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सरकार ने 343 असुरक्षित दवाओं पर लगाया प्रतिबंध

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 17 March 2016, 22:03 IST
QUICK PILL
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर ऐसी 344 दवाओं की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है जिन्हें फिक्स्ड ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) के नाम से जाना जाता है.
  • मंत्रालय की नजर इस तरह की करीब 1,000 से अधिक दवाओं पर हैं. अटकलें है कि इनमें से करीब 500 दवाओं को प्रतिबंधित किया जा सकता है. इसमें इस्तेमाल की जाने वाली लोकप्रिय एंटीबायोटिक्स और एंटी डायबिटिक दवाएं भी शामिल हैं.
  • कॉम्बिनेशन वाली दवाओं का एक और घाटा भी है कि इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस में बढ़ोतरी होती है. यह चिंता पूरी दुनिया में दवाओं के सेवन को लेकर बढ़ रही है. कुछ लोग इसे एंटीबॉयोटिक एपोकैलिप्स भी कहते हैं.

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सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर 344 दवाओं की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है जिन्हें फिक्स्ड ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) के नाम से जाना जाता है. 

मंत्रालय का कहना है कि करीब 1,000 से अधिक दवाओं पर उसकी नजर हैं और करीब 500 या उससे अधिक दवाओं को प्रतिबंधित किया जा सकता है. इसमें इस्तेमाल की जाने वाली लोकप्रिय एंटीबायोटिक्स और एंटी डायबिटिक दवाएं शामिल हैं.

इन दवाओं के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है और सरकार के मुताबिक इन्हें प्रतिबंध किए जाने की वजह इसका स्वास्थ्य पर पड़ने वाला बुरा प्रभाव है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक उन्हें लंबे समय से इसका इंतजार था क्योंकि बाजार में ऐसी कई एफसीडी बिक रही हैं जिन्हें प्रतिबंधित किए जाने की जरूरत है. उद्योग जगत के मुताबिक सरकार के इस फैसले से बिक्री पर करीब 1,500 करोड़ रुपये का असर पड़ने की संभावना है.

क्या हैं एफडीसी?

एफडीसी में एक दवा के भीतर एक से अधिक दवाओं को मिलाया जाता रहा है. मसलन किसी दवा में पेन किलर के साथ एंटीबॉयोटिक भी हो सकता है. कुछ ममलों में इन दवाओं की मदद से घातक वायरस से निपटने में मदद मिलती है. लेकिन दूसरे मामले में यह हानिकारक हो सकता है या फिर इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.

क्यों लगा प्रतिबंध?

सरकार की तरफ से इन दवाओं पर प्रतिबंध लगाया जाना अचानक नहीं है. पिछले एक साल से 6,200 से अधिक दवाओं की क्षमता को लेकर शोध किया जा रहा था. इसमें 344 को प्रतिबंधित किए जाने का फैसला किया गया क्योंकि इससे इंसानों को खतरा था और बाजार में इसके अन्य बेहतर विकल्प मौजूद हैं.

कैसे अलग है प्रतिबंध?

भारत पिछले एक दशक से इन दवाओं की बिक्री के इस्तेमाल पर रोक लगाने के बारे में सोच रहा था. लेकिन इस दिशा में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल पाई. 

2007 में सरकार ने राज्यों को 300 ऐसे कॉम्बिनेशन पर रोक लगाने को कहा जिन्हें केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना बेचा जा रहा था. हालांकि सरकार के इस फैसले के खिलाफ दवा कंपनियां कोर्ट चली गईं और उन्हें वहां स्टे मिल गया.

पूरा मामला हमेशा से ही मंजूरियों का रहा है. किसी भी दवा को बाजार में उतरने से पहले राज्य और केंद्र सरकार के मंजूरी की जरूरत होती है. लेकिन कुछ मामलों में दवा विक्रेता कंपनियों को राज्यों से ही मंजूरी मिलती है. इसके बाद इन दवाओं को बाजार में बेचने की मंजूरी तो मिल जाती है लेकिन उन्हें असुरक्षित दवा कहा जाता है.

मसलन एबॉट जिमिक एजेड को राज्यों में मंजूरी मिली लेकिन केंद्र की मंजूरी के बिना उसे पूरे देश में बेचा जा रहा था. 

मेडिकल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सेफिक्जिम और एजिथ्रोमाइसिन से बना जिमिक एजेड सेवन के लिहाज से खतरनाक है और इस दवा को सर्दी में खाए जाने का कोई मतलब नहीं है.

रिपोर्ट्स बताती है कि प्रतिबंध के बावजूद भी एबॉट की कफ सीरप फेंसाडिल को तेलंगाना में बेचा जा रहा है.

कॉम्बिनेशन वाली दवाओं का एक और घाटा भी है कि इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस में बढ़ोतरी होती है. यह चिंता पूरी दुनिया में दवाओं के सेवन को लेकर बढ़ रही है. इसे ऐसे समझा जा सकता है कि ईकोलाई जैसी बीमारी की दवा अब मरीजों पर असर नहीं कर रही है. कुछ लोग इसे एंटीबॉयोटिक एपोकैलिप्से भी कहते हैं.

हालांकि एफडीसी का इस्तेमाल एचआईवी, मलेरिया और टीबी के इलाज में प्रभावी रहा है क्योंकि कई कॉम्बिनेशंस की मदद से वायरस को प्रभावी तरीके से निपटने में मदद मिलती है.

अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स आईएमएस हेल्थ के मुताबिक भारत में बेची जाने वाली आधी से अधिक दवा एफडीसी होती हैं. भारत एफडीसी दवाओं की बिक्री के मामले में दुनिया में सबसे ऊपर है.

क्या यह फैसला उचित है?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स भी ऐसा ही सोचते हैं. अमेरिकी कंपनी फाइजर, एबॉट और प्रॉक्टर एंड गैंबल ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

सोमवार को हाई कोर्ट ने खुद ही इस मामले में फाइजर के कॉरेक्स पर अंतरिम स्थगन दे दिया. फाइजर की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया, 'सरकार ने बिनाी किसी जांच या कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अधिसूचना जारी कर दी जबकि पिछले 25 सालों से इन दवाओं की बिक्री की जा रही है.'

कोर्ट ने भी सरकार के फैसले को हड़बड़ी में लिया गया फैसला माना. मंगलवार को एबॉट और मैकलियॉड्स फार्मा को भी स्टे मिल गया. मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने प्रतिबंध की घोषणा किए जाने से पहले कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

मंत्रालय ने बताया कि कंपनियों को कहा गया है कि वह इन दवाओं की क्षमता और उसके असर को लेकर रिपोर्ट सौंपे. उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का हालांकि कहना है कि उसने कंपनियों से राय नहीं मांगी.

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से  सरकार का यह फैसला सकारात्मक फैसला है.

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First published: 17 March 2016, 22:03 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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