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चुनाव नतीजे कहीं 'आप' के लिए ख़तरे की घंटी तो नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 March 2017, 13:24 IST

पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने का सिलसिला जारी है. इन नतीजों से गोवा और पंजाब में अपनी जीत की राह देखने वाली आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. दो राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाने के लिए प्रयास करने वाली आप के लिए कहीं यह परिणाम खतरे की घंटी तो नहीं हैं.

दिल्ली के बाहर आम आदमी पार्टी के लिए ये दूसरे विधानसभा चुनाव थे, जिनमें पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. गोवा और पंजाब में आप ने अपनी जीत की संभावना को लेकर दांव खेला. पार्टी की नजर इस साल गुजरात और अगले साल राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में जोर-आजमाइश की है.

अभी तक के चुनाव परिणाम और रुझानों को देखें तो गोवा और पंजाब में आप का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है. जहां पंजाब की 117 सीटों पर आप केवल 24 सीटों पर ही आगे चल रही है, कांग्रेस इससे तीन गुना से ज्यादा 73 सीटें लेकर बहुमत से सरकार बनाती नजर आ रही है.

शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन को पंजाब में केवल 17 सीटों पर ही जीत की संभावना नजर आ रही है, तो अन्य दो सीटों पर आगे जाते नजर आ रहे हैं.

भले ही आप ने पंजाब में अब तक शिरोमणि अकाली दल-भाजपा को पीछे कर नंबर दो पार्टी का स्थान हासिल कर लिया हो, लेकिन जिस हिसाब से आप मुखिया अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में रैलियां की, वहां के लोगों से संपर्क किया, अपने कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की और तकरीहन हर इलाके में प्रचार किया, उस हिसाब से पार्टी को अपेक्षित नतीजे नहीं मिल सके.

पंजाब में आप को जीत की संभावना इसलिए भी नजर आ रही थी क्योंकि 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान केवल पंजाब से ही आप के चार सांसद जीते थे. लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजे आप के लिए झटका है. हालांकि यह बात भी गौर करने वाली है कि आप ने पहली बार पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ा है.

वहीं, गोवा की बात करें तो 40 सीटों में से अब तक 28 सीटों के ही रुझान-परिणाम सामने आए हैं. इनमें कांग्रेस और भाजपा 10-10 सीटों के साथ एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रही हैं. जबकि इसके बाद अन्य पार्टियां भी 8 सीटों के साथ दूसरे पायदान पर बनीं हुई हैं.

यहां सबसे ज्यादा चौंकाने वाली स्थिति आप के साथ है क्योंकि पार्टी अभी तक यहां पर खाता ही नहीं खोल सकी है. जबकि गोवा चुनाव को लेकर भी आप ने जमकर रैलियां और प्रचार किया था.

अब जिन दो राज्यों में आप ने अपनी विधानसभा में मौजूदगी दर्ज कराने का इस बार पासा फेंका, वो उल्टा पड़ता दिख रहा है. इससे पहले हरियाणा चुनाव में भी आप को हार का सामना करना पड़ा था और अब गोवा और पंजाब में भी पार्टी का प्रदर्शन आशानुरूप नजर नहीं आता.

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो आप के लिए यह वक्त आत्मचिंतन के साथ सभी के विचारों को सुनने का है. आने वाले वक्त में अगर पार्टी अन्य राज्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है तो उसे अपनी नीतियों, बेवजह के सोशल मीडिया अपडेेट्स और नकारात्मक प्रचार से बचना होगा और सकारात्मक राजनीतिक विचारधारा प्रदर्शित करने वाली पार्टी के रूप में पहचान बनानी होगी.

First published: 11 March 2017, 13:24 IST
 
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