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हंगर इंडेक्स 2016: भारत में कम वज़न के बच्चे पाकिस्तान से ज़्यादा

निहार गोखले | Updated on: 14 October 2016, 8:29 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • ग्लोबर हंगर इंडेक्स 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 50 देश लगभग भुखमरी की कगार पर हैं. 118 देशों की सूची में भारत 97वें पायदान पर है.
  • बाल कुपोषण के मामले में भारत की स्थिति पाकिस्तान से भी बदतर है. यहां कम वज़न के बच्चों की तादात 15 और पाकिस्तान में 10 फ़ीसदी है. 

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को गरीबी से लड़ने की हिदायत दी थी. मगर ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2016 की ताज़ा सूची में भारत की स्थिति पाकिस्तान के मुकाबले बदतर है. बाल कुपोषण यानी कि औसत से कम वजन के बच्चों की संख्या भारत में पाकिस्तान से कहीं अधिक है. 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2016 इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है. इसके मुताबिक भारत में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में से 15 फ़ीसदी बेहद कमजोर हैं. लंबाई की तुलना में उनका वजन बहुत कम है. जबकि, पाकिस्तान में ऐसे बच्चों की संख्या 10 प्रतिशत है. हालांकि 1990-94 के बीच भारत में कमजोर बच्चों की संख्या 20 और पाकिस्तान में 12 प्रतिशत थी.  

बावजूद इसके, यह रिपोर्ट भारत के लिए सुकून देने वाली नहीं है. वजह ग्लोबल हंगर इंडेक्स में बेनिन, टोगो, नाइजीरिया, युगांडा और जांबिया जैसे देशों का प्रदर्शन है जो कि भारत से काफी बेहतर है. 118 देशों की इस सूची में भारत फिलहाल 97वें पायदान पर है. 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक भूख का अर्थ है, प्रतिदिन 1800 कैलोरी से कम खाना मिल पाना. इस रिपोर्ट के लिए फूड पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने  2011-16 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया है. इसका दो तिहाई हिस्सा पांच साल से कम उम्र के बच्चों के कुपोषण और शिशु मृत्यु दर पर आधारित है. 

इससे उनके खाने में ली गई कैलोरी, स्वच्छता, साफ-सफाई और मातृत्व स्वास्थ्य का पता चलता है. इंडेक्स का एक तिहाई हिस्सा बच्चों की लंबाई और उनके वजन पर आधारित है. इसी आधार पर गंभीर कुपोषण का अनुमान लगाया जाता है.

795 मिलियन भूखे

इस नई रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 30 प्रतिशत कमी आई है  जो कि सुधार का अच्छा संकेत है. 22 देशों ने 50 प्रतिशत से अधिक तक अपने रिकॉर्ड में सुधार किया है. बावजूद इसके, दुनिया के 795 लोग रोजाना भूखे मरने को मजबूर हैं. मतलब हर 9 में से एक इंसान भूखमरी का शिकार है. दुनिया में 50 देश तो ऐसे हैं जो बुरी तरह भुखमरी की चपेट में हैं.  

38 प्रतिशत बच्चे बौने

जहां तक भारत का सवाल है तो यहां 5 साल से कम उम्र के 38 फ़ीसदी बच्चे छोटे कद के हैं. इसका मतलब है कि उनकी जिनती लंबाई होनी चाहिए थी, वो नहीं है. सबसे बुरा हाल मध्य अफ्रीकी देश का है जहां ठिगने कद के बच्चों की संख्या उतनी ही है, जितनी अफगानिस्तान, इथोपिया और इंडोनेशिया में है. 1991-92 में कम विकसित लंबाई वाले बच्चों की तादाद 60 प्रतिशत यानी लगभग दो तिहाई थी. यह संख्या 2006-10 के बीच घटकर 48 प्रतिशत रह गई थी और अब 38 प्रतिशत है.  

5 साल की उम्र से पहले मौत

भारत में 5 प्रतिशत बच्चे 5 साल की उम्र तक पहुंचने के पूर्व मर जाते हैं. इराक में शिशु मृत्यु दर 3 प्रतिशत है. हालांकि दो दशकों में भारत में शिशु मृत्यु की दर में काफी कमी आई है. यह 1992 में 12 प्रतिशत थी जो 2008 में घटकर 6-6 प्रतिशत और 2015 में 5 प्रतिशत रह गई है. पाकिस्तान में फ़िलहाल शिशु मृत्यु दर 8 प्रतिशत है.  

15 प्रतिशत कुपोषण के शिकार

2014-16 के आंकड़ों के अनुसार ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी 15,  चीन की 9 और ब्राजील की केवल 1.6 प्रतिशत थी. इस दौरान भारत में कुपोषण की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. यहां 1991-92 में 22 फ़ीसदी आबादी कुपोषित थी. डोमिनिकन गणराज्य, जिसकी वैश्विक कुपोषण में हिस्सेदारी 1991-92 में 32 फ़ीसदी थी, 2014-16 में घट कर 12 फ़ीसदी रह गई.  

25 प्रतिशत सुधार

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 2000 के बाद से भारत में 25 प्रतिशत सुधार देखा गया, जो कि काफी कम है. इस मामले में इथियोपिया, अंगोला, कैमरून और केन्या में 40 प्रतिशत से अधिक सुधार हुआ है. बांग्लादेश, जिम्बाब्वे और कांगो गणराज्य में भुखमरी की हालत में लगभग 30 प्रतिशत सुधार हुआ है. 

First published: 14 October 2016, 8:29 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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