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आरएसएस, कांग्रेस, लेफ्ट और आप, सभी एक मंच पर

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 October 2016, 2:50 IST
QUICK PILL
  • सरसों सत्याग्रह\' नाम से आंदोलन चला रहे प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी भेजकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे जीएम मस्टर्ड के बीज को मंजूरी न दें.
  • चिट्ठी में कहा गया है कि जीएम किस्म के इन बीजों की खेती से एक तो सुरक्षा को खतरा है, दूसरा इनकी उत्पदकता भी कम है. 

राजधानी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया जीएम मस्टर्ड के बीज का विरोध करने के लिए कृषि कार्यकर्ताओं के साथ एक मंच पर दिखाई दिए. इस मंच पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का  जीएम मस्टर्ड बीज को नकारने वाले भाशण का वीडियो भी चल रहा था. आप के मंत्री कपिल मिश्रा और कांग्रेस सांसद गौरव गोयल ने मौजूद रहे. 

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय व्यावसायिक खेती के लिए जीएम मस्टर्ड बीज बोने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है. प्रदर्शनकारियों में पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों के किसान और 130 संगठनों के सदस्य भी शामिल थे.

अखिल भारतीय किसान सभा, भारतीय किसान यूनियन, न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव, आरएसएस का स्वदेशी जागरण मंच और फार्मर्स विंग भारतीय किसान संघ के अलावा ऑर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया, ग्रीन पीस इंडिया और जीएम मुक्त भारत गठबंधन इनमें प्रमुख हैं.

जीएम मस्टर्ड का विरोध करने के लिए 20 राज्यों से किसान प्रतिनिधि विपक्षी दलों के साथ आ गए हैं.

सभी ने आरोप लगाया कि जीएम मस्टर्ड किसानों के लिए नुकसानदेह है और सरकार ने इसकी खेती के लिए दी जाने वाली मंजूरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती. 'सरसों सत्याग्रह' नाम से आंदोलन चला रहे प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी भेजकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे जीएम मस्टर्ड के बीज को मंजूरी न दें.

इस अपील में कहा गया है कि 'जीएम मस्टर्ड के बारे में चिंता के चलते ही हम 20 राज्यों से निकल कर यहां राजधानी दिल्ली में इकठ्ठे हुए हैं'. चिट्ठी में कहा गया है कि जीएम किस्म के इन बीजों की खेती से एक तो सुरक्षा को खतरा है, दूसरा इनकी उत्पदकता भी कम है. उन्होंने कहा सरकार ने जीएम मस्टर्ड की वजह से शहद उत्पादन, ऑर्गेनिक खेती और आयर्वेद पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा गया. 

किसान नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा, जीएम बीज लाने और संकर फसलों से किसानों की समस्या हल नहीं होगी. किसानों को उनकी फसल के अच्छे दाम दिलवाने की गारंटी देनी होगी. भारतीय किसान यूनियन के चौधरी राकेश टिकैत ने कहा, ऐसा नहीं है कि जीएम मस्टर्ड से दाम बढ़ेंगे. अच्छे दाम मिले तो मौजूदा बीजों से भी उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.

इंडियन कॉ-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ फार्मर्स मूवमेंट के संयोजक यदुवीर सिंह ने कहा जीएम बीजों की खेती से एक तो स्थानीय किस्में खत्म हो जाती हैं. दूसरा, किसानों को बीज खरीदने के लिए निर्भर रहना पड़ता है. अगर किसान का ही शोषण हो रहा है तो जीएम कोई समाधान नहीं है. इसके अलावा लाखों परिवार सरसों का सेवन करते हैं. इसलिए हम इसमें 0.01 प्रतिशत का भी जोखिम नहीं उठा सकते. 

क्या कहा नेताओं ने

आरएसएस के किसान प्रकोष्ठ भारतीय किसान संघ के नेता रतन लाल डागा ने कहा, जीएम मस्टर्ड बीज थोपने का सरकार का तरीका ईस्ट इंडिया कम्पनी के जमाने की याद दिलाता है. जब इसने ज्वार के बीजों की एक किस्म को ऐसे ही किसानों पर थोपा था, जिससे किसानों का ही नुकसान हुआ था. 

असम से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, 'भाजपा को लगता है कि किसान विकास नहीं चाहते लेकिन सच्चाई यह है कि किसान ही सबसे ज्यादा प्रगतिवादी हैं'.

दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने भी जीएम मस्टर्ड बीज पर आपत्ति जताई. जीएम मस्टर्ड के बारे में पर्यावरण मंत्रालय की जेनेटिक इंजिनियरिंग अप्रेजल कमेटी फैसला करेगी कि इसकी इजाज़त दी जाए या नहीं.

जीईएसी के एक टेक्नीकल पैनल ने 5 सितम्बर को एक रिपोर्ट प्रकाशित कर कहा था कि जीएम मस्टर्ड का सेवन इंसान और जानवरों, दोनों के लिए सुरक्षित है. इस पर 5 अक्टूबर तक जनता की राय मांगी गई थी. जीएम मस्टर्ड पर इस पूरी रिपोर्ट को नई दिल्ली स्थित मंत्रालय में जनता के देखने के लिए रखा गया था. इस पर जनता की टिप्पणियों को मंत्रालय के टेक्निकल पैनल के पास विचार के लिए भेज दिया गया है.

अब इस पर अंतिम फैसला पर्यावरण मंत्री अनिल एम. दवे करेंगे. जीईएसी के समर्थन के बावजूद वे इस प्रस्ताव को ठुकरा सकते है. पूर्व मंत्री जयराम रमेश ने बीटी बैंगन के प्रस्ताव के साथ यही किया था. इस बीच, 7 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक जीएम मस्टर्ड के बीजों को व्यावसायिक तौर पर बाजार में बेचने पर रोक लगा दी है.

First published: 27 October 2016, 2:50 IST
 
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