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गुलबर्ग सोसाइटी: क्या है इस घटना से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कनेक्शन?

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 June 2016, 15:06 IST
(फाइल फोटो)

गुरुवार को अहमदाबाद की विशेष अदालत ने गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड मामले में 24 लोगों को दोषी ठहराया है. वहीं अदालत ने बीजेपी नेता बिपिन पटेल समेत 35 लोगों को बरी कर दिया.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी एक बार पूछताछ की थी. तब वे गुजरात के मुख्यमंंत्री थे. एसआईटी ने उनसे पूछताछ का आधार प्रशासनिक स्तर पर 'लापरवाही' बरतने को बनाया था.

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी से हुई पूछताछ गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड मामले की पीड़िता जकिया जाफरी की शिकायत पर हुई थी. जकिया जाफरी गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में मारे गए कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं.

गुलबर्ग सोसाइटी दंगा: बीजेपी नेता बिपिन पटेल बरी

गोधरा में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस पर हमले में 59 कारसेवकों के मारे जाने के बाद गुजरात के कई शहरों में बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे. कथित तौर पर इन दंगों में प्रशासन ने की भी भूमिका रही. इस मामले में अदालती लड़ाई लड़ रही जकिया जाफरी का कहना था कि उनके पति एहसान जाफरी ने कई बार नरेंद्र मोदी को फोन किया लेकिन उनकी तरफ से न तो कोई आश्वासन दिया गया न ही उन्होंने कोई सहायता भेजी.

2002 में गुजरात में हुए व्यापक दंगों में यह एकमात्र मामला है जिसमें नरेंद्र मोदी से पूछताछ हुई.

इसके अगले दिन 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद के गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी में उन्मादी भीड़ ने घुसकर 69 लोगों की हत्या कर दी थी. कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी को भी भीड़ ने जिंदा जला दिया था.

एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी और उनके बेटे तनवीर जाफरी ने कोर्ट में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि इस हत्याकांड के लिए नरेंद्र मोदी सहित 62 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की जाए और उनकी भूमिका की जांच की जाए.

गुजरात: 2002 गुलबर्ग सोसाइटी दंगे में 24 अभियुक्त दोषी करार

जकिया जाफरी का आरोप रहा है कि उनके पति ने मदद के लिए मोदी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को फोन किया था, लेकिन उनकी ओर से कोई मदद नहीं भेजी गई.

जून 2006 में जकिया जाफरी ने शिकायत दर्ज करते हुए पुलिस पर आरोप लगाया था कि पुलिस नरेंद्र मोदी और 62 अन्य लोगों पर एफआरआई दर्ज नहीं कर रही है. पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया. इसके अलावा गुजरात हाईकोर्ट ने भी जाफरी की याचिका सुनने से इंकार कर दिया था.

मार्च, 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के नौ मामलों में फिर से जांच करने के आदेश दिए. इसके लिए सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर आरके राघवन के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया. अगले साल, 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को जाफरी की शिकायत देखने को कहा.

गुलबर्ग सोसाइटी केस: 28 फरवरी 2002 से अब तक क्या हुआ?

इस मामले में एसआईटी ने मार्च 2010 में मोदी से पूछताछ की थी. एसआईटी ने 8 फरवरी, 2012 को मोदी के खिलाफ मामले को बंद करने की रिपोर्ट दाखिल करते हुए उन्हें क्लीन चिट दी थी.

एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जकिया जाफरी ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर किया था, लेकिन उनकी याचिका हर जगह से खारिज हो गई.

दिसंबर, 2013 में जाफरी की याचिका अहमदाबाद के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में खारिज हो गई थी. वहीं लोकसभा चुनाव के दौरान अप्रैल, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली एसआईटी जांच के खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका को खारिज कर दिया था.

First published: 2 June 2016, 15:06 IST
 
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