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गुजरात: गुलबर्ग सोसाइटी दंगे में दोषियों की सजा पर सुनवाई टली

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 June 2016, 14:51 IST
(फाइल फोटो)

गुजरात के 2002 गुलबर्ग सोसाइटी दंगे के मामले में दोषियों की सजा पर सुनवाई टल गई है. अहमदाबाद की विशेष अदालत में अब इस मामले में नौ जून को अगली सुनवाई होगी.

अदालत ने दो जून को इस मामले में 24 अभियुक्तों को दोषी करार दिया था, जबकि अदालत ने बीजेपी पार्षद बिपिन पटेल समेत 36 अभियुक्तों को आरोपों से बरी कर दिया था. गुलबर्ग सोसाइटी मामले में कुल 66 आरोपी थे, जिनमें से छह की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी.

इस मामले में नौ अभियुक्त अभी जेल में बंद हैं. 27 फरवरी 2002 को गोधरा कांड के बाद अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में 28 फरवरी 2002 को कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की दंगाइयों की भीड़ ने नृशंस हत्या कर दी थी.

11 दोषियों पर हत्या का आरोप

इस मामले में 24 दोषियों में से 11 पर हत्या का आरोप लगाया गया है, जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य समेत 13 अन्य आरोपियों को हल्के अपराधों का दोषी ठहराया गया है.

फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा था कि इस मामले में आपराधिक साजिश का कोई साक्ष्य नहीं है और आईपीसी की धारा 120 बी के तहत लगे आरोप हटा दिए गए थे.

पढ़ें: गुजरात: 2002 गुलबर्ग सोसाइटी दंगे में 24 अभियुक्त दोषी करार

जो लोग बरी किए गए हैं, उसमें बीजेपी के वर्तमान पार्षद बिपिन पटेल, गुलबर्ग सोसाइटी इलाके के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक के जी एर्डा और कांग्रेस के पूर्व पार्षद मेघ सिंह चौधरी शामिल हैं. 

गुलबर्ग सोसाइटी मामला 2002 के गुजरात दंगों के उन नौ मामलों में से एक है, जिसकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने जांच की थी.

यह घटना साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एस-6 डिब्बे में गोधरा स्टेशन के निकट आग लगाए जाने के एक दिन बाद हुई थी. 27 फरवरी 2002 को हुए गोधरा कांड में 58 लोगों की हत्या कर दी गई थी.

पढ़ें: गुलबर्ग सोसाइटी केस: 28 फरवरी 2002 से अब तक क्या हुआ?

एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने अदालत के फैसले पर निराशा जाहिर की थी. उन्होंने इसे अधूरा इंसाफ बताते हुए कहा था कि सबको दंडित किया जाना चाहिए था.

First published: 6 June 2016, 14:51 IST
 
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