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गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड के दोषियों के परिजन विश्व हिंदू परिषद से खफा

सुधाकर सिंह | Updated on: 18 June 2016, 13:07 IST
(कैच)

गुजरात के गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड के दोषियों के परिवार वालों को शिकायत है कि विश्व हिंदू परिषद ने उनकी पर्याप्त मदद नहीं की. मामले में अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार को 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

इसके अलावा 12 गुनहगारों को सात-सात साल कैद की सजा हुई है. वहीं एक दोषी मंगनीलाल जैन को 10 साल की सजा हुई. गुलबर्ग सोसाइटी में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत कुल 69 लोग मारे गए थे.

 गुलबर्ग सोसाइटी दंगे में 11 गुनहगारों को उम्रकैद

दोषियों के रिश्तेदारों ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि वीएचपी ने बंद का आह्वान किया था जिस दौरान हजारों लोगों ने गुलबर्ग सोसाइटी पर हमला किया. दोषी परिवारों को उम्मीद ती वीएचपी कानूनी लड़ाई में उनकी मदद करेगा.

भुदेश ट्टली के भाई भारत टल्ली उन 11 दोषियों में शामिल हैं, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है भुदेश कहते हैं, "वीएचपी ने पिछले 14 सालों में हमारी कोई मदद नहीं की."

आठ मामलों में फैसला

वीएचपी ने राज्य के गोधरा स्टेशन पर 27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के डब्बे में 58 कारसेवकों के जलकर मर जाने के बाद बंद का आह्वान किया था. लेकिन शुक्रवार को जब दोषियों को सजा सुनाई गई तो वीएचपी का कोई बड़ा नेता वहीं मौजूद नहीं था.

स्थानीय वीएचपी नेता अतुल वैद्य उन 12 दोषियों में हैं जिन्हें सात साल की सजा हुई है. इन लोगों को गैर-कानूनी जमावड़े, दंगे, लूट इत्यादि जैसे मामलों में सजा सुनाई गई है. हालांकि अदालत में मौजूद दोषियों के कुछ परिवार वालों ने नारा लगाया कि देश की कानून व्यवस्था मुसलमानों का पक्ष लेती है. 

गुलबर्ग सोसाएटी मामले में बच गए पुलिस के बड़े अधिकारी

एक दोषी के रिश्तेदार ने कहा, "अगर एक मुस्लिम भी मारा जाए तो मानवाधिकार कार्यकर्ता चले आते हैं. लेकिन दो दर्जन हिंदुओं को गलत दोषी करार दे दिया गया तो बोलने वाला कोई नहीं है."

हालांकि विशेष अदालत के जज पीबी देसाई के रवैये से ये बयान मेल नहीं खाता. जस्टिस देसाई ने अभियोजन पक्ष की हत्या के 11 दोषियों को मृत्युदंड की सजा देने की मांग को खारिज कर दिया. उन्होंने अभियोजन की ये मांग भी खारिज कर दी कि आजीवन कारावास पाने वाले दोषियों को अंतिम सांस तक जेल में रहने का आदेश दिया जाए. जस्टिस देसाई ने इसका फैसला राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ दिया.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिर से खुले गुजरात दंगों से जुड़े नौ मामलों में से आठ में फैसला आ चुका है

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कार्य कर रहे विशेष अदालत ने अभियोजन की ये मांग भी खारिज कर दी कि दोषियों को अलग-अलग अपराध की सजा बारी-बारी से काटनी चाहिए. 

अदालत ने कहा कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. जज ने कहा कि सभी मामले एक ही घटना के हिस्से की तरह बरते जाने चाहिए, इसलिए सभी सजाएं भी एक साथ चलनी चाहिए.

 गुजरात: 2002 गुलबर्ग सोसाइटी दंगे में 24 अभियुक्त दोषी करार

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े नौ मामलों के दोबारा जांच के आदेश दिए थे. गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड का फैसला आने के साथ ही कुल आठ मामलों अपनी अंतिम अंजाम को पहुंच चुके है. वहीं नरोदा गाम मामले का फैसला आना बाकी है. नरोद गाम में 11 लोग मारे गए थे. मामले में 84 लोगों पर मुकदमा चल रहा है.

First published: 18 June 2016, 13:07 IST
 
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