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बोफोर्स के बाद सरकार ने दी सबसे बड़े तोप सौदे को हरी झंडी

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 June 2016, 13:42 IST
(कैच न्यूज)

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को हॉवित्जर तोपों के सबसे बड़े सौदे का रास्ता साफ कर दिया है. 80 के दशक में हुए बोफोर्स घोटाले के बाद इस क्षेत्र में यह सबसे बड़ी हथियार खरीद होगी. मंत्रालय ने 145 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों की खरीद को मंजूरी दे दी है. इसकी कीमत 5,040 करोड़ रुपए से अधिक है.

शनिवार, 25 जून को यह निर्णय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने डीएसी की बैठक के दौरान लिया. भारतीय सशस्त्र बलों के लिए बड़े सौदों को मंजूरी देने का अधिकार पर्रिकर को ही है.

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डीएसी की महीने में एक बार बैठक होना तय है, लेकिन गत दो माह से इसकी बैठक नहीं हुई थी. परन्तु इस शनिवार हुई बैठक में 28,000 करोड़ के प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया.

जल्द आ जाएंगी तोपें

एम 777 के नाम से भी जानी जाने वाली हॉवित्जर तोपें अब अमरीका से विदेशी सैन्य बिक्री के जरिए खरीदी जाएंगी. अमरीका में ये तोपें विश्व लड़ाकू तंत्र विभाग की बीएई प्रणाली से बनाई जाती हैं. कथित तौर पर डीएसी ने इन तोपों की आपूर्ति की अवधि कम कर दी है. ये तोपें 2005 में सबसे पहले अफगानिस्तान में इस्तेमाल की गईं थीं. माना जाता है कि इनकी रेंज 25 किलोमीटर तक है.

मंत्रालय ने 145 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों की खरीद को मंजूरी दे दी है. इसकी कीमत 5,040 करोड़ रुपए से अधिक है.

रक्षा विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक भारत ने ये तोपें खरीदने के लिए कुछ माह पूर्व अमरीका को पत्र लिख कर आधिकारिक स्तर पर आग्रह किया था. भारत अब इन तोपों की पहली खेप के भुगतान के लिए अमरीका से बात करेगा.

दोनो पक्षों के बीच इस बात पर आपसी सहमति हुई है कि इस सौदे की 25 तोपें भारत में इस्तेमाल के लिए तैयार हालत में भेजी जाएंगी. शेष को महिन्द्रा कंपनी की साझेदारी में प्रस्तावित हथियार संघटन और परीक्षण केंद्र में तैयार किया जाएगा.

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भारतीय सेना कथित तौर पर इन तोपों का इस्तेमाल चीन की सीमा से लगे उंचाई वाले दुर्गम सीमाई क्षेत्रों जैसे अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में करेगी. रक्षा मंत्रालय की ऑफ सैट नीति के अनुसार, बीएई प्रणाली के जरिए देश में दो अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा. इस माह के अंत तक तीन एम 777 तोपें भारत पहुंच जाएंगी. सितम्बर माह के अंत तक तीन और तोपें भारत आ जाएंगी.

देसी बोफोर्स

डीएसी कमेटी ने देसी बोफोर्स कही जाने वाली स्वदेश निर्मित 18 धनुष सशस्त्र तोपों के निर्माण की भी मंजूरी दे दी है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय सेना के लिए इन तोपों का निर्माण किया है. डीएसी ने धनुष तोपों की निर्माण प्रक्रिया को संतोषजनक बताया है. अमरीका के साथ किया गया हॉवित्जर तोपों का सौदा स्थानीय रक्षा बाजार के लिए झटका साबित हो सकता है.

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धनुष तोपों की मारक क्षमता 38 किलोमीटर है. इनका निर्माण आयुध कारखाना मंडल, कोलकाता ने किया है. इनके निर्माण में बोफोर्स तोप में इस्तेमाल की गई तकनीक का प्रयोग किया गया है. यह तकनीक बोफोर्स सौदे के लिए किए गए समझाौते के तहत भारत स्थानांतरित की गई थी.

नौ सेना के लिए भी

डीएसी ने भारतीय नौसेना को भी एक तोहफा दिया है. कमेटी ने नौसेना की जरूरतों को समझते हुए उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. इससे अब नौसेना अपनी जरूरत के मुताबिक खरीद के लिए टेंडर जारी कर सकेगी. साथ ही नौसेना अब इस्तेमाल के लिए तैयार श्रेणी के तहत अगली पीढ़ी के छह मिसाइल पोत भी खरीदेगी, जिनकी अनुमानित लागत 13,600 करोड़ है.

First published: 27 June 2016, 13:42 IST
 
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