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खुलासा: गुजरात में भाजपा को किसानों और बेरोजगारी ने दिलाई कम सीटें!

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 December 2017, 11:18 IST

18 दिसंबर को गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर जीत हासिल की. लेकिन इस बार की जीत उतनी बड़ी नहीं थी जितना भाजपा और पीएम मोदी ने गुजरात के विकास मॉडल की बात कहकर गुजरात के विकास को प्रचारित किया था. भाजपा को इस बार चुनाव में खासा नुकसान हुआ. चुनाव का रिजल्ट आने के बाद भाजपा हारते-हारते जीती, वहीं कांग्रेस जीतते-जीतते हार गई.

2012 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा की 16 सीटें कम आईं. वहीं, कांग्रेस ने 1995 के बाद का शानदार प्रदर्शन किया. भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर 7.7 फीसदी का रह गया जबकि 2012 में ये 9 फीसदी था. भाजपा को इस चुनाव में 49.1 फीसदी और कांग्रेस को 41.4 फीसदी वोट मिला.

भाजपा ने गुजरात की 182 सीटों में से 99 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया. तो कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए 77 सीटें लीं. चुनाव से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा के लिए 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था लेकिन भाजपा इससे कोसों दूर रह गई थी. इस रिजल्ट के बाद भाजपा के विकास मॉडल की पोल खुल गई थी.

अब गुजरात के मुख्य सचिव ने विधानसभा चुनावों में भाजपा को कम सीटें मिलने की वजह बताई है. गुरुवार को एपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के 12वें रीजनल ऑफिस के उद्घाटन समारोह में मुख्य सचिव जेएन सिंह ने बताया कि किसानों की बदलहाल स्थिति और युवाओं का बेरोजगार होना ही वे दो कारण हैं, जिनके चलते लोगों ने राज्य में बीजेपी के खिलाफ विधानसभा चुनाव में वोट डाले.

मुख्य सचिव ने कहा कि भाजपा को इन चुनावों में वोट देकर मतदाताओं ने अपना गुस्सा और नाराजगी जाहिर की है. सिंह ने कहा कि गुजरात भर में किसान परेशान हैं. खासकर सौराष्ट्र में. उन्होंने बीजेपी के खिलाफ वोट देकर अपनी नाराजगी और गुस्सा जाहिर किया है. दरअसल सौराष्ट्र क्षेत्र में भाजपा को करारा झटका लगा जहां उसे 48 में से सिर्फ 19 सीटें ही मिलीं। जबकि कांग्रेस को 28 सीटें मिलीं। अगर साल 2012 के चुनाव की बात करें तो सौराष्ट्र क्षेत्र में भाजपा को 48 में से 30 सीटें मिली थी वहीं कांग्रेस को सिर्फ 15 सीटें ही हासिल हुई थीं.

सिंह ने कहा कि किसानों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह फसलों के लिए लोन ना मिलना और उनकी मुख्य फसलें कपास और मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य ना मिलना रहा. जिससे किसान में सरकार के प्रति खासा गुस्सा था.

इसके अलावा मुख्य सचिव ने हार का दूसरा कारण भी बताया है. उन्होंने बताया कि युवाओं को नौकरी न मिलना भी पार्टी के खिलाफ वोट पड़ने की एक बड़ी वजह रही. राज्य में हर जगह बेरोजगारी है.

उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि यह एक पहल है. यहां आने वाली एईपीसी गारमेंट सेक्टर को रफ्तार देगी. गारमेंट सेक्टर में एक बार बड़े स्तर पर ले जाएगी. जिससे यहां पर बड़ी संख्या में नौकरी के अवसर पैदा होंगे. हम आशा करते हैं कि गुजरात आने वाले समय में गारमेंट के लिहाज से बड़ा हब बनेगा और बेरोजगारी को खत्म कर देगा.

First published: 29 December 2017, 11:18 IST
 
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