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राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल होने पर गुजरात युनिवर्सिटी ने प्रोफेसरों को भेजा कारण बताओ नोटिस

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 April 2018, 15:36 IST
(file photo)

गुजरात सेंट्रल यूनिवर्सिटी (CUG) ने अपने 9 टीचर्स के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है. ऐसा आरोप है कि इन टीचर्स ने कथित तौर पर बीजेपी विरोधी उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार किया था और राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल हुए थे. ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी युनिवर्सिटी ने अपने स्टाफ के खिलाफ इस कारण से ऐसा कड़ा कदम उठाया है.

इन शिक्षकों पर आरोप है कि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के नेता अल्पेश ठाकोर, निर्दलीय उम्मीदवार जिग्नेश मेवाणी और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल समेत बीजेपी विरोधी कई दलों के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार किया था. इन पर यह भी आरोप है कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

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इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, शिकायत करने वालों की पहचान साफ़ न होने के बाद भी युनिवर्सिटी ने यह कार्रवाई की है. अंग्रेजी में लिखी यह शिकायत आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी के द्वारा की गई है, जिसके अंत में लिखा गया है- सीयूजी एबीवीपी के छात्र. हालांकि, अखबार ने जब स्थानीय एबीवीपी पदाधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने ऐसी किसी शिकायत से इंकार किया.

केंद्रीय एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को संबोधित इस लेटर में इस बात के 'दस्तावेजी साक्ष्य' के रूप में टीचर्स की एक फोटो पेश की गई है जिसमें वे कथि‍त तौर पर पिछले साल नवंबर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अहमदाबाद के एक कार्यक्रम में शामिल होते हुए दिख रहे हैं. दो अन्य फोटोग्राफ भी हैं जिनमें राहुल गांधी के साथ बैठे एक प्रोफेसर दिख रहे हैं.

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इस फोटो पर किसी तिथि का उल्लेख नहीं है. रोचक बात यह है कि यह शिकायत 17 नवंबर, 2017 को ही की गई थी, जबकि अहमदाबाद में कांग्रेस की नवसर्जन ज्ञान अधिकार सभा 24 नवंबर, 2017 को आयोजित की गई थी. शिकायत में कहा गया है कि ये टीचर 'गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय को दूसरा जेएनयू बना रहे हैं.'

युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सैय्यद अब्दुल बारी ने इस बात की पुष्ट‍ि की कि यह कार्रवाई एचआरडी मंत्रालय , गुजरात के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) और राज्य शिक्षा विभाग के द्वारा भेजे गए संदर्भ के आधार पर की गई है. शिकायत की प्रति सभी को भेजी गई थी.

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एक शिक्षक ने कहा कि किसी कार्यक्रम में शामिल होने का मतलब यह नहीं कि कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का प्रचार कर रहा है. गौरतलब है कि नियमों के मुताबिक कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ सकता और न ही उसके लिए प्रचार कर सकता. लेकिन यहां शिक्षकों का कहना है कि किसी से मिलना या किसी कार्यक्रम में जाने भर से ये नहीं पुष्ट किया जा सकता है कि उक्त व्यक्ति उस राजनीतिक पार्टी से जुड़ा है.

First published: 28 April 2018, 15:36 IST
 
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