिटी बना दिया जाए. इसमें मेकअप, स्टंट, रेडियो जॉकी, गेमिंग व एनिमेशन जैसे लघु अवधि पाठ्यक्रम शामिल हैं. उर्स ने कहा छात्र इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं.

शिक्षा का निजीकरण

एफटीआईआई के छात्र रहे फिल्म मेकर किसलय कहते हैं एफटीआईआई को आईआईएमसी से संबद्ध करने का मतलब है संस्थान की स्वतंत्रता का हनन. इससे बेहतर होगा कि एफटीआईआई को ही फिल्म निर्माण विश्वविद्यालय बना दिया जाए. उनके अनुसार डिजिटल यूनिवर्सिटी बना कर लघु अवधि के पाठ्यक्रम शामिल करने का विचार पूरी तरह बाजारवादी शक्तियों के सामने घुटने टेकना है.

इसी प्रकार एफटीआईआई के छात्र रहे प्रतीक वत्स का कहना है, 'निजीकरण का तो केवल नाम है. सरकार न केवल एफटीआईआई बल्कि ज्यादातर केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कम करने की कोशिश कर रही है क्योंकि वे अंतत: सारे शिक्षण संस्थानों का निजीकरण करना चाहते हैं.'

उन्होंने कहा, 'वर्ष 2000 के प्रारंभ में एनडीए सरकार के कार्यकाल के दौरान एफटीआईआई के निजीकरण का प्रयास किया गया था. उस वक्त यह प्रस्ताव लाया गया कि रिलायन्स के साथ पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर एक गेमिंग और एनिमेशन स्टूडियो शुरू किया जाए. परन्तु शुक्र है ऐसा हो नहीं सका.

First published: 16 July 2016, 8:23 IST
 
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