Home » इंडिया » Govt to set up 10,000 new LPG dealerships. Noble agenda or poll gimmick?
 

भाजपा पर गैस सिलेंडर के बहाने चुनावी राजनीति करने का आरोप

चारू कार्तिकेय | Updated on: 18 January 2016, 20:53 IST
QUICK PILL
  • असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले एलपीजी डीलरशिप के आवंटन की घोषणा के फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
  • मोदी सरकार ने 2016 में 10,000 नए डीलरशिप के आवंटन की घोषणा की है. उत्तर प्रदेश में जहां सबसे अधिक 2,389 वितरक हैं जबकि वहां उपभोक्ताओं की संख्या करीब 2.1 करोड़ है. वहीं लगभग समान उपभोक्ता संख्या रखने वाले महाराष्ट्र में महज 1,549 वितरक हैं.

एनडीए सरकार की एक कोशिश विवादों के दायरे में आ गई है. सरकार पर इस योजना की आड़ में चुनावी लाभ उठाए जाने का आरोप लग रहा है.

एलपीजी नेटवर्क को तेजी से बढ़ाए जाने की योजना के तहत सरकार ने 2016 में 10,000 नए डीलर्स बनाने की घोषणा की है.

हालांकि इस घोषणा की राह में सबसे बड़ी अड़चन असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाला विधानसभा चुनाव है.

सरकार के इस फैसले को इन राज्यों में होने वाले चुनावों में लाभ उठाए जाने के मकसद के तौर पर की जाने वाली कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

मौजूदा स्थिति

फिलहाल देश भर में करीब 17,000 वितरक हैं जिनकी मदद से ओएमसी आम जनता को एलपीजी की आपूर्ति करती हैं. हाल ही में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सभी राज्य सरकारों और सांसदों को पत्र लिखकर नए डीलरशिप के लिए जगह का सुझाव देने की अपील की थी.

मौजूदा नीति के तहत एलपीजी रीफीलिंग के संभावित जगहों के आधार पर डीलरशिप तय की जाती है. इसके तहत संबंधित क्षेत्र की आबादी, जनसंख्या दर, आर्थिक समृद्धि और मौजूदा नजदीकी डीलर का ध्यान रखा जाता है.

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2015 तक देश भर में करीब 16,000 एलपीजी के डिस्ट्रीब्यूटर्स थे

मार्च 2015 के पेट्रोलियम मंत्रालय के डेटा के मुताबिक देश भर में कुल 16,000 डीलर्स हैं. राज्य आधारित डेटा में कई गड़बड़ियां हैं क्योंकि कई राज्यों में उपभोक्ताओं की संख्या और वितरकों की संख्या में आनुपातिक असंतुलन है.

उत्तर प्रदेश में जहां सबसे अधिक 2,389 वितरक हैं जबकि वहां उपभोक्ताओं की संख्या करीब 2.1 करोड़ है. वहीं लगभग समान उपभोक्ता संख्या रखने वाले महाराष्ट्र में महज 1,549 वितरक हैं.

जबकि मध्य प्रदेश में पश्चिम बंगाल और केरल के मुकाबले कम जनसंख्या होने के बावजूद ज्यादा वितरक हैं. केरल और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं.

वहीं तमिलनाडु उपभोक्ताओं की संख्या के लिहाज से तीसरे पायदान पर है और यहां वितरकों की संख्या भी अधिक है. पश्चिम बंगाल और केरल को अभी तक इस मामले में नुकसान उठाना पड़ा है.

पहले भी हुअा है विवाद

मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का मानना है कि वितरकों की संख्या में असंतुलन का मुख्य कारण डीलरशिप आवंटन में किया जाने वाला भेदभाव है.

यह भेदभाव पहले से तय दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर किया जाता रहा है. इसलिए जब सरकार ने चुनाव के पहले एलपीजी डीलरशिप के आवंटन की घोषणा की है तो उसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

धर्मेंद्र प्रधान ने राज्यों और सांसदों को पत्र लिखकर डीलरशिप आवंटन को लेकर मांगा सुझाव

यूपीए सरकार को भी 2011 में इसी तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था जब उसने  उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले 11,600 पेट्रोल पंप डीलरशिप के आवंटन की घोषणा की थी.

चुनाव आयोग पहले से ही इस बात की घोषणा कर चुका है कि मार्च-अप्रैल के आस-पास विधानसभा चुनाव होंगे. इसका यह मतलब हुआ कि आयोग फरवरी महीने में कभी भी चुनाव के तारीखों की घोषणा कर सकता है.

तारीखों की घोषणा के बाद आचार संहिता लागू हो जाएगी और उस दौरान सरकार के लिए किसी नई घोषणा करना मुश्किल होगा. यही वजह है कि सरकार के घोषणा किए जाने के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

First published: 18 January 2016, 20:53 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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