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आखिर क्यों कम्युनिटी रेडियो पर सरकार की नजर टेढ़ी हो रही है?

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 13 November 2015, 13:35 IST
QUICK PILL
  • एनसीआर\r\nके करीब 30 कम्युनिटी\r\nरेडियो स्टेशनों पर प्रधानमंत्री\r\nनरेंद्र मोदी के मासिक कार्यक्रम\r\n\"मन\r\nकी बात\" का\r\nप्रसारण नहीं करने और सरकार\r\nविरोधी सामग्री चलाने का आरोप\r\nहै.
  • मामला\r\nअंतर मंत्रालयी समिति के सामने\r\nभेजा जा चुका है.\r\nसरकार\r\nजल्द ही प्रोग्राम कोड उल्लंघन\r\nका मामला बनाते हुए इन कम्युनिटी\r\nरेडियो स्टेशनों का लाइसेंस रद्द कर\r\nसकती है.

अंदेशा जताया जा रहा है कि देश में कम्युनिटी रेडियो के बुरे दिन आ सकते हैं. अंग्रेजी समाचार वेबसाइट द टेलीग्राफ में छपी खबर के मुताबिक ऐसे तमाम सामुदायिक रेडियो का लाइसेंस रद्द हो सकता है जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक कार्यक्रम "मन की बात" का प्रसारण नहीं किया था. इतना ही नहीं इनमें से कई रेडियो स्टेशनों पर सरकार विरोधी सामग्री चलाने का आरोप भी है.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों की माने तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के करीब 30 कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों में से अधिकांश को "आपत्तिजनक" सामग्री का प्रसारण करते हुए पाया गया है

मंत्रालय के प्रसारण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक स्थानीय समुदायों को जोड़ने वाले कम्युनिटी रेडियो स्टेशन सरकार विरोधी राजनीतिक विचार, अश्लील संगीत और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. इतना ही नहीं, कई बार जानकारी दिए जाने के बावजूद भी कई स्टेशनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम का प्रसारण नहीं किया.

मंत्रालय में निदेशक स्तर के अधिकारी की माने तो सामुदायिक रेडियो स्टेशनों द्वारा आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण के मसले को अंतर मत्रालयी समिति के पास विचार के लिए भेजा गया है. समिति जल्द ही इस पर निर्णय लेगी.

सामुदायिक रेडियो स्टेशन अपने कटेंट का निर्धारण एक निश्चित दायरे के भीतर ही कर सकते हैं. विषयवार इसकी सीमा तय होती है. इन्हें समाचार प्रसारित करने या राजनीति आधारित कार्यक्रम चलाने की अनुमति नहीं होती. समाचार सिर्फ ऑल इंडिया रेडियो ही प्रसारित कर सकती है.

लेकिन ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को सभी सामुदायिक रेडियो स्टेशनों और न्यूज चैनलों पर चलाने की सरकार की सलाह होती है. इस कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी सामान्यत: सामयिक सामाजिक मुद्दों या सरकारी योजनाओं की बात करते हैं. इसे सरकारी और प्रशासनिक कार्यक्रमों की श्रेणी में रखा गया है.

सूत्र बताते हैं संभवत: ऐसा पहली बार हो रहा है कि केंद्र सरकार ने सामुदायिक रेडियो केंद्रों को इस तरह की एडवायजरी (सलाह) भेजी हो.

सरकार के प्रवक्ता नहीं है कम्युनिटी रेडियो

ज्यादातर गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा संचालित कम्युनिटी रेडियो स्टेशन लो-पावर एफएम ट्रांसमीटर से चलते हैं. स्थानीय समुदायों के लिए विशेषरूप से चलने वाले इन स्टेशनों को संबंधित क्षेत्रों में 10-15 किलोमीटर के दायरे में सुना जा सकता है.

पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर एक कम्युनिटी रेडियो स्टेशन के मालिक ने कहा, "प्रधानमंत्री के के मन की बात, बेटी बचाओ और स्वच्छ भारत अभियान जैसी तमाम योजनाओं को प्रचारित करने के लिए मंत्रालय हमें बार-बार नोटिस भेजता है, लेकिन हम सरकार के प्रवक्ता नहीं है. इसलिए कई सारे रेडियो स्टेशन इसका प्रसारण नहीं करते."

कंटेंट तय करने की आजादी

रेडियो स्टेशनों के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक जब तक कार्यक्रम नीति का उल्लंघन नहीं होता है, स्टेशनों को अपनी कार्यक्रम सामग्री तय करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक रेडियो स्टेशन के संचालक ने कहा कि टॉक शोज (चर्चा) जैसे कार्यक्रमों में जिन लोगों को आमंत्रित किया जाता है, वे अपने विचारों और सोच के मुताबिक बोलते हैं. वो बताते हैं कि यदि कोई सरकार के समर्थन में बात नहीं करता, तो इसकी सजा हमें नहीं दी जा सकती. यही लोकतंत्र है. जिस तरह से हमें खुली धमकी दी जा रही है, वह बहुत चिंता का विषय है.

मंत्रालय ने छह माह पहले इन कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों को जांच के लिए अपने सभी कार्यक्रमों की सीडी उपलब्ध कराने के लिए कहा था

वैसे एक रेडियो स्टेशन को किसी खास शो को प्रसारित न करने या फिर सरकार के संबंध में गंभीर विचार रखने के लिए दंडित नहीं किया जा सकता. प्रोग्रामिंग कोड गाइडलाइंस में अस्पष्टता हेरफेर के लिए काफी गुंजाइश पैदा करती है.

मंत्रालय के एक अधिकारी बताते हैं कि अगर संस्थाएं खुद को दिए गए मैंडेट के भीतर काम नहीं करती हैं तो उनके लाइसेंस को रद्द किया जा सकता है. या फिर उनके ऊपर नियंत्रण करने के लिए कई और तरीके सरकार अख्तियार कर सकती है.

दुर्दशा के शिकार कम्युनिटी रेडियो

ब्रॉडकास्ट मीडिया के जानकारों की माने तो भारत के 185 कम्युनिटी स्टेशनों में से 20 स्टेशन खराब वित्तीय हालत के चलते बंद हो चुके हैं. जबकि कई ने अपने प्रसारण के संचालन समय को घटा दिया है.

बीते वर्ष के केंद्रीय बजट में कम्युनिटी रेडियो को नई खोज करने के लिए 100 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक एक रुपया भी जारी नहीं किया गया. 10 स्टेशनों को उपकरण खरीदने के लिए "चयनित" किया गया था. लेकिन वित्त मंत्रालय ने बाद में धनराशि देने से मना कर दिया.

दूसरी तरफ कई कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों को दी गई 10 साल की अनुमति इस वर्ष मार्च में समाप्त हो गई है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अभी उनके लाइसेंस को रिन्यु करने पर कोई निर्णय नहीं ले सका है.

मंत्रालय पर दो करोड़ रुपये का बकाया

कम्युनिटी रेडियो स्टेशन हर घंटे पांच मिनट का विज्ञापन चला सकते हैं. इसमें अधिकांश सरकारी विज्ञापन चार रुपये प्रति सेकेंड की दर से होते हैं. जिन्हें विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) ने तय किया है. लेकिन यह भुगतान भी बहुत अनियमित है.

एक आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक मंत्रालय के ऊपर देशभर के तमाम रेडियो स्टेशनों का करीब दो करोड़ रुपये बकाया है. पिछले कई महीनों से इसे जारी नहीं किया गया.

जाहिर है कि सामुदायिक रेडियो केंद्रों की स्थिति खराब है. सरकार इसकी बेहतरी की दिशा में कोई काम नहीं कर रही है. यह ऐसा क्षेत्र हैं जो जिंदा रहने के लिए कठिन संघर्ष कर रहा है.

इससे पहले, इस साल सरकार ने सभी रेडियो स्टेशनों को अपने पूरी सामग्री को हर माह मंत्रालय में भेजने के लिए कहा था. लेकिन सेक्टर और सिविल सोसायटी के पुरजोर विरोध के बाद इस आदेश को वापस ले लिया था.

First published: 13 November 2015, 13:35 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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