Home » इंडिया » Good, bad and ugly: the National Family Health Survey 4 has it all
 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे: देश की महिलाएं हुईं सशक्त

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 8 March 2017, 11:02 IST

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-4-2015-16) काफी सकारात्मक परिणामों वाला कहा जा सकता है, खास तौर पर महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में. सामाजिक, आर्थिक सशक्तीकरण (आज महिलाओं के अपने बैंक अकाउंट और मोबाइल हैं) और मुख्य स्वास्थ्य सूचकांकों में महिलाएं काफी आगे हैं. बाल विवाह में बेहद कमी आई है लेकिन कन्या का जन्म अब भी अवांछनीय माना जाता है. एक दिलचस्प पहलू यह है कि अब ज्यादा से ज्यादा महिलाएं अपने खिलाफ होने वाली हिंसा के प्रति खुल कर बोल रही हैं. घरेलू हिंसा संबंधी रिपोर्टों की संख्या में वृद्धि हुई है.

सर्वे के मुताबिक पिछले साल 84 प्रतिशत विवाहित महिलाएं लिंग आधारित हिंसा की शिकार हुई हैं. यानी 2005-06 के मुकाबले इस संख्या में 76.5 फीसदी का इजाफा हुआ है.

अगली पीढ़ी

शिशु मृत्यु दर (प्रति 1000 पर एक बच्चे की मौत) में कमी आई है. 1992-93 में शिशु मृत्यु दर 79 के मुकाबले घट कर 41 रह गई. ग्रामीण इलाकों की बात की जाए तो 1992-93 में शिशु मृत्यु दर 86 थी जो 2015-16 में घट कर 46 रह गई.
5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी कमी आई है. ग्रामीण भारत में यह दर 119 से घट कर 56 रही जबकि शहरी इलाकों में यह 75 से घट कर 52 रह गई.

इसी प्रकार टीकाकरण के आंकड़े भी सकारात्मक हैं. शहरी भारत में 1से 2 वर्ष के बच्चों में सम्पूर्ण टीकाकरण के आंकड़ों में वृद्धि देखी गई. 2005-06 में टीकाकरण वाले बच्चों की संख्या 42 प्रतिशत ही थी जो 2015-16 में बढ़ कर 62 प्रतिशत हो गई.

स्वास्थ्य व मोटापा

15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों के बीच तम्बाकू व शराब के सेवन के मामले घटे हैं. 2005-06 में जहां तम्बाकू सेवन करने वालों की संख्या 10.8 प्रतिशत थी, वहीं 2015-16 में यह संख्या घट कर 6.8 प्रतिशत रह गई. सर्वे में पाया गया कि देश में ज्यादा वजन वाले आदमियों का अनुपात पिछले एक दशक में दोगुना हो गया है. साथ ही यह भी बताया गया कि प्रति पांच में से एक महिला का वजन सामान्य से अधिक है.

सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग के सामान्य से अधिक वजन वाले पुरूषों की संख्या 18.6 प्रतिशत पाई गई जबकि एनएफएचएस-3 के आंकड़ों के अनुसार, 9.3 प्रतिशत आदमी मोटे पाए गए. इसी प्रकार, एनएफएचएस-4 में देश की 20.7 फीसदी महिलाएं सामान्य से अधिक वजन की पाई गई जबकि एनएफएचएस-3 में यह संख्या 12.6 प्रतिशत थी.

एक अन्य दिलचस्प पहलू यह पाया गया कि एचआईवी एड्स की जानकारी रखने वाले पुरूष व महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की केवल 20.9 प्रतिशत महिलाओं व 32.3 प्रतिशत पुरूषों को इस बीमारी के बारे में जानकारी थी जबकि यह आंकड़ा 2005-06 में क्रमशः 17.3 प्रतिशत और 33 प्रतिशत था.  

55 प्रतिशत महिलाएं व 77 प्रतिशत पुरूष यह जानते हैं कि इस बीमारी से बचने के लिए कंडोम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इससे पता चलता है अभी इस बीमारी के बारे में जागरुकता बढ़ाने की जरूरत है.

First published: 8 March 2017, 8:09 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

पिछली कहानी
अगली कहानी