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GST से महंगी होगी हायर एजुकेशन, अरुण जेटली से मिले शिक्षाविद

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 June 2017, 16:55 IST

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के चलते पढ़ाई महंगी हो जाएगी और इसकी वसूली अभिभावकों से की जाएगी. देश के मौजूदा शैक्षिक ढांचे और अभिभावकों पर पड़ने वाले संभावित बोझ को देखते हुए देश के शिक्षाविदों ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और राज्यमंत्री संतोष गंगवार से मुलाकात की.

एजुकेशन प्रमोशन सोसाइटी फॉर इंडिया (EPSI) ने वित्त मंत्री से मुलाकात कर उन्हें देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में ली जाने वाली आउटसोर्स सेवाओं पर लगने वाले करों से छूट देने का ज्ञापन सौंपा.

EPSI के कार्यकारी अध्यक्ष और बिमटेक इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. हरिवंश चतुर्वेदी ने बताया कि इस संगठन का गठन शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली समस्याओं से निपटारे के लिए 2005 में किया गया था. यह सोसाइटी देश की 300 से ज्यादा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और 3,500 से ज्यादा निजी कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करती है.

डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि हाल ही में पता चला कि आगामी 1 जुलाई 2017 से केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले जीएसटी से देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थान, निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा आउटसोर्स की जाने वाली सेवाओं पर जीएसटी लागू कर दिया जाएगा.

इस आउटसोर्स सेवाओं में इन संस्थानों द्वारा देशभर के अपने छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों को दिए जाने वाले ट्रांसपोर्टेशन, सिक्योरिटी, हॉस्टल, मेस-कैंटीन, ट्रेनिंग, मेडिकल, दुकानें और एडमिशन से जुड़ी सेवाएं आदि शामिल हैं.

फिलहाल इन सेवाओं के उपभोक्ता सीधे इनके प्रदाताओं (वेंडर्स) को भुगतान कर देते हैं, लेकिन जीएसटी लागू होने से इनपर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और इसकी वजह से उच्च शिक्षा पर खर्च बढ़ेगा.

EPSI के दल ने इन्हीं समस्याओं को वित्त मंत्री और राज्य मंत्री के सामने रखा और उन्हें ज्ञापन सौंपकर इसे वापस लेने की गुजारिश की. साथ ही दोनों मंत्रियों को बताया कि आउटसोर्स की जाने वाली सेवाओं पर पड़ने वाले इस बोझ से शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर होगा. इसका सीधा असर उच्च शिक्षा संस्थानों पर होगा और उन्हें इन सेवाओं की आउटसोर्सिंग की जगह खुद देने की मजबूरी हो जाएगी.

इसके परिणामस्वरूप यूनिवर्सिटीज-कॉलेजों के प्रबंधन को इन सेवाओं के मैनेजमेंट पर बेवजह ध्यान देना होगा, जो कि इन संस्थानों की मूल शिक्षा क्षमता पर प्रभाव डालेगा.

दोनों मंत्रियों ने प्रतिनिधिमंडल को इस बात का आश्वासन दिया कि वे इस ज्ञापन का उचित ढंग से परीक्षण कर उनकी मांगें पूरी करने पर उचित ध्यान देंगे. वहीं, EPSI ने यह भी फैसला लिया कि वे ऐसे ही प्रतिनिधिमंडल को संबंधित राज्यों के वित्त मंत्री के पास भी भेजेंगे और उनसे निवेदन करेंगे कि यह मुद्दा जीएसटी परिषद के समक्ष उचित रूप से रखा जाए.

इस प्रतिनिधिमंडल में EPSI के अध्यक्ष और वीआईटी वेल्लोर के चांसलर डॉ. जी विश्वनाथन, मानव रचना यूनिवर्सिटी फरीदाबाद के चांसलर और संगठन के कोषाध्यक्ष डॉ. प्रशांत भल्ला, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अशोक मित्तल और शारदा यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा के चांसलर पीके गुप्ता शामिल रहे.

First published: 2 June 2017, 16:55 IST
 
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