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ग्रेटर नोएडा वेस्टः अनसुलझे सवालों के जवाब का इंतजार करते फ्लैट खरीदार

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(नेफोवा फेसबुक पेज)

ग्रेटर नॉएडा वेस्ट में बड़ी संख्या में बिल्डर्स द्वारा निर्मित हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में फ्लैट ख़रीदे जाने के लगभग 6 साल गुजर जाने के बाद और अधिकांश फ्लैट खरीदारों द्वारा बिल्डर्स को 90 फीसदी पेमेंट कर दिया गया है. इतना अरसा गुजर जाने के बाद भी अपने सपनों का आशियाना न मिल पाने की स्थिति में खरीदार हताश हो चुके हैं और आये दिन अपने घरों के लिए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. 

कंज्यूमर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के चक्कर लगा रहे हैं, अब जाकर ग्रेटर नॉएडा प्राधिकरण ने कुम्भकर्णी नींद से जागकर अपने वेबसाइट पर डिफॉल्टर बिल्डर्स की एक लंबी सूची प्रकाशित की है. 

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एक ओर जहां लाखों फ्लैट खरीदार अब तक घर न मिल पाने और प्रोजेक्ट साइट पर निर्माण कार्य रुके होने की वजह जानने के लिए बिल्डर्स और प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे हैं, प्राधिकरण सिर्फ और सिर्फ अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश में लगा है. बड़े सवाल ये हैंः

  • डिफॉल्टर बिल्डर्स की लिस्ट में शामिल तमाम बिल्डर्स एक दिन में तो डिफॉल्टर नहीं बन गए होंगे, फिर 6 सालों तक फ्लैट खरीदारों को अंधेरे में क्यों रखा गया?
  • अगर बिल्डर्स डिफॉल्टर हैं तो इन्हें एक प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाए जाने की दशा में दूसरे नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत करने की इजाजत प्राधिकरण द्वारा किस आधार पर दी गई?
  • प्राधिकरण की नाक के नीचे बिल्डर कैसे इतने सालों से लोगों को फ्लैट्स बेचता रहा?
  • क्या तब प्राधिकरण को बिल्डर्स के नापाक इरादों की जानकारी नहीं थी?
  • समय रहते प्राधिकरण ने डिफॉल्टर बिल्डर्स की लिस्ट क्यों नहीं जारी की?
  • सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपने बिल्डर्स का नाम डिफॉल्टर की सूची में देखकर और ये जानकार कि उनके बिल्डर्स के पास प्राधिकरण का अरबों–खरबों रुपये बकाया है, लोग अब कहां जाएं?

ऐसे में अब बैंकों ने भी डिफॉल्टर बिल्डर्स के प्रोजेक्ट में घर बुक कराए लोगों को पहले से चल रहे लोन पर फंड रिलीज़ करने से इनकार कर दिया है. पेमेंट नहीं कर पाने की दशा में बिल्डर लेट पेनाल्टी वसूल सकता है, जिसको लेकर बायर्स की चिंता बढ़ गई है. 

उधर, प्राधिकरण द्वारा डिफॉल्टर बिल्डर को इस महीने के अंत तक बकाया राशि जमा नहीं कर पाने की स्थिति में उनके प्लॉट के आवंटन को रद्द कर दिए जाने की चेतावनी से फ्लैट खरीदार काफी डरे हुए हैं. ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा अगर किसी का नुकसान होता है तो वह निर्दोष फ्लैट खरीदार ही हैं.

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प्राधिकरण डिफॉल्टर बिल्डर्स के लिए ‘एग्जिट पालिसी’ (EXIT POLICY) के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से मंजूरी ले चुकी है यानी जो बिल्डर बकाया राशि का भुगतान प्राधिकरण को कर पाने में विफल रहता है, उस बिल्डर के प्रोजेक्ट्स प्राधिकरण के नाम हस्तांतरित कर बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है.

नेफोवा का सवाल यह है कि कोई भी इस तरह का निर्णय लेने से पहले बायर्स के पक्ष को क्यों नहीं सुनता है. ऐसी पॉलिसी बनाते समय बायर्स प्रतिनिधियों या फ्लैट बायर एसोसिएशन, जो सक्रियता से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं को क्यों नहीं शामिल किया जाता है?

First published: 8 September 2016, 6:16 IST
 
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