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उना, गुजरात: अब न्याय की मांग करने वाले दलितों पर हमला, 50 से अधिक घायल

सुधाकर सिंह | Updated on: 17 August 2016, 7:17 IST
QUICK PILL
  • दलितों की उना यात्रा से नाराज सवर्ण तबके के लोगों ने रैली में शामिल दलित समुदाय के लोगों पर हमला किया है. इस हमले में कम से कम 50 लोगों के घायल होने की खबर है.
  • 15 अगस्त की सुबह रैली समाप्त होने के बाद घरों को लौट रहे दलितों पर जगह-जगह हमला हुआ.
  • हमले में करीब 50 से 60 लोग घायल हुए हैं और इनमें से कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

दलितों की उना यात्रा से नाराज सवर्ण तबके के लोगों ने रैली में शामिल दलित समुदाय के लोगों पर हमला किया है. इस हमले में कम से कम 50 लोगों के घायल होने की खबर है. दलितों पर हुए अत्याचार के विरोध में निकाली गई रैली से सवर्ण इसलिए नाराज थे क्योंकि इसकी वजह से जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया वह सवर्ण समुदाय से जुड़े हुए थे.

दलित अस्मिता यात्रा का नेतृत्व जिग्नेश मेवानी के नेतृत्व में किया गया. यह यात्रा अहमदाबाद से उना के बीच निकाली गई थी जिसकी दूरी 350 किलोमीटर है. मेवानी का कहना है कि अगर पुलिस ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई की होती तो यह सब कुछ नहीं होता. 

15 अगस्त की सुबह रैली समाप्त होने के बाद दलितों पर जगह-जगह हमला हुआ. उन्हें छड़ों से पीटा गया और कुछ जगह उन पर पत्थरबाजी की गई. मेवानी ने कहा कि हमले में करीब 50 से 60 लोग घायल हुए हैं और इनमें से कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

कई दलित प्रदर्शनकारियों को उना और भावनगर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर और अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. मेवानी ने कहा, 'हमने पुलिस को संभावित हमले के बारे में आगाह किया था लेकिन उन्होंने किसी तरह की कार्रवाई नहीं की.'

उन्होंने कहा कि समटेर गांव के लोग पिछले कुछ दिनों से निचली जाति के लोगों को धमका रहे हैं. समटेर ही वह गांव है जहां से 11 जुलाई की घटना के मामले में करीब दर्जन भर लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

10 दिनों तक चली दलित अस्मिता यात्रा के दौरान सामाजिक न्याय और जमीन दिए जाने की मांग की गई

दलित अस्मिता यात्रा के दौरान सवर्ण जातियों और कथित गौ रक्षकों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला गया. हालांकि इसके बावजूद रैली से लौट रहे दलितों पर हमला किया गया.

10 दिनों तक चली दलित अस्मिता यात्रा के दौरान सामाजिक न्याय और जमीन दिए जाने की मांग की गई ताकि वह मरे हुए जानवरों को ढोने, उसकी खाल उतारने और नाले की सफाई को छोड़ने के बाद अपनी आजीविका का निर्वहन कर सकें. 

बालूभाई सर्वैया का परिवार डरा हुआ है. सर्वैया का परिवार पुलिस की सुरक्षा चाहता है ताकि वह मोटा समढियाला गांव वापस लौट सके.

हमलावरों ने दो कारों को आग के हवाले कर दिया और अन्य वाहनों पर पथराव भी किया. सवर्णों ने उन रास्तों को भी जाम कर दिया जिससे दलित अपने घरों को वापस लौट रहे थे. दलित कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने हमले के बाद अभी तक किसी को गिरफ्तार भी नहीं किया है. 

First published: 17 August 2016, 7:17 IST
 
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