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देश के 70 फीसदी एटीएम मशीनें सुरक्षित नहीं

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 5:42 IST
(एएफ़पी)

सरकार ने लोकसभा में स्वीकार किया है कि देश के 70 फीसदी एटीएम सुरक्षित नहीं हैं और आसानी से साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं. लोकसभा में 3 फरवरी को पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया देश में चल रहे सारे एटीएम विन्डोज एक्सपी ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल रह हैं जो कि अब माइक्रोसॉफ्ट से संचालित नहीं है. 2014 में ही माइक्रोसॉफ्ट ने विन्डोज एक्सपी का साथ छोड़ दिया था. उसके बाद से इस ऑपरेटिंग सिस्टम में कोई सुधार या बदलाव नहीं हुआ है.

बिना टेक सपोर्ट वाले आपॅरेटिंग सिस्टम पर चल रहे एटीएम मशीनों की सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है लेकिन ऐसा शायद पहली बार हो रहा है कि सरकार ने इस खतरे को स्वीकार किया है. खैर, सरकार की यह स्वीकरोक्ति ‘आम आदमी की चिंता कम करने’ का प्रयास भर है.

जेटली ने लोकसभा को बताय, 'आरबीआई के अनुसार बैंक अपने साझेदारों के साथ हुए समझौतों के तहत एटीएम मशीनों के सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने के उपाय कर रहे हैं. एटीएम सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाने वाले थर्ड पार्टी वेंडर ‘एटीएम मशीनों की सुरक्षा संबंधी चिंताओ’ का समाधान उपलब्ध करवा रहे हैं.'

लापरवाह भारतीय बैंक

उन्होंने कहा, 'चूंकि एटीएम एक संबंधित यूजर नेटवर्क पर चल रहे हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा को लेकर इतनी चिंता की जरूरत नहीं है. हालांकि पिछले साल 32 लाख डेबिट कार्डों के आंकड़ों की सुरक्षा में हुई चूक पर साइबर सुरक्षा फर्म कैसपर्सकी ने कहा था कि भारतीय बैंक साइबर सुरक्षा को लेकर काफी लापरवाही बरतते हैं. सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने में हो रही देरी भी इसी का प्रमाण है.'

कैसपर्सकी लैब के एक शोध के अनुसार जिन एटीएम मशीनों का सॉफ्टवेयर पुराना हो गया है, उन्हें आसानी से हैक किया जा सकता है, उनके साथ छेड़छाड़ की जा सकती है और पैसा चुराया जा सकता है. 

हालांकि आरबीआई देश की बैंकिंग प्रणाली के प्रति जवाबदेह है, लेकिन इस मामले में वह चुप्पी साधे हुए है. अब तक आरबीआई ने इस दिशा में बस इतना ही किया है कि उसने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे सही बैंकिंग प्रणाली लागू करते हुए एटीएम मशीनों के ऑपरेटिंग सिस्टम की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे. आरबीआई ने जून 2016 में साइबर सुरक्षा प्रारूप जारी किया था. इसमें खास तौर पर बैंकों से कहा गया कि वह एटीएम मशीनों के ऑपरेटिंग सिस्टम पर निगरानी रखें. हालांकि बैंकों ने अभी तक इसकी पालना नहीं की है. 

दो लाख से ज़्यादा मशीनें

भारत में करीब दो लाख से ज्यादा एटीएम मशीनें हैं और उनके इंस्टालेशन और रखरखाव के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है. ग्राहक तो एक ओर यह मान कर चलते हैं कि अमुक एटीएम फलां बैंक का है जबकि भुगतान तकनीक से जुड़ी कम्पनियां जैसे फाइनेंशियल सॉफ्वेयर एंड सिस्टम्स उन्हें बैंकों के लिए लगाते हैं और उनका रखरखाव करते हैं. इसके बदले में वे अंतर्राष्ट्रीय फर्मों जैसे एनसीआर व डीबोल्ड से एटीएम मशीनें खरीदते हैं. एनसीआर के मुताबिक विन्डोज एक्सपी को विन्डोज 7 में उन्नत करने की जिम्मेदारी बैंकों की है. 

सॉफ्टवेयर उन्नत करने की प्रक्रिया काफी जटिल और खर्चीली है. पता नहीं बैंक और एटीएम ऑपरेटर कब तक इस निवेश के लिए तैयारी हो पाएंगे. नोटबंदी के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए एटीएम कम्पनियों ने आरबीआई से अपील कर बैंकों को मुआवजा दिलवाने की मांग की है. एटीएम से लेन-देन में कमी आने पर होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई के लिए भी इन कम्पनियों ने बैंकों से मुआवजा मांगा है.

First published: 5 February 2017, 7:48 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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