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एमजीपी से भाजपा और कांग्रेस सांसत में

आकाश बिष्ट | Updated on: 23 September 2016, 20:46 IST
QUICK PILL
  • गोवा की सबसे पुरानी पार्टी, महाराष्ट्रवादी गोमंटक पार्टी (एमजीपी) चुपचाप समर्थन की तैयारी कर रही है और खबर है कि वह भाजपा और कांग्रेस नेताओं के साथ बात कर रही है, जिनमें से कोई भी पार्टी उसके साथ हो सकती है.
  • एमजीपी नेता भी अकेले चुनाव लडऩे पर विचार कर रहे हैं और बागी आरएसएस ग्रुप के समर्थन से संभव है कि आने वाले चुनावों में पार्टी पासा पलट दे.

गोवा में जैसे ही चुनावी माहौल गरमाने लगा, सत्तासीन पार्टी भाजपा और विपक्ष की मुख्य पार्टी कांग्रेस ने वहां के हालात का जायजा लेने अपने-अपने कूटनीतिज्ञों को भेजा है, खासकर इसलिए भी कि उनके काडर के भीतर मतभेद बढ़ रहे थे.

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह और जहाजरानी एवं सडक़ परिवहन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को वहां के हालत का जायजा लेने और यदि हालात पक्ष में ना हों, तो उन्हें दुरुस्त करने की जिम्मेदारी दी गई है. 

गोवा में पूर्व आरएसएस प्रमुख सुभाष वेलिंगकर ने अपनी पार्टी लॉन्च करने की धमकी और सत्तासीन पार्टी को सत्ता में लौटने से रोकने की प्रतिज्ञा की है. इससे भाजपा अगले साल के विधानसभा चुनावों में अपनी संभावनाओं को लेकर चिंतित है. यहां तक कि कांग्रेस भी अपने नेताओं द्वारा चुनाव के ठीक पहले पार्टी छोडऩे की अफवाहों से निराश हैं.

इन सबके बीच गोवा की सबसे पुरानी पार्टी, महाराष्ट्रवादी गोमंटक पार्टी (एमजीपी) चुपचाप समर्थन की तैयारी कर रही है और खबर है कि वह भाजपा और कांग्रेस नेताओं के साथ बात कर रही है, जिनमें से कोई भी पार्टी उसके साथ हो सकती है. 

एमजीपी नेता भी अकेले चुनाव लडऩे पर विचार कर रहे हैं और बागी आरएसएस ग्रुप के समर्थन से संभव है कि आने वाले चुनावों में पार्टी पासा पलट दे.

हाल में, भाजपा की समर्थक, एमजीपी के पास विधानसभा में तीन विधायक हैं और उससे कांग्रेस और भाजपा दोनों ने समर्थन मांगा है. 

कैच  से बात करते समय एमजीपी के वरिष्ठ नेता और भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री रामकृष्ण धवालीकर ने कहा था कि पार्टी भाजपा के साथ चुनाव लड़ेगी, पर साथ ही उन्होंने वेलिंगकर का समर्थन किया. सूत्रों ने कैच को जानकारी दी कि बागी आरएसएस ग्रुप भी एमजीपी और वेलिंगकर को समर्थन दे सकता है. 

पिछले 14 साल से भाजपा और कांग्रेस की छाया में होने के कारण एमजीपी 1961 में पुर्तगालियों से आजादी पाने के बाद गोवा पर शासन करने वाली पहली पार्टी थी. गैरहिंदू ब्रह्मणों के समर्थन से पार्टी ने आजादी के बाद राज्य पर 17 साल शासन किया

एमजीपी 1961 में पुर्तगालियों से आजादी पाने के बाद गोवा पर शासन करने वाली पहली पार्टी थी.

1999 और 2005 के बीच अधिकांश हिंदू मतदाता भाजपा का समर्थन करने लगे, जिससे एमजीपी की चुनावी सफलता जबरदस्त झटका लगा.

भाजपा के साथ गठबंधन से पार्टी को एमजीपी के हिस्से के वोट खाने का मौका मिल गया और तब से पार्टी उतनी मजबूत और उपयोगी नहीं रही, जितनी कभी हुआ करती थी. 1994 की 10 सीटें 1999 में घटकर 4 रह गईं, जबकि भाजपा ने 10 सीटें हासिल कर लीं.

2007 में एमजीपी ने कांग्रेस को समर्थन दिया और फिर भाजपा के साथ हो गई, जिसने 2012 में चुनाव जीता. जब गडकरी एमजीपी के साथ गठबंधन बनाने में सफल हुए थे. हालांकि एमजीपी के गोवा राजनीति में एक शक्तिशाली पार्टी के रूप में उभरने से भाजपा और कांग्रेेस दोनों चिंतित हैं और खबर है कि दोनों पार्टी के नेता एमजीपी नेताओं के पास अपने भेदिए भेज रहे हैं.

वहां के हालात देखते हुए एमजीपी के अकेले चुनाव लडऩे की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता. यदि वह ऐसा करती है तो संभव है कि वह भाजपा के हिस्से के वोट खा जाए.  

भेदियों का दावा है कि इसी वजह से पार्टी ने गडकरी को जिम्मेदारी देकर हाल में गोवा का प्रभारी नियुक्त किया है ताकि वह भाजपा की स्थिति को निर्णायक चुनावों से पहले दुरुस्त करे. यह फैसला उन्होंने इसलिए भी लिया क्योंकि उनके एमजीपी के धवालीकर भाइयों के साथ अच्छे संबंध हैं.

भाजपा के साथ गठबंधन से पार्टी को एमजीपी के हिस्से के वोट बैंंक में सेंध लगाने में मदद मिल गई.

दिलचस्प बात यह है कि वेलिंगकर ने पहले गडकरी की उनकी बेदखली के लिए आलोचना की थी. जबकि एक वरिष्ठ आरएसएस नेता ने राज्य में प्रगति को लेकर नागपुर को भटकाने के लिए केंद्रीय मंत्री पर दोष लगाया था. गडकरी के इंतजाम से यह देखना शेष है कि उसके आने को लेकर आरएसएस किस तरह की प्रतिक्रिया करते हैं. 

जब से वेलिंगकर ने क्षेत्रीय भाषा में निर्देश का माध्यम नहीं लागू करने और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को वृत्तियां नहीं देने के लिए पदस्थ मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत परसेकर का विरोध किया है. 

भाजपा के कूटनीतिज्ञ आरएसएस काडर के भीतर विरोध और आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की संभावनाओं को लेकर चिंतित हैं. आरएसएस के नेता और उनके काडर वेलिंगकर को समर्थन दे रहे हैं और यदि उनकी पार्टी चुनाव लड़ती है तो वह ग्रामीण गोवा में भाजपा के समर्थन के आधार को तोड़ सकती है.

इन हालात ने आरएसएस के भीतर पहले विद्रोह को लेकर भाजपा को अतिसंवेदनशील बना दिया है. उनकी मुश्किलें और बढ़ाने के लिए वेलिंगकर ने आरएसएस को भाजपा का बहिष्कार करने को कहा है, जिससे गंभीर राजनीतिक जटिलताएं हो सकती हैं.

First published: 23 September 2016, 20:46 IST
 
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