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दलित लड़की ने तोड़ लिया फूल तो पूरे गांव को मिली सजा, 40 परिवारों का किया गया बहिष्कार

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 August 2020, 17:11 IST
(Indian Express)

ओडिशा के ढेनकनाल जिले के कांटियो केटनी गांव में बीते दो सप्ताह से 40 दलित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया गया है. दरअसल, दो महीने पहले एक दलित लड़की ने उच्ची जाती के व्यक्ति के घर से पीछे से फूल तोड़ लिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में जब एक परिवार ने अपना विरोध जताया तो इसके बाद दोनों समुदाय में तनाव बढ़ गया जिसके बाद गांव के सभी 40 दलित परिवारों का सामाजि बहिष्कार कर दिया गया.


लड़की के पिता निरजंन नायक ने कहा,"हमने तुरंत माफी मांग ली थी जिससे मामला सुलझ जाए, लेकिन इस घटना के बाद, कई मीटिंग बुलाई गई और उसके बाद उन्होंने हमारा सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लिया. किसी को भी हमशे बात करने की अनुमति नहीं है. हमे गांव में किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति नहीं है."

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खबर के अनुसार, गांव में करीब 800 परिवार जिसमें 40 परिवार अनुशूचित जाती के नाइक समुदाय के हैं. इस मामले में समुदाय ने जिला अधिकारी को संबंधित थाने को 17 अगस्त को एक ज्ञापन सौंंपा गया है. ज्योति नाइक नामक महिला ने कहा,"हमे पीडीएस डीलर और गांव के किराना दुकानों से सामान देना बंद कर दिया गया, जिसके कारण हमे पांच किलोमीटर दूर चलकर जाना पड़ता था. गांव वाले भी हमशे बात नहीं करते थे."

दलित समुदाय ने जो ज्ञापन सौंपा हैं उसमें उन्होंने यह भी आरोप लगाए हैं कि गांव के लोगों ने इस घटना के बाद फैसला लिया है कि उन्हें गांव में काम ना मिले और काम के सिलसिले में उन्हें बाहर जाना पड़े. हमारे अधिकतर लोग या तो कम पढ़े लिखे हैं या अनपढ़ हैं और गांव के खेतों में काम करते हैं. समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया है कि गांव की सड़क पर शादियों या अंतिम संस्कार के लिए भी लोग जमा न हों. इसके अलावा एक फरमान जारी किया गया है कि दलित समुदाय के बच्चे सरकारी स्कूल में भी नहीं पढ़ सकते. इतना ही नहीं दलित समुदाय के शिक्षकों को भी कहा है कि वो अपना तबादला कहीं और करवा लें.

हालांकि, ग्राम सरपंच और कमेटी के सदस्यों ने इस बात को माना है कि सभी ने दलित परिवारों से बात नहीं करने का फैलसा लिया है लेकिन बाकी के आरोप निराधार है. गंवा विकास समीति के सचिव हरमोहन मलिक ने कहा,"यह सच है कि हम उनके बाते नहीं कर रहे हैं और यह उनके गलत कामों के कारण है. बाकी के आरोप बेबुनियाद है." वहीं मामले पर सरपंच प्राणबंधु दास ने कहा,"यह दो समुदायों के बीच का मसला है और हम इसे जल्द सुलझा लेंगे. बहुजन आबादी की शिकायत है कि दलितों द्वारा उन्हें झूठे मुकदमों में एससी-एसटी एक्ट में फंसा दिया जाता है."

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First published: 21 August 2020, 17:09 IST
 
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