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फ्रांस की एस्कॉर्ट वेबसाइट 'गर्ल्स ऑफ पैरडाइस' और सेक्स वर्करों की आवाज

दुर्गा एम सेनगुप्ता | Updated on: 4 October 2016, 7:20 IST
QUICK PILL
  • दुनियाभर में सेक्स वर्करों के साथ हिंसा कोई नई बात नहीं है लेकिन जब कोई आम सी वेबसाइट उनकी आवाज़ बन जाए तो क्या कहना.

वह आइंस के रोजमर्रा काम का दिन था, जिस दिन वह कुछ गलत लोगों के चंगुल में फंस गई थी. सेक्स वर्कर आइंस को काम के बदले में पैसे की जगह मौत मिली. उसे उसके क्लाइंटों ने 53 बार चाकू से गोद कर मारा. और यह हुआ उसके खुद के अपेक्षाकृत सुरक्षित अपार्टमेंट में, जहां वह नियमित रूप से अपना काम करती थी.

यह हादसा आइंस के साथ हुआ, पर अक्सर ऐसे हादसे विश्व की हजारों सेक्स वर्करों के साथ होते हैं. सेक्स को अक्सर दुनिया का सबसे पुराना धंधा कहा जाता है, पर इस काम में उन्हें किसी तरह की सुरक्षा नहीं मिलती है. और यही तर्क वे लोग इस्तेमाल करते हैं, जो इसे अवैध बने रहने देना चाहते हैं.

पर यह तर्क सचाई से परे है. न्यूजीलैंड और जर्मनी जैसे देशों ने सेक्स वर्करों के लिए उनके ठिकानों का लाइसेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और रोजगार की योजनाएं बनाई हैं. यही नहीं, ये देश उनके धंधे के लिए सबसे सुरक्षित स्थान हैं.

जहां वे छिपती हैं

इससे समाज की इन बेजुबान सदस्यों को मदद नहीं मिलती. जो समाज में हमेशा नीची नजरों से देखी जाती रही हैं, और फिर भी समाज के हर वर्ग के ग्राहकों की मांग हैं, नैतिक रूप से स्वीकार्य व्यवहार की परतों के बीच छिपती हैं. गूगल सर्च पर आपको जानकारी मिलेगी कि 'सुरक्षा' और 'सेक्स शब्दों से जुड़ी सभी बातें सेक्स वर्करों की सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ पुरुषों और यौन संक्रमण से सुरक्षा के रिजल्ट पेशकरती हैं.

जब 'सेक्स के लिए महफूज जगह' की जानकारी चाहते हैं, तब भी सर्च के परिणाम यह बताने में विफल रहते हैं. सेक्स वर्कर महज वस्तु है, बेजुबान है, वह सवाल नहीं करती, बेहतर अवसरों की तलाश नहीं करती, और इंटरनेट पर तो उनकी कोई आवाज ही नहीं है.

शायद यहीं इसका जवाब है. यदि सेक्स खरीदने का अनुभव सैद्धांतिक रूप से ग्राहक का होता, ना कि सेक्स वर्कर का, तब तो उस कृत्य की जिम्मेदारी ग्राहक की भी होनी चाहिए थी. सेक्स की जिम्मेदारी सेक्स वर्करों पर डालना और कानूनी जटिलताओं की स्थिति में ग्राहकों को छोड़ देना, मूलत: गलत है.

फ्रांस की सफल पहल

सेक्स के लिए ग्राहकों को दोषी बताकर फ्रांस सेक्स वर्करों के खिलाफ अपराधों में कटौती करने में सफल रहा है. फ्रांस के मुताबिक वे खरीदे हुए सेक्स के लिए जिम्मेदार हैं. इस तरह फ्रांस ने प्राथमिक स्तर पर कानून का डर, पर वृहत स्तर पर सामाजिक सुधार की स्थापना की है.

इस साल 6 अप्रैल को फ्रांस ने ग्राहकों को सेक्स के लिए दंड देने वाला पहला राष्ट्रीय कानून बनाया. सेक्स के लिए भुगतान करने को अवैध करार करके फ्रांस ने सेक्स से जुड़ी बहस को वैध करने के लिए सफलतापूर्वक तीसरा विकल्प दिया है.

दिलचस्प यह है कि इस अहम काम को एक विज्ञापन ने अपने हाथ में लिया. और यही दावा फ्रांस की एक एनजीओ 'ली मूवमेंट दू निद' के साथ जुड़ने वाले मैकेन पेरिस विज्ञापनदाता का है.

आइंस और उस जैसी कई औरतें, जिनके साथ सेक्स के दौरान क्रूरता और हत्या की गई, को नकली एक नकली एस्कॉर्ट साइट पर प्रतिनिधित्व मिला है. वेबसाइट बिलकुल किसी एस्कोर्ट सर्विस की आदर्श खोज-सी लगती है. हालांकि वेबसाइट के लिए एड्स पर क्लिक करने से वेबसाइट देखने वालों को विज्ञापन में दी गई सेक्स वर्करों की लहूलुहान मौतों की जानकारी विस्तार से मिल जाएगी.

इसमें कोई शक नहीं कि तीखी आलोचना और तुरंत असर दिखाने वाली इस वेबसाइट ने सेक्स वर्करों के ग्राहकों को दंड देने की बहस के रास्ते खोल दिए हैं. जिस हफ्ते एड आया, 'एस्कोर्ट वेबसाइट' को 600 से ज्यादा कॉल्स और हजारों चैट मैसेज मिले. हरेक क्लाइंट को एस्कॉर्ट की मौत की जानकारी दी गई.

नेशनल पब्लिक रेडियो को हाल में इंटरव्यू देते हुए मैकेन पेरिस के एक्जीक्यूटिव क्रिएटिव डाइरेक्टर रिकार्डो फ्रीगोसो ने कॉलर्स से मिली दो तरह की (दमदार) प्रतिक्रियाओं के बारे में बताया.

'उनमें से कई हैरान, नाराज थे और बस इस संवाद को खत्म कर देना चाहते थे.' उन्होंने आगे कहा, 'पर फिर हमारे पास बहुत ही अहम माइनोरिटी हैं.'

'एक माइनोरिटी प्रतिक्रिया उग्र है, उग्र प्रतिक्रिया. या जोक्स. एक व्यक्ति ने यह पूछने पर कि सेक्स वर्कर अस्पताल हों तो, जवाब दिया कि हो सकता है वहां उसका दोस्त हो. और कुछ माइनोरिटीज करुणा जता रहे हैं, स्टोरी में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं.'

यदि ऐसा कहीं है, तो फ्रीगोसो सब जगह इस तरह के कैंपेन की जरूरत महसूस करते हैं. कुछ लोग, इस तरह के क्रूर हादसों को सुन-देखने के बाद कि जिन औरतों के साथ वे संबंध बनाना चाह रहे थे, उन्हें किस तरह मार दिया गया, फिर भी तुरंत ऐसा करना चाहते हैं. यह बहुत ही भयावह है. इसके अलावा उनके कथन इस कानून के पक्ष में तर्क को मजबूत करते हैं.

हालांकि यह एक एड कैंपेन है, फिर भी जो बात यहां महत्वपूर्ण है, वह यह कि इसने न केवल कानून में सफलतापूर्वक बदलाव के लिए जोर दिया, बल्कि 6 महीने के कम समय में ही इसका असर सामने आ रहा है.

First published: 4 October 2016, 7:20 IST
 
दुर्गा एम सेनगुप्ता @the_bongrel

Feminist and culturally displaced, Durga tries her best to live up to her overpowering name. She speaks four languages, by default, and has an unhealthy love for cheesy foods. Assistant Editor at Catch, Durga hopes to bring in a focus on gender politics and the role in plays in all our interactions.

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