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अप्रैल-मार्च वित्त वर्ष को बदल सकती है मोदी सरकार : रिपोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 January 2019, 17:38 IST

बिजनेस न्यूज़ चैनल बीटीवीआई की एक रिपोर्ट की माने तो सरकार चालू अप्रैल-मार्च वित्त वर्ष को जनवरी-दिसंबर कर सकती है. इस बदलाव से सरकार को अपने बजट अनुमानों में मानसून के पूर्वानुमान को शामिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह वित्तीय वर्ष को दक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ संरेखित करेगा और इस प्रकार कृषि क्षेत्र को संसाधनों के बेहतर आवंटन में मदद करेगा.

भारत ब्रिटिश सरकार द्वारा 1867 से लागू किये अप्रैल-मार्च वित्तीय वर्ष का पालन कर रहा है. वित्तीय वर्ष को कैलेंडर वर्ष के साथ संरेखित करना और उस महीने के अंत से फरवरी के प्रारंभ तक केंद्रीय बजट की प्रस्तुति की तारीख में बदलाव करना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख कदम थे. पिछले दो वर्षों से बजट को नई तारीख 1 फरवरी को पेश किया गया है.

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार शंकर आचार्य की अध्यक्षता वाले उस पैनल को वित्तीय वर्ष बदलने के विचार के खिलाफ बताया गया है. जीएसटी के कार्यान्वयन और इसके कारण होने वाली गड़बड़ी ने भी सरकार को इस विचार को छोड़ने के लिए मजबूर किया होगा.

First published: 22 January 2019, 17:38 IST
 
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