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देखिए गुरमेहर कौर का एक साल पुराना वीडियो जो आपको झकझोर देगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 February 2017, 12:51 IST
(यू ट्यूब वीडियोग्रैब)

20 साल की गुरमेहर कौर सोशल मीडिया पर कई दिन से ट्रेंड कर रही हैं. गुरमेहर डीयू के लेडी श्रीराम कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य की स्टूडेंट हैं. रामजस कॉलेज में 22 फरवरी को दक्षिणपंथी और लेफ्ट छात्र संगठनों के बीच विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर प्लेकार्ड के साथ एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्होंने लिखा कि मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा हूं और मैं एबीवीपी से नहीं डरती हूं. मैं अकेली नहीं हूं भारत का हर छात्र मेरे साथ है.

हालांकि उनकी उस तस्वीर पर ज़्यादा विवाद मचा, जिसमें प्लेकार्ड लिए गुरमेहर कह रही हैं कि पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है. दरअसल ये तस्वीर यूट्यूब पर वायरल हुए उस वीडियो का हिस्सा है, जिसमें गुरमेहर कौर ने पिछले साल 28 अप्रैल को कुछ कहे बिना प्लेकार्ड के ज़रिए अपना दर्द बयां किया था. पहले देखिए ये वीडियो:

28 अप्रैल 2016 का वीडियो

मेरा नाम गुरमेहर कौर है. मैं भारत के जालंधर शहर की रहने वाली हूं. ये मेरे पिता कैप्टन मनदीप सिंह हैं. वो 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए थे. मैं दो साल की थी, जब उनका निधन हुआ. उनसे जुड़ी बहुत कम यादें हैं मेरे पास.
पिता नहीं होते तो कैसा महसूस होता है, इसकी ज़्यादा यादें हैं मेरे पास.

मुझे याद है कि मैं पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से कितना नफ़रत करती थी, क्योंकि उन्होंने मेरे पिता को मारा था.
मैं मुसलमानों से भी नफ़रत करती थी, क्योंकि मैं सोचती थी कि सभी मुस्लिम पाकिस्तानी होते हैं. 

जब मैं छह साल की थी तो बुर्का पहनी एक महिला को चाकू मारने की कोशिश भी की. किसी अनजान वजह से मुझे लगा कि उसने मेरे पिता को मारा होगा. मेरी मां ने मुझे रोका और समझाया कि. पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है.

वक़्त लगा लेकिन आज मैं अपनी नफ़रत को ख़त्म करने में कामयाब रही. ये आसान नहीं था लेकिन मुश्किल भी नहीं था.
अगर मैं ऐसा कर सकती हूं तो आप भी कर सकती हैं. आज मैं भी अपने पिता की तरह सैनिक बन गई हूं. मैं भारत-पाकिस्तान के बीच अमन के लिए लड़ रही हूं.

क्योंकि अगर हमारे बीच कोई जंग ना होती, तो मेरे पिता आज ज़िंदा होते. मैंने ये वीडियो इसलिए बनाया ताकि दोनों तरफ़ की सरकारें दिखावा करना बंद करें. और समस्या का समाधान दें. अगर फ़्रांस और जर्मनी दो विश्व युद्ध के बाद दोस्त बन सकते हैं. जापान और अमरीका अतीत को पीछे छोड़ आगे देख सकते हैं. तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते?

ज़्यादातर भारत और पाकिस्तानी शांति चाहते हैं, जंग नहीं. मैं दोनों देशों के नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा रही हूं. हम तीसरे दर्जे के नेतृत्व के साथ पहले दर्जे का मुल्क़ नहीं बन सकते. प्लीज़ तैयार हो जाइए. एक-दूसरे से बातचीत कीजिए और काम पूरा कीजिए. 

स्टेट प्रायोजित आतंकवाद बहुत हो चुका. स्टेट प्रायोजित जासूस बहुत हुए. स्टेट प्रायोजित नफ़रत बहुत हुई. सरहद के दोनों तरफ़ कई लोग मारे जा चुके हैं. बस, बहुत हुआ. मैं ऐसी दुनिया चाहती हूं, जहां कोई गुरमेहर कौर ना हो, जिसे अपने पिता की याद सताती हो. मैं अकेली नहीं. मेरे जैसे कई हैं. #ProfileforPeace

सहवाग और बीजेपी सांसद के ट्वीट पर विवाद 

सोशल मीडिया पर इस मामले ने उस वक़्त ज्यादा तूल पकड़ लिया, जब क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने एक प्लेकार्ड के साथ तस्वीर ट्वीट की, जिसमें लिखा था, "मैंने दो तिहरे शतक नहीं लगाए, मेरे बल्ले ने लगाए."

कर्नाटक के मैसूर से बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा के ट्वीट ने आग में झी काम किया. सिम्हा ने दाऊद इब्राहिम की तस्वीर के साथ ट्वीट किया, "मैंने 1993 में लोगों को नहीं मारा. बम धमाकों ने उन्हें मारा. यहां तक कि दाऊद ने भी अपनी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को सही ठहराने के लिए अपने पिता के नाम का सहारा नहीं लिया." दरअसल दाऊद के पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस में कांस्टेबल थे.

First published: 28 February 2017, 12:51 IST
 
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