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एक और पार्टी ने छोड़ा NDA का साथ, BJP पर लगाया धोखा देने का आरोप

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 March 2018, 8:52 IST

लोकसभा चुनाव आते-आते नेशनल जनतांत्रिक गठबंधन यानि एनडीए में फूट बढ़ती जा रही है. चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी के बाद अब एक और पार्टी ने एनडीए का दामन छोड़ने का फैसला किया है. एनडीए से गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) अब अलग हो गई है. इस महीने एनडीए छोड़ने वाली यह दूसरी पार्टी है.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता एल एम लामा ने शनिवार को एनडीए छोड़ने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अब उनकी पार्टी का बीजेपी और एनडीए से कोई नाता नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि बीजेपी गोरखा लोगों को धोखा दे रही है.

 

लामा ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कहा करते थे कि गोरखा लोगों का जो सपना है वो हमारा सपना है. लेकिन दिलीप घोष के बयान ने पीएम के इस बयान और बीजेपी की नीयत पर से पर्दा उठा दिया है. बता दें कि दिलीप घोष पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रमुख हैं.

दरअसल, दिलीप घोष ने हाल ही में कहा था कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा से बीजेपी का सिर्फ चुनावी गठबंधन है. उन्होंने कहा था कि चुनावी गठबंधन के अलावा बीजेपी का इस पाटी से किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हुआ है.

माना जा रहा है कि इसी से नाराज होकर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के चीफ लामा ने एनडीए छोड़ दिया. लामा ने कहा कि दिलीप घोष के इस बयान से गोरखा समुदाय अपने को ठगा महसूस कर रहा है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग ना तो गोरखा की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हैं और ना ही सजग.

 

लामा ने दु:ख प्रकट करते हुए कहा कि हमने गठबंधन धर्म निभाते हुए पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग संसदीय सीट दो बार बीजेपी को उपहार में दी. साल 2009 में यहां से बीजेपी के जसवंत सिंह और साल 2014 में एस एस अहलूवालिया को जीत दिलाई.

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उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को जिताने से हमें उम्मीद थी कि गोरखा लोगों की समस्याएं सुलझाने में बीजेपी मदद करेगी लेकिन बीजेपी ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हमें बार-बार धोखा दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की वजह से ही दार्जिलिंग और पहाड़ी इलाकों में अविश्वास का माहौल और उथल-पुथल है.

गौरतलब है कि गोरखा समुदाय लंबे समय से दार्जिलिंग समेत पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित पहाड़ी इलाके को अलग गोरखालैंड राज्य बनाने की मांग कर रहा है. पिछले साल इसी मांग को लेकर जीएएम ने लंबे समय तक आंदोलन किया था.

First published: 25 March 2018, 8:52 IST
 
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