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अमेरिकन ड्रीम: नोटबंदी ने गिराई गुजरातियों के अमेरिका प्रेम पर गाज, अवैध वीज़ा दलालों पर चोट

रथिन दास | Updated on: 17 November 2016, 8:12 IST
QUICK PILL
  • अमेरिका जाने और वहां बसने की चाहत में गुजराती कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं. पिछले कुछ दशकों में लाख़ों गुजराती ग़ैरकानूनी दस्तावेज़ हासिल करके अमेरिका में बस चुके हैं. 
  • मगर अमरीका ने नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन्हें वापस इनके देश भेजने के लिए सक्रिय हो गए हैं. माना जा रहा है कि ट्रंप 30 लाख गुजरातियों पर कार्रवाई की गाज गिरा सकते हैं. 

हाल ही में चुने गए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में ग़ैरकानूनी तरीक़े से बसे करीब 30 लाख गुजरातियों को वहां से तुरंत निकालने की धमकी दी है. ऐसा नहीं है कि लोग इस बात से अनजान हैं? वे लोग तो बिल्कुल भी नहीं, जिन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है या अमेरिका जाने की जुगाड़ में हैं. ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से अच्छी-ख़ासी संख्या में गुजराती इससे प्रभावित होंगे. ये लोग तीन-चार दशक से ज्यादा समय से अमेरिका में गैरकानूनी तरीक़े से रह रहे हैं. 

वहीं प्रधानमंत्री की नोटबंदी की घोषणा से उन गुजरातियों को तगड़ी चोट पहुंची है जो लाखों रुपए देकर अवैध दस्तावेज़ पर अमेरिका पहुंच जाते थे. माना जा रहा है कि नोटबंदी की वजह से गैरकानूनी वीज़ा और अन्य आव्रजन दस्तावेज बनाने वाले कारोबारियों का धंधा मंदा पड़ सकता है. 

दरअसल, अमेरिका की उड़ान भरने के लिए गुजराती कुछ भी करने को तैयार रहते हैं, खासकर अच्छे पैसे वाले. मगर जिन लोगों का वीजा आवेदन रद्द हो जाता है, वे गैरकानूनी आव्रजन दस्तावेज पाने के लिए 35 लाख रुपए तक देने को तैयार हो जाते हैं. 

जिस 'फ्लाइट' से सफ़र करने का ये कारोबारी वादा करते हैं, उसमें अक्सर कैरिबियन के लैगून में नाव की खतरनाक सवारी और मैक्सिको-अमरीकी सीमा पर जंगलों से होते हुए हफ्ते भर की कठिन यात्रा करनी होती है. माना जा रहा है कि 500 और 1000 के नोटों को बंद करने से गुजरात में यह गैरकानूनी 'आव्रजन' का धंधा रुकेगा, कम से कम कुछ समय के लिए ही सही, क्योंकि दलालों के पास पड़ी पुरानी करेंसी अब इस्तेमाल नहीं हो सकेगी. 

गुजरातियों पर ट्रंप की टेढ़ी नज़र

वैसे सही मायने में संकट अब से कुछ महीनों बाद तब होगा, जब ट्रंप प्रशासन अमेरिका में गुजरात से बसे लोगों को वहां से निकालना शुरू करेंगे. इस संबंध में सही आंकड़े नहीं हैं कि गुजरात से पिछले दशकों में कितने लोग गैरकानूनी कागजों से अमेरिका गए, पर माना जा रहा है कि गुजरात के तीन मिलियन लोग ट्रंप का निशाना बन सकते हैं, और यह काफी बड़ी संख्या है.

25 से 35 लाख रुपए में गैरकानूनी आव्रजन दस्तावेज़ खरीदने के लिए आम हथकंडे अपनाने के अलावा, कुछ समय पहले तक ये लोग गुजरात के ग्रीन कार्डधारी से झूठी शादियां भी रचाने लगे थे. 

मगर अमेरिका के आव्रजन अधिकारी इस खेल को पहले ही समझ चुके थे, और उन्होंने लंबे समय से कुंवारे उन अप्रवासियों के अपार्टमेंट्स पर छापे डालकर रैकट का सफाया किया, जो भारत शादी करने-करवाने के इरादे से जाने लगे थे. अमेरिका आव्रजन अधिकारी महिला पुलिस के साथ अप्रवासियों के घर आए, जिन्होंने भारत यात्रा के दौरान शादी की थी और नई दुल्हन का वार्डरोब दिखाने को कहा.

कुछ सालों पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर गुजरात से भाजपा सांसद को गिरफ्तार किया गया था. वे एक महिला के साथ उड़ान भरने वाले थे, और विदेश में गैरकानूनी तरीके से बसना चाहते थे. कुछ भी हो, अमेरिका में बसना है, इस भूत सवार के कारण वीजा और आव्रजन की कई एजेंसियां गुजरात के शहरों में पनपीं. 

लगभग 18 साल पहले रीजनल पासपोर्ट ऑफिस का स्टाफ काफी कम हो गया था क्योंकि हर तीसरे कर्मचारी को गैरकानूनी पासपोर्ट या वीजा एजेंसी के साथ संबंध होने के कारण निलंबित या स्थानांतरित कर दिया गया था. 

हाल ही में पुलिस कमिशनर की ओर से रखी एक प्रेस कांफ्रेंस में एक पत्रकार ने पूछा कि ऐसा क्या बड़ा खुलासा हो गया कि शहर के शीर्ष पुलिस अधिकारी को प्रेस कांफ्रेंस बुलानी पड़ी. जवाब में गुजरात पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि एयरपोर्ट के पास गैरकानूनी पासपोर्ट और वीजा बनाने वाले रैकट का पता चला है, तो उस पत्रकार ने कहा, 'यह कौन-सी बड़ी बात है? 

अगर गुजरात में गैरकानूनी पासपोर्ट और वीजा नहीं बनेंगे, तो कैलिफोर्निया में पेट्रोल कौन भरेगा और पेनिसिल्वेनिया में मोटल्स कौन चलाएगा?' इस बात पर संवाददाता सम्मेलन शुरू होने से पहले वहां दोनों के ठहाके गूंज रहे थे.

गुजरात फाइल्स में भी ज़िक्र

गुजराती अमेरिका में बसने के लिए किस हद तक आमादा हैं, इसकी जानकारी हाल ही में पत्रकार राणा अयूब की किताब 'गुजरात फाइल्स' में अनजाने में सामने आई है. दो महिला आईपीएस अधिकारियों ने राणा से बातचीत के दौरान अपनी बेटियों को इन आंटी के संपर्क में रहने को कहा ताकि वे अमेरिका जाने के लिए जरूरी औपचारिकताओं को समझ सकें. 

राणा ने उसे इस तरह पेश किया है मानो वे अमेरिका की डॉक्युमेंटरी फिल्म निर्माता हों. कोई आगे पढ़ने अमेरिका जाए, तो समाज में बुरा नहीं माना जाता, पर गुजरात के लोगों को तो बिना बात ही जाना है, चाहे किसी भी तरीके से जाएं, और फिर वहां जाकर काम तलाशना है. अक्सर उन अंकल के कंधों पर सवार होकर, जो काफी समय से वहां रह रहे हैं और जो उन्हें स्थापित नजर आते हैं.

लिहाज़ा, अमेरिका जाने के लिए बेताब एक वॉटर फिल्टर मिस्त्री जो प्रतिमाह 10,000 रुपए कमाते हैं, ने वहां जाने वाले एक डांस ट्रूप में खुद को शामिल करने के लिए खुशी-खुशी 2 लाख रुपए जमा करवा दिया. गुजरात में यह हर कोई जानता है कि अमेरिका जाने वाले ऐसे डांस ट्रूप के एक या दो सदस्य परफॉर्मेंस के बाद 'गायब' हो जाते हैं. 

पूर्वग्रह से भरी कार्रवाई

इस तरह की ही एक घटना का फायदा गुजरात में नरेंद्र मोदी प्रशासन ने उठाया था और 2003 में मल्लिका साराभाई की दर्पण अकादमी के खिलाफ जांच शुरू की थी. वजह सिर्फ यह थी कि मल्लिका ने 2002 के दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

मगर जांच में मल्लिका की दर्पण अकादमी द्वारा मानव तस्करी की कोई घटना सामने नहीं आई, पर महज इस शक पर कि यह लोगों को अमरीका जाने के लिए गैरकानूनी आव्रजन दस्तावेज दिलवाती हैं, इस प्रमुख संस्था के रिहर्सल और अन्य गतिविधियां साल भर से ज्यादा समय तक बंद रहीं.

बहरहाल, डेमोक्रेट प्रशासन में गुजरात के कई एनआरआई महत्वपूर्ण पदों पर थे और हो सकता है उन्हें रिपब्लिकन राष्ट्रपति भी लें, पर गैरकानूनी रूप से जाकर बसे लोगों को अपनी फिंगर्स क्रॉस करके रखनी होंगी. क्या पता डोनाल्ड ट्रंप तीन मिलियन लोगों को निकालने की अपनी धमकी को सच कर दें. 

First published: 17 November 2016, 8:12 IST
 
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