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गुजरात: मुठभेड़ के आरोपी रहे पुलिस वालों की पुनर्वास कहानी

चारू कार्तिकेय | Updated on: 17 April 2016, 8:52 IST

कभी सीबीआई के लिए फर्जी मुठभेड़ में वांछित रहे पृथ्वीपाल पांडे को शुक्रवार को गुजरात के पुलिस महानिदेशक का प्रभार सौंपा गया है. उन्हें यह नियुक्ति पीसी पांडेय को हटाकर दी गई है.

पांडे पर 15 जून 2004 को अहमदाबाद में इशरत जहां, जावेद शेख, अमजद अली, अकबर अली राणा और जीशान जौहर को एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा है.

1979 बैच के आईपीएस अधिकारी पीपी पांडे ने इस मामले में अगस्त, 2013 में सीबीआई के विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया था. उन्हें फरवरी, 2015 में कोर्ट से एक लाख रुपये के मुचलके जमानत मिली थी.

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जमानत मिलने के चार दिन बाद ही गुजरात सरकार ने उन्हें बहाल करते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) का जिम्मा सौंपा था.

दूसरी ओर अहमदाबाद में फर्जी मुठभेड़ के आरोपी पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा के गुजरात में सार्वजनिक अभिनंदन और संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच साझा करने की घटना हाल ही में चर्चा का विषय रही.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते 2002 से 2005 के बीच गुजरात के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगा है. इनमें से कई अधिकारियों को पुलिस व सीबीआई द्वारा गिरफ्तार भी किया गया था. हालांकि अब अधिकतर अधिकारियों को वापस सेवा में बहाल कर दिया गया है यानि उनका पुर्नवास हो गया है.

एक नजर इन अधिकारियों पर:

डीजी वंजारा

1987 बैच के गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी हैं. वे पहले क्राइम ब्रांच में थे और बाद में गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) के मुखिया रहे.

वर्ष 2002 से 2005 के दौरान वंजारा के अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में डीसीपी रहते कई मुठभेड़ को सीबीआई ने फर्जी करार दिया था.

उन पर अभी आठ लोगों की हत्या का आरोप है, जिनमें सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसर बी, तुलसीराम प्रजापति, सादिक जमाल, इशरत और उसके साथ मारे गए तीन अन्य लोग शामिल हैं.

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सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में वंजारा को 2007 में गुजरात सीआईडी ने गिरफ्तार किया गया था. आठ साल जेल में रहने के बाद उन्हें अगस्त, 2015 में जमानत गुजरात ना जाने के शर्त पर मिली थी.

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वंजारा ने जेल में रहते हुए 2013 में पुलिस से इस्तीफा दे दिया था जिसे राज्य सरकार ने नामंजूर कर दिया. नौ साल बाद जब वंजारा गुजरात पहुंचे तो उनका एयरपोर्ट पर हीरो जैसा स्वागत किया गया. इसके अलावा वंजारा रविवार को अहमदाबाद में आरएसएस के एक कार्यक्रम में शामिल हुए. प्रोग्राम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ बीजेपी नेता और मंत्रियों ने भी शिरकत की थी. माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी से उन्हें टिकट मिल सकता है.

गीता जौहरी

गुजरात पुलिस की अधिकारी गीता जौहरी पर सीबीआई ने प्रजापति मामले की जांच में देरी करने और मामले से जुड़े रिकार्डों को नष्ट करने का आरोप लगाया था.

इस मामले में सीबीआई की एक विशेष अदालत से गीता जौहरी को मार्च, 2015 में बरी कर दिया गया था. इसके कुछ दिनों बाद सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की शुरुआत में जांच करने वाली गीता को गुजरात सरकार ने प्रमोशन देते हुए डीजीपी रैंक का अधिकारी नियुक्त किया.

एनके अमीन

इशरत जहां और सोहराबुद्दीन मुठभेड़ कांड में तत्कालीन डिप्टी एसपी और क्राइम ब्रांच में तैनात एन के अमीन को 2007 में गिरफ्तार किया गया था.

गिरफ्तारी के बाद उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. अमीन ने आठ जेल में काटे हैं. जून, 2015 में अमीन की पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के तौर पर राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) में बहाली हुई.

अभय चुडास्मा

गुजरात क्राइम बांच के डीसीपी अभय चुडास्मा को सोहराबुद्दीन शेख और कौसर बी की हत्या के आरोप में 2010 में गिरफ्तार किया गया था.

उन्हें इस मामले में अप्रैल, 2014 में जमानत  मिली थी. जमानत मिलने के चार महीने बाद उन्हें विजिलेंस विभाग में तैनाती मिली. अप्रैल, 2015 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने चुडास्मा के खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया.

जी एल सिंघल

इशरत जहां और सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में क्राइम ब्रांच के पूर्व एसीपी जी एल सिंघल को फरवरी, 2013 में गिरफ्तार किया गया था. सिंघल इशरत जहां मुठभेड़ मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले पुलिस अधिकारी थे.

सीबीआई उनके खिलाफ 90 दिन में चार्जशीट प्रस्तुत नहीं कर सकी थी. इस वजह से उन्हें जल्द ही जमानत मिल गई थी. मई, 2014 को सिंघल को गांधीनगर में राज्य रिजर्व पुलिस में समूह कमांडेंट का पद दिया गया.

राजकुमार पांडियन

इंटेलिजेंस ब्यूरो में तैनात आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन को सोहराबुद्दीन केस में अप्रैल, 2007 में गिरफ्तार किया गया था. सात साल जेल में रहने वाले पांडियन को मई, 2014 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी लेकिन उन्हें मुंबई छोड़ने की इजाजत नहीं मिली.

इसके बाद गुजरात सरकार ने मुंबई स्थित गुजरात औद्योगिक विकास निगम पांडियन को संपर्क अधिकारी बनाया है.

दिनेश एमएन

सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में उदयपुर के तत्कालीन एसपी दिनेश एमएन को अप्रैल, 2007 में गिरफ्तार किया था. बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिनेश को मई, 2014 में जमानत दी थी. जमानत के बाद वसुंधरा राजे की राजस्थान सरकार ने दिनेश एमएन को अप्रैल, 2014 भी बहाल किया था.

विपुुल अग्रवाल

गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी को फर्जी मुठभेड़ मे मामले में 2010 में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें अक्टूबर, 2014 में जमानत मिली. इसके अगले महीने गुजरात सरकार ने 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी विपुल का निलंबन रद्द कर दिया. अप्रैल, 2015 में उन्हें गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड का मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया गया.

अंजू चौधरी

इशरत केस में अंजू चौधरी को फरवरी, 2013 में गिरफ्तार किया गया था. सीबीआई उनकी गिरफ्तारी के 90 दिन के भीतर आरोपपत्र दायर नहीं कर सकी. इसके चलते उन्हें जमानत मिल गई. फिलहाल वह गोधरा में तैनात हैं.

आशीष पंड्या

गुजरात पुलिस में इंस्पेक्टर पंड्या को तुलसीराम प्रजापति केस में 2010 में गिरफ्तार किया गया था. दिसंबर, 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी. अभी वह भुज जिले में तैनात हैं.

First published: 17 April 2016, 8:52 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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