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पनामा लीक पर सरकार सख्त, जांच के लिए बनेगी मल्टी एजेंसी ग्रुप

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 April 2016, 18:46 IST
QUICK PILL
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पनामा पेपर्स लीक मामले की जांच के लिए मल्टी एजेंसी ग्रुप बनाने का आदेश दिया है. इस ग्रुप में रिजर्व बैंक, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज और इकोनॉमिकल अफेंसेज विंग के अधिकारी शामिल होंगे.
  • दस्तावेजों के लीक होने के बाद पनामा सरकार ने जांच में सहयोग का भरोसा दिया है. सरकार ने बयान जारी कर कहा, पनामा सरकार कोई कानूनी कदम उठाए जाने की स्थिति में हर तरह से सहयोग करेगी.

पनामा लीक में डीएलएफ के संस्थापक केपी सिंह, बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन समेत करीब 500 भारतीयों के नाम का खुलासा होने के बाद सरकार हरकत में आ गई है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले की जांच के लिए मल्टी एजेंसी ग्रुप बनाने का आदेश दिया है. इस एजेंसी में रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज और वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली वित्तीय खुफिया ईकाई के अधिकारी शामिल होंगे.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सरकार विदेशी सरकारों समेत सभी स्रोतों से सूचना लेने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी ताकि जांच में मदद मिल सके.

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जेटली ने इस खुलासे का स्वागत करते हुए कहा, ''मैं ऐसी पड़ताल और खुलासे का स्वागत करता हूं. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक और अधिक जानकारियां सामने आनी हैं. जिनका भी खाता अवैध पाया जाएगा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.''

दस्तावेजों के लीक होने के बाद पनामा सरकार ने जांच में सहयोग का भरोसा दिया है. सरकार ने बयान जारी कर कहा, पनामा सरकार कोई कानूनी कदम उठाए जाने की स्थिति में हर तरह से सहयोग करेगी.

सबसे बड़ा खुलासा

पनामा लीक इतिहास की शायद सबसे बड़ी लीक है. जिस कंपनी के दस्तावेज लीक होने के बाद हंगामा मचा है वह दुनिया की चौथी बड़ी लॉ फर्म है. कंपनी पनामा में काम करती है और वह 300,000 से अधिक कंपनियों को अपनी सेवा देती है. ब्रिटेन से इसका गहरा संबंध है. 

ब्रिटिश प्रशासन के क्षेत्राधिकार में करीब आधे से अधिक वैसी कंपनियां रजिस्टर्ड हैं जहां पूंजीपतियों को धन रखने के एवज में टैक्स का भुगतान नहीं करना पड़ता है. इसमें से कई कंपनियां ब्रिटेन में भी पंजीकृत है.

42 देशों में काम करती है मोजेक फोंसेका

पनामा की यह कंपनी पूरी दुनिया में अपनी सेवाएं देती है. कंपनी के 600 कर्मचारी 42 देशों में काम करते हैं. कंपनी स्विट्जरलैंड, साइप्रस और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड जैसे कर छूट वाले देशों में काम करती है. 

मोजेक फोंसेका करीब तीन लाख कंपनियों के रजिस्टर्ड एजेंट के तौर पर काम करती है. केवल ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में ही इस तरह की करीब 100,000 से अधिक कंपनियां रजिस्टर्ड हैं.

इसके अलावा बहामा, पनामा, सेसेल्स (अफ्रीका), नियू और समोआ (ओसेनिया) भी टैक्स बचाने के लिए दुनिया के सुरक्षित ठिकानों में गिने जाते हैं.

बिचौलियों की मदद से होता है काम

मोजेक फोंसेका सीधे कंपनी मालिकों से बात करने की बजाए उनके अकाउंटेंट्स, वकील, बैंक या फिर ट्रस्ट कंपनियों से बात करती हैं. यही वजह है कि वास्तविक खातेदारों के बारे में पता करना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि पैसा जमा करने वाला व्यक्ति अधिकांश समय अपने नॉमिनी की आड़ में छुपा होता है. 

इसका अंदाजा हालिया खुलासे को देखकर लगाया जा सकता है जिसमें अधिकांश राष्ट्राध्यक्षों का सीधे कोई खाता तो नहीं है लेकिन वह अपने नॉमिनी की मदद से टैक्स बचाने में सफल रहे.

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First published: 4 April 2016, 18:46 IST
 
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