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गुजरात: 2002 गुलबर्ग सोसाइटी दंगे में 24 अभियुक्त दोषी करार

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 June 2016, 13:11 IST
(फाइल फोटो)

गुजरात में 2002 दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में विशेष अदालत ने 24 आरोपियों को दोषी करार दिया है. अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने बीजेपी नेता बिपिन पटेल समेत 36 आरोपियों को बरी कर दिया है.

28 फरवरी 2002 को हजारों की हिंसक भीड़ ने अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी पर हमला कर दिया था. गुलबर्ग सोसाइटी दंगों में 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी. जिनमें पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री भी थे.

सांप्रदायिक हिंसा के बाद 39 लोगों के शव बरामद हुए थे, जबकि 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था. इस मामले में पिछले साल स्पेशल कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई थी.

36 अभियुक्त बरी

इस मामले की सुनवाई 2009 में शुरू हुई थी. गुलबर्ग सोसाइटी केस में चार आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि नौ अभियुक्त अब भी जेल में हैं. इस मामले में कुल 338 लोगों की गवाही हुई थी. गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में 2010 में पूछताछ हुई थी.

हालांकि एसआईटी रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी. 15 सितंबर 2015 को गुलबर्ग सोसाइटी केस की सुनवाई खत्म हो गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 31 मई तक फैसला सुनाने के निर्देश दिए थे.

बीजेपी नेता बिपिन पटेल बरी

2002 का गुलबर्ग सोसाइटी दंगा गुजरात के उन दस बड़े दंगों में है, जिनकी शुरुआत 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने की घटना के बाद हुई थी. ट्रेन के एस-6 कोच में भीड़ द्वारा आग लगाए जाने के बाद 59 लोगों की मौत हो गई थी.

गुजरात में 2002 में हुए दंगों की जांच कर रही एसआईटी ने गुलबर्ग सोसाइटी मामले में तीन हजार दस्तावेज पेश किए थे. आरोपियों में से एक बिपिन पटेल अभी बीजेपी से म्युनिसिपल काउंसलर हैं. हालांकि विशेष अदालत ने पटेल को आरोपों से बरी कर दिया है.

'आगे लड़ाई जारी रखेंगे'

गुलबर्ग सोसाइटी केस में 24 दोषियों की सजा का एलान छह जून को किया जाएगा. अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद के नेता अतुल वैद्य को इस मामले में दोषी करार दिया है.

इस मामले में पीड़ित और कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने कहा है कि इंसाफ नहीं मिलने तक लड़ाई जारी रखी जाएगी. जकिया ने कहा कि 36 लोगों के बरी होने का उन्हें अफसोस है. 

जकिया जाफरी ने अहमदाबाद की विशेष अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हां हम इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालतों में अपील करेंगे."

क्या है पूरा मामला

गोधरा में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस पर हमले में 59 कारसेवकों के मारे जाने के बाद गुजरात के कई शहरों में बड़े पैमाने पर दंगे फैल गए थे.

गोधरा कांड के एक दिन बाद 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद के गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी में भीड़ ने घुसकर 69 लोगों की हत्या कर दी थी. कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी को भी भीड़ ने जिंदा जला दिया था.

चार घंटे तक मार-काट

गुलबर्ग सोसायटी में 29 बंगले और 10 फ्लैट थे, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम परिवार रहते थे और एक पारसी परिवार था. घटना के चश्मदीदों ने बताया कि भीड़ ने चार घंटे तक सोसाइटी में मार-काट की. बच्चे, बूढ़े और औरतें, कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी के दो मंजिला घर में पनाह लिए हुए थे.

उत्तेजित भीड़ को देखकर आखिर में एहसान जाफरी खुद बाहर आये और भीड़ से कहा कि वो उनकी जान ले लें, लेकिन बच्चों और औरतों को छोड़ दें. जिसके बाद एहसान जाफरी को घर से घसीट कर बाहर लाया गया और मौत के घाट उतार दिया. बाद में भीड़ ने उनके घर को आग लगा दी.

2009 में एसआईटी को जांच

मार्च 2008 में जकिया जाफरी और गैर-सरकारी संगठन 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के 10 बड़े मामलों की जांच के लिए गुजरात की तत्कालीन नरेंद्र मोदी सरकार को आदेश दिया. जिनमें गुलबर्ग सोसाइटी का मामला भी था. कोर्ट ने पूर्व सीबीआई निदेशक आर के राघवन की अध्यक्षता में जांच के लिए एक एसआईटी गठित की.

First published: 2 June 2016, 13:11 IST
 
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