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पासपोर्ट बनवाना हुआ आसान, जन्म प्रमाणपत्र की अनिवार्यता ख़त्म

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:45 IST
(पत्रिका)

केंद्र सरकार ने पासपोर्ट नियमों में बड़ी ढील दी है. सरकार ने पासपोर्ट के लिए जन्म प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. साथ ही नए नियमों में सिंगल मदर, साधु-सतों, अनाथ और गोद लिए बच्चों के लिए पासपोर्ट नियमों में कई बदलाव किए हैं.

साधु-संत अब पासपोर्ट पर अपने जैविक माता-पिता की जगह गुरुओं का नाम लिख सकते हैं. वहीं सिंगल मदर के मामले में पिता के नाम लिखने की अनिवार्यता को भी खत्म कर दिया गया है.

सरकार ने पासपोर्ट के आवेदन के लिए जन्म प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. अब आवेदन पासपोर्ट के आवेदन के लिए स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र, 10वीं का सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ई-आधार कार्ड, सर्विस रिकॉर्ड से जुड़े कागजात, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, एलआईसी पॉलिसी बांड के दस्तावेत भी संलग्न किये जा सकते हैं.

गौरतलब है कि पासपोर्ट नियम-1980 के मौजूदा विधायी प्रावधानों के अनुसार 26 जनवरी, 1989 को या फिर इसके बाद पैदा हुए आवेदनकर्ताओं को जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर जन्म प्रमाण पत्र सौंपना अनिवार्य होता था. लेकिन अब यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है.

सरकार ने साधु-संतों को पार्सपोर्ट में माता-पिता की जगह गुरुओं के नाम लिखने की अनुमति दे दी है. बता दें कि साधु-संत काफी लंबे वक्त से जैविक माता-पिता की जगह पासपोर्ट में गुरुओं के नाम लिखने की मांग कर रहे थे. विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह का कहना है कि साधु-संतों को इस छूट के बाद भी कम से कम एक सरकारी कागजात तो सौंपना अनिवार्य होगा. उन्होंने कहा, पासपोर्ट के मामले में प्रक्रिया को तेज करने, उदार बनाने और सरल बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.

नए पासपोर्ट नॉर्म्स में सिंगल मदर के मामले में पिता के नाम के उल्लेख की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है. इसके अलावा पासपोर्ट में गोद लिए बच्चे को भी स्वीकार्यता दी जाएगी.

First published: 24 December 2016, 4:08 IST
 
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