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दिल्ली की हवा में घुला जहर मिटाने के लिए सरकार इसी हफ्ते उठा सकती है ये जरुरी कदम

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 November 2018, 14:50 IST

दिल्ली की हवा में फैलते जा रहे प्रदुषण के स्तर को कम करने के लिए इसी हफ्ते सरकार ने कुछ ठोस कदम उठाने का विचार किया है. गौरतलब है कि बीते कई हफ़्तों से दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण के चलते दिल्ली एनसीआर में सांस लेना भी दूभर हो गया है. इसी के चलते अब सरकार दिल्ली में आर्टीफीशियल बारिश कराने पर विचार कर रही है. जिससे कि हवा में फैले जहरीले प्रदूषकों से निजात पाई जा सके. गौरतलब है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स में दिल्ली की हवा पिछले तीन हफ़्तों में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है.

इस मामले में पर्यावरण मंत्री ने कहा, ''मौसम की दशा स्थिर होने पर कृत्रिम वर्षा कराने के लिए ‘मेघ बीजन’ (क्लाउड सीडिंग) किया जाएगा. इसी सप्ताह वर्षा कराने की योजना है. अगर मौसमी दशा उपयुक्त नहीं हुई तो इसे अगले सप्ताह किया जाएगा.'' क्लाउड सीडिंग सिल्वर आयोडाइड, ड्राई आइस और नमक समेत विभिन्न तरह के रासायनिक एजेंटों को मौजूद बादलों के साथ जोड़ने की एक क्रिया है ताकि उन्हें घना किया जा सके. इससे बारिश की संभावना बढ़ जाती है.

बता दें इससे पहले भी साल 2016 में सरकार ने आर्टिफिशल बारिश के लिए क्लाउड सीडिंग यानी मेघ बीजन कराने का प्रयास किया था, लेकिन योजना को लागू नहीं किया जा सका. इस बार केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्द्धन को हेलिकॉप्टर से दिल्ली में पानी का छिड़काव करके धूल कम करने के लिए भी एक प्रस्ताव दिया था.

क्या है क्लाउड सीडिंग

क्लाउड सीडिंग को कृतिम रूप से बारिश कराने के लिए उपयोग किया जाता है. इसके लिए सिल्वर आयोडाइड को प्लेन या रॉकेट के जरिए बादलों में मिला दिया जाता है. सिल्वर आयोडाइड क्रिस्टल प्राकृतिक बर्फ की तरह होती है, जिसे बादल में मिलाने से बादलों का पानी भारी होकर जमीन पर बरस जाता है. इस पूरी क्रिया को ही क्लाउड-सीडिंग कहते हैं. कृतिम बारिश कराने का ये तरीका पिछले 50 सालों से इस्तेमाल में है.

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क्लाउड सीडिंग को लेकर अमेरीकी कंपनी, वेदर मॉडिफिकेशन इनकॉर्पोरेशन (डब्ल्यूएमआई) अफ्रीका, लैटिन अमरीका और एशिया के कई देशों में 'क्लाउड सीडिंग' के प्रॉजेक्ट चला रही है.

First published: 20 November 2018, 14:50 IST
 
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