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गुलबर्ग सोसाएटी मामले में बच गए पुलिस के बड़े अधिकारी

दर्शन देसाई | Updated on: 3 June 2016, 10:18 IST
QUICK PILL
  • अहमदाबाद के मेघानी नगर में गुलबर्ग सोसाएटी को पुलिसवालों ने तब अकेला और असहाय छोड़ दिया जब भीड़ ने पड़ोसी पुलिस चौकी को जला कर खाक कर दिया. पुलिस इंसपेक्टर केेजी एरदा तब इलाके के प्रभारी थे.
  • गुलबर्ग सोसाएटी मामले में एरदा, पीसी पांडेय, एम के टंडन और पी बी गोंडिया को आरोपी बनाया, लेकिन यह जांच से निकलने में सफल रहे. 
  • 2 जून को गुलबर्ग सोसाएटी मामले में आए फैसले में एरदा को विशेष एसआईटी अदालत ने बरी कर दिया है.

गुलबर्ग सोसाएटी नरसंहार पूरी तरह से ऐसा मामला था जिसमें पुलिस ने पीड़ितों को मरने के लिए भीड़ के हवाले छोड़ दिया. गुलबर्ग सोसाएटी हादसा 28 फरवरी 2002 को हुआ था.

अहमदाबाद के मेघानी नगर में गुलबर्ग सोसाएटी को पुलिसवालों ने तब अकेला और असहाय छोड़ दिया जब भीड़ ने पड़ोसी पुलिस चौकी को जला कर खाक कर दिया. 

पुलिस इंसपेक्टर केजी एरदा तब इलाके के प्रभारी थे. गुलबर्ग सोसाएटी मामले में एरदा, पीसी पांडेय, एमके टंडन और पीबी गोंडिया को आरोपी बनाया, लेकिन यह जांच से बच निकलने में सफल रहे. 

2 जून को गुलबर्ग सोसाएटी मामले में आए फैसले में एरदा को विशेष एसआईटी अदालत ने बरी कर दिया है. फोन कॉल रिकॉर्ड की एनालिसिस में यह बात सामने आई थी कि एरदा ने पीसीआर पर अपने अधिकारियों को स्थिति की गंभीरता के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने पुलिस के बड़े अधिकारियों को मौके पर खुद मौजूद रहने के लिए कहा था क्योंकि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी.

लेकिन दिन के 11.30 बजे से लेकर दोपहर बाद 3.30 के बीच एरदा अकेले ही स्थिति को संभालते रहे. उस वक्त बड़े अधिकारी क्या कर रहे थे, इसे जानना जरूरी है.

पीसी पांडे, पुलिस कमिश्नर

मेघानी नगर में पुलिस ने 12.54 पर कर्फ्यू लगाया. पीसीआर डेटा के मुताबिक तब तक करीब 5,000 लोगों की हथियारबंद भीड़ गुलबर्ग सोसाएटी को घेर चुकी थी. पीसीआर डेटा के मुताबिक भीड़ ने 12 बजकर 38 मिनट पर सोसाइटी को घेर लिया था.

कानून के मुताबिक पुलिस कमिश्नर पीसी पांडे पर समय रहते कर्फ्यू लगाने की जिम्मेदारी थी. दो बज कर नौ मिनट पर मेघानी नगर पुलिस इंसपेक्टर केजी एरदा ने केंद्रीय बलों की मांग की लेकिन शाम तक अर्द्धसैनिकों बलों को इलाके में तैनात नहीं किया गया. यह भी पांडे का ही फैसला था.

एम के पांडे, संयुक्त आयुक्त, सेक्टर 2

टंडन दोपहर बाद दो से तीन बजे के बीच रेवड़ी बाजार में थे. पांडे की तरफ से फोन पर उन्हें गुलबर्ग सोसाएटी की गंभीर स्थिति के बारे में बताया गया. रेवड़ी बाजार सोसाएटी से पांच किलोमीटर दूर है.

पीसीआर ने टंडन को एहसान जाफरी और अन्य लोगों पर मंडरा रहे खतरे के बारे में जानकारी दी, तब भी टंडन रेवड़ी बाजार में ही थे. रेवड़ी बाजार में हिंसा जैसी कोई स्थिति नहीं थी.

एरदा जब दोपहर बाद ढाई बजे अतिरिक्त पुलिस फोर्स की मांग कर रहे थे तब भी वह रेवड़ी बाजार में ही थे. टंडन  पांडे के कहने के बाद ही इलाके से निकले. वह भी करीब दोपहर बाद तीन बजे.

रेवड़ी बाजार में टंडन आराम कर रहे थे क्योंकि यह इलाका उनके क्षेत्राधिकार में नहीं था. यह इलाका उनके सहयोगी अधिकारी शिवानंद झा का था जो अपने दफ्तर में बैठे हुए थे.

पी बी गोंडिया, डिप्टी पुलिस कमिश्नर, जोन 4

टंडन के अलावा उनके डिप्टी गोंडिया भी गुलबर्ग सोसायटी से दूर रहे. सोसाएटी पर हुए हमले के बारे में जानकारी दिए जाने के बाद भी उन्होंने करीब 6 किलोमीटर दूर कुबेर नगर में आराम करना उचित समझा.

गोंडिया करीब दो बजे के कुछ मिनट पहले गुलबर्ग सोसाएटी पहुंचे और करीब घंटे भर के भीतर वहां से निकल गए. उन्होंने भीड़ को अनियंत्रित होने का मौका दिया. बाद में गोंडिया कालूपुर इलाके में गए और यह इलाका भी उनके क्षेत्राधिकार में नहीं था.

First published: 3 June 2016, 10:18 IST
 
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