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गुजरात पुलिस को नुक्कड़ नाटक पर आपत्ति

रथिन दास | Updated on: 14 September 2016, 7:48 IST

बीती 11 जुलाई को उना कस्बे में गौरक्षकों द्वारा दलितों के साथ की गई मारपीट की घटना पर गुजरात सरकार की राष्ट्रव्यापी आलोचना के बावजूद लगता है गुजरात में बेशर्मी की सारी हदें पार कर ली गई हैं. अब ताजा मामला पुलिस द्वारा अहमदाबाद नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के समर्थन में उतरी गीत मंडली और नुक्कड़ नाटक ग्रुप के ऊपर हुई पुलिस कार्रवाई का है.

वस्त्रपुर क्षेत्र में झील किनारे एक खुले मैदान में यह सांस्कृतिक कार्यक्रम सफाई कर्मचारियों के समर्थन में आयोजित किया गया था जो अपने लिए उचित वेतन और सेवाओं के नियमन की मांग कर रहे थे. जब नेशनल पीस ग्रुप वाल्मिकी समुदाय के सफाई कर्मियों के जीवन पर आधारित नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति देने वाला था उसी समय पुलिस उन्हें व अन्य प्रदर्शनकारियों को दस किलोमीटर दूर तक खदेड़ते, पीटते हुए पुलिस स्टेशन तक ले गई.

किसी भी कीमत पर अपना शो करने के लिए दृढ़ समूह ने नुक्कड़ नाटक का मंचन पुलिस स्टेडियम में ही किया, जिसका शीर्षक था- ‘वादू आवाजो बा’(बचा हुआ खाना दो, मां!) देर शाम तक नाटक देखने आए लोगों को भी आयोजन स्थल से पकड़ लिया गया. ‘वादू अवाजो बा’ वाल्मिकी समुदाय के सफाई कर्मियों द्वारा लगाई जाने वाली गुहार है, जो वे सुबह से लेकर दिन भर नालियों की सफाई करने के बाद शाम को घर लौटने के समय उच्च जाति के लोगों के घरों के सामने लगाते हैं.

पिछले दस सालों में वाल्मिकी समुदाय के 169 सफाई कर्मियों की मौत सीवर से निकलने वाली जहरीली गैस सूंघने से हुई

यहां उल्लेख करना जरूरी है कि पिछले दस सालों में वाल्मिकी समुदाय के 169 सफाई कर्मियों की मौत सीवर से निकलने वाली जहरीली गैस सूंघने के कारण हुई, जो कि बिना किसी सुरक्षा कवर के मैनहोल में उतरने के कारण उन्हें सूंघनी पड़ती है.

ऐसे सभी मामलोें में इन सभी मैनहोल कार्यकर्ताओं की मौत को ‘दुर्घटना’ करार दिया जाता है. जबकि नगरपालिका आयुक्त जो कि एक आईएएस अधिकारी हैं, ने कक्षा नौ की रसायन विज्ञान की किताब में पढ़ा होगा कि जैव अपशिष्ट से भरी सीवरेज लाइनों में विषैली मीथेन गैस की भरमार होती है, जो कि वातावरण की हवा से काफी भारी होती है.

ट्रेड यूनियन, एनजीओ, धर्मनिरपेक्ष व मानवाधिकार समूहों द्वारा रविवार को हुआ यह सांस्कृतिक कार्यक्रम 6,000 सफाई कर्मियों द्वारा 22 अगस्त से चलाए जा रहे आंदोलन का हिस्सा है. ये सफाईकर्मी नियमन की मांग कर रहे हैं. इनमें से 1300 कर्मचारी 18 से 20 साल से निगम में काम कर रहे हैं.

विख्यात पेंटर-डिजाइनर प्रवीण मिश्रा भी इस विरोध में शामिल हुए. उन्होंने वहां एक ऑन द स्पॉट लाइव पेंटिंग बनाई, जिसमें उन्होंने दिखाया कि एक सफाई कर्मी मैनहोल से बाहर निकलते हुए हाथ में पोस्टर लिए दिखाई दे रहा है, जिस पर वह ‘नियमित नौकरी, आवास एवं स्वास्थ्य सेवाओं की मांग करता दिखाई दे रहा है.’

सभी वर्गों के नागरिकों ने राज्यपाल ओपी कोहली को एक हस्ताक्षरित याचिका भेज कर अपील की है कि वह इन 6,000 सफाई कर्मियों के वेतन भत्तों व नियमन की मांगों पर समुचित कार्रवाई करे. अहमदाबाद नगर निगम में लागू आईजी ठाकुर समिति की सिफारिशों के अनुसार, यह नियम है कि कोई भी सफाईकर्मी जो पांच साल या 900 दिन नगरपालिका में सेवाएं दे चुका हो वह स्वतः ही स्थाई नियुक्ति और नियमित वेतन का अधिकारी हो जाता है.

परन्तु लगता है एएमसी अपनी ही शर्तों व नियमों का तिरस्कार कर रही है. सफाई कर्मियों की मांगों का समर्थन कर रहे संगठन जन संघर्ष मंच के शमशाद खान पठान ने कहा, जिन 1300 कर्मचारियों ने यह मानदंड पूरा कर लिया है, एएमसी उन्हें ही नियमित नहीं कर रही है.

उन्होंने बताया, 'एनजीओ और धर्मनिरपेक्ष समूहों के प्रति सामान्य रवैये के तहत रविवार के इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की अनुमति देने से ऐन वक्त पर इनकार कर दिया गया था.'

खैर, सैंकड़ों लाग आयोजन स्थल पर जमा थे और एक क्रांतिकारी गीत के साथ ही एक मैनहोल से निकलते सफाई कर्मी की लाइव पेंटिंग के बीच यह सद्भावना कार्यक्रम शुरू हुआ. ठीक उसी वक्त 300 पुलिसकर्मी आए और भीड़ को तितर-बितर करते हुए सफाई कर्मियों और थिएटर ग्रुप के कलाकारों को पकड़ कर ले गए.

First published: 14 September 2016, 7:48 IST
 
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