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गुजरात डीजीपी: पूर्व पुलिस अधिकारी ही पहुंचे पीपी पांडे के खिलाफ कोर्ट

सुधाकर सिंह | Updated on: 29 April 2016, 11:43 IST
QUICK PILL
  • पूर्व आईपीएस राहुल शर्मा ने इशरत जहां मुठभेड़ मामले में हत्या के आरोपित पुलिस अफसर पीपी \r\nपाण्डेय को राज्य का अंतरिम डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) बनाए जाने के\r\n खिलाफ पीआईएल दायर की है.
  • 2002 में गोधरा में ट्रेन जलाए जाने के बाद राज्य में हुए दंगों के दौरान अपनी \r\nभूमिका और काल डाटा रिकार्ड्स (सीडीआर) कोर्ट के सामने रखने के कारण राहुल शर्मा गुजरात सरकार की निगहों मेें चढ़ गए थे.

गुजरात में दो पूर्व आईपीएस अफसरों ने गुजरात पुलिस के प्रमुख और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. गुजरात कैडर के आईपीएस राहुल शर्मा ने राज्य हाईकोर्ट में एक जनहति याचिका (पीआईएल) दाखिल कर हत्या के आरोपित को राज्य का पुलिस प्रमुख बनाए जाने पर सवाल उठाया है.

गोधरा में ट्रेन जलाए जाने के बाद राज्य में हुए दंगों के दौरान अपनी भूमिका और काल डाटा रिकार्ड्स (सीडीआर) मामले के चलते राहुल शर्मा गुजरात पुलिस में अछूत सरीखे हो गए थे.

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अब उन्होंने इशरत जहां मुठभेड़ मामले में हत्या के अभियुक्त आईपीएस अफसर पीपी पाण्डेय को राज्य का अंतरिम डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) बनाए जाने के खिलाफ पीआईएल दायर की है.

गुजरात के अंतरिम डीजीपी पीपी पाण्डेय इशरत जहां हत्या मामले में अभियुक्त हैं

शर्मा ने ये पीआईएल रिटायर्ड आईपीएस जुलियो रिबेरो की बिना पर डाली है. रिबेरो दशकों पहले गुजरात कैडर में आईपीएस थे बाद में वो मुंबई और पंजाब पुलिस के प्रमुख रहे.

एडिशनल डीजीपी पाण्डेय को जब राज्य का अंतरिम डीजीपी बनाया गया तो ये अपने आप में चौंकाने वाली घटना थी. राज्य में पहली बार किसी हत्या के अभियुक्त को पुलिस के सर्वोच्च पद नियुक्त किया गया. भले ही अस्थायी तौर पर ही सही.

पाण्डेय इशरत जहां मामले में फिलहाल जमानत पर रिहा हैं. अभी कुछ समय पहले ही पाण्डेय गुजरात के पूर्व डीआईजी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट माने जाने वाले डीजी वंजारा का राज्य में स्वागत करने पहुंचे थे. वंजारा भी इशरत जहां मामले में अभियुक्त हैं और हाल ही में अदालत ने उन्हें कई सालों बाद गुजरात जाने की इजाजत मिली है.

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आम तौर पर ऐसी नियुक्तियां होने पर नागरिक अधिकार संगठन आवाज उठाते हैं लेकिन इस बार वो ज्यादा कुछ नहीं कर रहे. गुजरात पीयूसीएल के सचिव गौतम ठाकर ने कहा कि ऐसे अभियुक्तों को पुलिस बल का प्रमुख नहीं बनाया जाना चाहिए. पीयूसीएल रिबेरो की पीआईएल में शामिल होने पर विचार कर रही है.

गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी की खण्ड पीठ इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगी.

87 वर्षीय रिबेरो का कहना है कि उनकी पीपी पाण्डेय से कोई निजी रंजिश नहीं है. उन्होंने ये पीआईएल सिद्धांतों के लिए डाली है.

पूर्व आईपीएस राहुल शर्मा अब हाईकोर्ट में वकालत करते हैं. अगले हफ्ते वो अदालत में क्या दलील देंगे उन्होंने ये बताने से इनकार कर दिया. माना जा रहा है कि उनका मुख्य तर्क ये होगा कि राज्य पुलिस प्रमुख के तौर पर पाण्डेय उन सभी पुलिस वालों को प्रभावित कर सकते हैं जो उनके खिलाफ इशरत जहां मामले में गवाह हैं.

शर्मा की नाराजगी की वजह


रिबेरो के उलट शर्मा को राज्य सरकार से काफी शिकायत है. उनका कहना है कि उन्हें 2002 के गुजरात दंगों में धर्मनिरपेक्ष बने रहने की वजह से काफी परेशान होना पड़ा.

गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे में 58 लोगों को जल कर मर जाने के बाद गुजरात में दंगे हुए. उस समय शर्मा भावनगर ज़िले के एसपी थे. उन्होंने एक 'मदरसे' पर हमला कर रही भीड़ पर गोली चलवा दी थी. मदरसे में करीब 200 बच्चे थे.

पीपी पाण्डेय ने इशरत जहां मामले के एक अन्य अभियुक्त डीजी वंजारा का किया था स्वागत

राज्य के तत्कालीन गृहमंत्री गोर्धनभाई झडापिया ने उनपर तंज कसते हुए कहा था, "तुम्हारी गोलीबारी में मौत का अनुपात सही नहीं है." इसका छिपा अर्थ ये था कि शर्मा द्वारा करवाई गई गोलीबारी में मरने वाले हिन्दू ज्यादा थे, मुस्लिम कम. जो राज्य के बाकी 'गोलीबारी में मौतों' के अनुपात से उलट था.

उसके बाद शर्मा का ट्रांसफर अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में हुआ जिसके बाद सरकार के संग उनका गतिरोध और बढ़ गया. शर्मा को क्राइम ब्रांच में पता चला कि दंगे के समय के काल डाटा रिकॉर्ड के अनुसार उस समय कुछ दंगाई, पुलिस अफसर, बीजेपी के मंत्री और वीएचपी नेता आपस में संपर्क में थे.

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शर्मा ने ये सीडीआर गोधरा ट्रेन जलाए जाने और गुजरात दंगों की जांच कर रहे नानावती कमीशन को सौंप दिया था.

राज्य सरकार ने शर्मा पर सरकारी सेवा की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया लेकिन सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्राइब्यूनल (कैट) ने उनपर लगे सभी आरोप गलत पाए. उसके तत्काल बाद शर्मा ने आईपीएस की नौकरी छोड़कर गुजरात हाई कोर्ट में वकालत शुरू कर दी.

First published: 29 April 2016, 11:43 IST
 
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