Home » इंडिया » Google made Doodle on anandi bai joshi first female physician of India
 

9 साल की उम्र में शादी के बावजूद आंनदी बाई बनीं देश की पहली महिला डॉक्टर

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 March 2018, 9:59 IST

आनंदी गोपाल जोशी, जब भारत में औरतें बिना इलाज के मर जाती थीं, उस दौर में आनंदी भारत की पहली महिला डॉक्टर बनीं. 9 साल की उम्र में उनकी शादी हो गयी थी. आनंदी गोपाल जोशी की 153वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद किया है. आनंदी बाई मेडिकल क्षेत्र में शिक्षा पाने के लिए अमेरिका गईं और साल 1886 में (19 साल की उम्र में) उन्होंने MD की डिग्री हासिल कर ली.

उनका नाम आनंदी बाई जोशी था, ब्याह के बाद उनका नाम आनंदी गोपाल जोशी पड़ा. डॉक्‍टरी की डिग्री लेने वालीं पहली भारतीय महिला आनंदीबाई जोशी थीं. पुणे में जन्‍मी आनंदीबाई जोशी की शादी नौ साल की उम्र में करीब 25 साल के गोपालराव जोशी से हुई थी.

ये भी पढ़ें- 87 साल बाद पाकिस्तान ने सार्वजनिक किए भगत सिंह के दस्तावेज, सामने आईं अनोखी बातें

उनकी कहानी इस तरह दिलचस्प थी कि मराठी में एक उपन्यास भी लिखा गया है. मराठी उपन्यासकार श्री. ज. जोशी उपन्यास ‘आनंदी गोपाल’ लिखा, जिसमे उनकी जिंदगी के कई पहलुओं पर लिखा गया है. उन्होंने उपन्यास में लिखा था-

''गोपाल को ज़िद थी कि अपनी पत्नी को ज़्यादा-से-ज़्यादा पढ़ाऊं. उन्होंने पुरातनपंथी ब्राह्मण-समाज का तिरस्कार झेला, पुरुषों के लिए भी निषिद्ध, सात समंदर पार अपनी पत्नी को अमेरिका भेजकर उसे पहली भारतीय महिला डॉक्टर बनाने का इतिहास रचा.''

ज. जोशी उपन्यास में लिखते हैं, गोपालराव की आनंदी से शादी की शर्त ही यही थी कि वे पढ़ाई करेंगी. आनंदी के मायके वाले भी उनकी पढ़ाई के ख़िलाफ थे. ब्याह के वक्त आनंदी को अक्षर ज्ञान भी नहीं था. गोपाल ने उन्हें क,ख,ग से पढ़ाया. नन्ही सी आनंदी को पढ़ाई से खास लगाव नहीं था. मिथक थे कि जो औरत पढ़ती है उसका पति मर जाता है. आनंदी को गोपाल डांट-डपट कर पढ़ाते. एक दफा उन्होंने आनंदी को डांटते हुए कहा, तुम नहीं पढ़ोगी तो मैं अपना मज़हब बदलकर क्रिस्तानी बन जाऊंगा.

ये भी पढ़ें- गुजरात: 21 साल के दलित को मिली घोड़ी पर सवारी करने की सजा, उच्च जाति के दबंगों ने मार डाला

 

अक्षर ज्ञान के बाद गोपाल, आनंदी के लिए अगली कक्षा की किताबें लाए. फिर वे कुछ दिन के लिए शहर से बाहर चले गए. जब वापस लौटे तो देखा कि आनंदी घर में खेल रही थी. वे गुस्से से बोले कि तुम पढ़ नहीं रही हो. आनंदी ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, जितनी किताबें थी सब पढ़ चुकी.

उपन्यास ‘आनंदी गोपाल’ मराठी साहित्य में ‘क्लासिक’ माना जाता है और इसका अनुवाद कई भाषाओं में हो चुका है. आनंदीबाई के जीवन पर कैरोलिन वेलस ने भी 1888 में बायोग्राफी लिखी. जिसपर 'आनंदी गोपाल' नाम से सीरियल बना और उसका प्रसारण दूरदर्शन पर किया गया. आनंदी पहली महिला डॉक्टर तो बनीं लेकिन खुद टीबी की शिकार हो गईं. दिन पर दिन सेहत में गिरावट के चलते 26 फरवरी 1887 को 22 वर्ष की आयु में आनंदी का निधन हो गया.

First published: 31 March 2018, 9:59 IST
 
अगली कहानी