Home » इंडिया » Gulbarg society massacre: Ahmedabad Court defers judgement on quantum of sentence for the 24 convicts till tomorrow
 

गुलबर्ग सोसाइटी के गुनहगारों की सजा पर सुनवाई टली

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 June 2016, 15:27 IST
(फाइल फोटो)

गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में सजा पर सुनवाई एक दिन के लिए टल गई है. इस मामले में अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट 24 अभियुक्तों को दोषी ठहरा चुकी है.

अब स्पेशल कोर्ट में शुक्रवार को दोषियों की सजा पर सुनवाई होगी. अदालत ने दो जून को इस मामले में 36 आरोपियों को बरी कर दिया था. गुलबर्ग सोसाइटी केस में कुल 66 अभियुक्त थे. इनमें से छह आरोपियों की केस की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी.

दंगे में 69 लोगों की हत्या

28 फरवरी 2002 को हजारों की हिंसक भीड़ ने अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था. जिसमें कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी.

गोधरा में 27 फरवरी को साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लगाए जाने के बाद 59 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी. इसके बाद गुजरात के कई शहरों में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे.

गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड उन नौ बड़े दंगों में शामिल था, जिसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बनाई थी. हिंसा के बाद गुलबर्ग सोसाइटी से 39 लोगों के शव बरामद हुए थे, जबकि 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था. 

जकिया जाफरी की मुहिम

मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की 77 साल की पत्नी जकिया जाफरी इस मामले में इंसाफ के लिए लंबे अरसे से लड़ाई लड़ रही हैं. 14 साल से बीमारी के बावजूद वो लगातार अलग-अलग एजेंसियों के जरिए न्याय की मुहिम चला रही हैं.

एसआईटी से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक हर जगह उन्होंने लड़ाई जारी रखी. वहीं दो जून को फैसला आने के बाद जकिया ने 36 आरोपियों को बरी करने पर इसे आधा-अधूरा इंसाफ करार दिया था.

गुलबर्ग सोसाइटी मामले में विशेष अदालत ने 11 अभियुक्तों को हत्या का दोषी माना है, जबकि विश्व हिंदू परिषद के नेता अतुल वैद्य समेत 13 अभियुक्त भी गुनहगार ठहराए गए हैं. वहीं बीजेपी के पार्षद बिपिन पटेल समेत 36 अभियुक्तों को अदालत बरी कर चुकी है.

First published: 9 June 2016, 15:27 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी