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सवर्ण आरक्षण को राज्यसभा से भी हरी झंडी, राष्ट्रपति की मुहर का इंतजार

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 January 2019, 7:37 IST

मोदी द्वारा लाए गए सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत के आरक्षण को बुधवार को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई. इसके लिए 124वां संविधान संशोधन विधेयक, बुधवार को सदन से पास हो गया. अब इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर का ही इंतजार है.

बुधवार को राज्यसभा में करीब 10 घंटे तक चली बैठक के बाद इस 124वें संविधान संशोधन विधेयक 2019 को 165 मतों से मंजूरी दे दी गई. हालांकि सदन में विपक्ष ने कुछ संशोधनों का प्रस्ताव रखा जिसे मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया. गौरतलब है की लोकसभा से पहले ही इस विधेयक को मंजूरी मिल गई थी. जहां इसके विरोध में केवल तीन मत ही पड़े थे.

बुधवार को उच्च सदन में पेश किए गये इस विधेयक का विपक्ष समेत लगभग सभी दलों ने समर्थन किया. हालांकि इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने इसे लोकसभा चुनाव से पहले का चुनावी स्टंट भी करार दिया. वहीं इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर भी विपक्ष ने आशंका जताई है. वहीं सरकार का दावा है कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा में भी सही साबित होगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिए लाया गया है.

वहीं पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक फैसले को लेकर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा, ''यह हमारी संस्कृति की विशेषता है कि जहां प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एससी और एसटी को आरक्षण दिया वहीं पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सामान्य वर्ग को आरक्षण देने की यह पहल की है.''

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वहीं संविधान में मौजूद एसटी, एससी एवं ओबीसी आरक्षण को लेकर कई दलों के सदस्यों की आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा उन्होंने इस बात की सफाई दी कि संविधान में एससी- एसटी और ओबीसी के लिए मौजूद 49.5 प्रतिशत आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. हालांकि सदन में अन्नाद्रमुक सदस्यों ने इस विधेयक को 'असंवैधानिक' बताते हुए सदन से वॉकआउट किया था.

First published: 10 January 2019, 7:37 IST
 
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