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राजखोवा वही सब दोहरा रहे हैं जो रोमेश भंडारी 1998 में करके असफल हो चुके हैं

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • अरुणाचल प्रदेश में बागी कांग्रेस विधायकों ने बीजेपी के साथ मिलकर सीएम नबाम तकी को पद से हटाने और एक बागी कांग्रेस विधायक को उनकी जगह चुनने का फैसला किया है.
  • 1998 में उत्तर प्रदेश में भी लगभग इसी तरह के हालात बन गए थे. तब तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह को बर्खाास्त करके एक दिन के लिए जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री बना दिया था.
  • कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के इशारे पर अरुणाचल के राज्यपाल असंवैधानिक काम कर रहे हैं. पार्टी ने इस मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है.

अरुणाचल प्रदेश का राजनीतिक संकट गहरा गया है. कांग्रेस के लिए स्थितियां परेशान करने वाली है. कह सकते हैं कि राज्य एक संवैधानिक संकट के मुहाने पर है. बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में गुरुवार को बागी कांग्रेस विधायकों ने बीजेपी विधायकों मिलकर एक स्थानीय होटल में बैठक की. यहां उन्होंने मुख्यमंत्री नबाम तकी को पद से हटाने का निर्णय कर लिया.

ऐसा लग रहा है कि इतिहास का रीप्ले हो रहा है. 1998 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को राज्यपाल रोमेश भंडारी ने इसी तरह की परिस्थितियों में बर्खास्त कर एक दिन के लिए जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी थी. तब जो भाजपा पीड़ित थी आज वही भाजपा ताकतवर होने के बाद उन्हीं हथकंड़ों का इस्तेमाल अरुणाचल में कर रही है. तब भाजपा को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाना पड़ा था अब कांग्रेस को उन्हीं कोर्टों का सहारा है.

अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों ने कलिखो पुल को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुन लिया है. नहारा लागुन में एक होटल के कराटे ट्रेनिंग सेंटर में हुई बैठक में विधानसभा के कुल 60 में से 33 सदस्यों ने कलिखो पुल के पक्ष में वोट कर उन्हें अपना नेता चुना. सीएम तकी और उनके समर्थकों ने इस बैठक को गैरकानूनी बताते हुए इसमें भाग नहीं लिया.

दूसरी ओर गुवाहटी हाईकोर्ट ने राज्यपाल जेपी राजखोवा से नाराजगी जताते हुए राज्य विधानसभा द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर रोक लगा दी है. इसमें विधानसभा अध्यक्ष नबाम राबिया को हटाने का निर्णय भी शामिल है.

हाईकोर्ट का आदेश विधानसभा स्पीकर राबिया की याचिका पर आया है. यह याचिका राज्यपाल द्वारा 14 जनवरी, 2016 से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र को एक महीने पहले आयोजित करने के विरोध में डाली गई है.

राज्यपाल जेपी राजखोवा से नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने राज्य विधानसभा द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर रोक लगा दी

इससे पहले 16 दिसंबर को असाधारण घटनाक्रम में विधानसभा की बैठक सदन के बाहर एक सामुदायिक भवन में हुई. इसकी वजह है कि विधानसभा भवन को सील कर दिया गया है और विधायकों को अंदर जाने की अनुमति नहीं है.

बैठक की अध्यक्षता विधानसभा के डिप्टी स्पीकर टी नोरबू थोंगडेक ने की. इस बैठक में स्पीकर नबाम राबिया के खिलाफ ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया. 60 में से 33 विधायकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया. इसमें बीजेपी 11 विधायक भी शामिल हैं.

अरुणाचल में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा प्रभाव केंद्र पर भी पड़ा है. पहले से ही नरेंद्र मोदी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेर रही कांग्रेस पिछले दो दिनों से संसद में इस मसले को उठा रही है. कांग्रेस खुद को 'पीड़ित' के तौर पर पेश करते हुए इसे 'राजनीतिक बदले की कार्रवाई' बता रही है.

राज्यपाल राजखोवा की भूमिका

कांग्रेस सरकार का संकट नवंबर महीने में शुरू हुआ जब कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों ने सीएम तकी पर 'निरंकुश' बर्ताव करने का आरोप लगाया. असंतुष्ट विधायक इसके बाद से विधायक दल की बैठक से परहेज करने लगे.

नौ दिसंबर को राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा ने संविधान की धारा 174(1) का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा सत्र को एक महीने पहले ही बुला लिया. राज्यपाल ने सरकार और मंत्रिमंडल से सलाह किए बिना ही सत्र बुलाया.

कांग्रेस विधायकों समेत कुल 33 सदस्यों ने असंतुष्ट कांग्रेस विधायक कलिखो पुल को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुन लिया

सत्र अगले साल 14 जनवरी से शुरू होने वाला था. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी विधायकों ने नौ नवंबर को स्पीकर को हटाने के लिए अनुरोध किया था जिसके चलते राज्यपाल ने पहले ही सत्र बुला लिया.

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को बिना जानकारी दिए राज्यपाल ने केंद्र सरकार से केंद्रीय बलों की मांग की है. राज्यपाल ने अपने बचाव में कहा है कि राज्य के कैबिनेट मंत्रियों ने मंगलवार को राजभवन में आकर धमकी और गाली दी है.

राज्यपाल ने कहा कि उनकी सुरक्षा में तैनात गार्ड ने उन्हें बचाया. एक कथित वीडियो भी सामने आया है जिसमें कांग्रेस विधायक राज्यपाल और सुरक्षाकर्मियों से बहस करते दिख रहे हैं.

हालांकि, कानून और व्यवस्था राज्य सरकार के जिम्मे होता है. इस मामले में ऐसा लग रहा है कि राज्यपाल ने राज्य सरकार को दरकिनार करके संविधान का उल्लंघन किया है. अरुणाचल के हालात के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री किरन रिजिजू को जिम्मेदार बताया जा रहा है. रिजिजू अरुणाचल से ही बीजेपी के सांसद हैं.

ईटानगर से खबरें आ रही है कि मुख्यमंत्री और उनके समर्थकों ने सत्र का बहिष्कार करने के साथ ही विधानसभा को सील कर दिया था. इस कारण डिप्पी स्पीकर थोंगडोक ने वैकल्पिक सत्र बुलाने का इंतजाम सदन से बाहर किया. स्पीकर राबिया ने इस सत्र को 'असंवैधानिक' करार दिया.

कांग्रेस के बागी विधायकों का साथ मिल जाने से बीजेपी मजबूत स्थिति में दिख रही है. बीजेपी के पूर्व सांसद तापिर गाओ ने कैच को बताया कि राज्य में सीएम अल्पसंख्यक सरकार चला रहे हैं. कांग्रेस के 47 विधायकों में से 22 सरकार के साथ नहीं है और सरकार बहुमत के आंकड़े से बहुत दूर है. अरुणाचल में पिछले तीन महीने से जारी राजनीतिक संकट के लिए बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस का आतंरिक कलह जिम्मेदार है.

राष्ट्रपति के पास पहुंची कांग्रेस

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मामले पर बुधवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा. सोनिया गांधी ने कहा, 'केंद्र और राज्यपाल द्वारा अरुणाचल प्रदेश की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है.'

अरुणाचल प्रदेश विधानसभा परिसर बुधवार से सील है

ज्ञापन में कहा गया है: ''बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व और कुछ असंतुष्ट कांग्रेस विधायक मिलकर अरुणाचल प्रदेश में चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. इस अनैतिक कार्य में केंद्र सरकार के कुछ शीर्ष पदाधिकारी भी शामिल हैं जो पहले ही इसकी योजना बना रहे थे.''

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के द्वारा राज्यपाल से असंवैधानिक चीजें करवाई जा रही हैं. मुख्यमंत्री तकी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया.

First published: 18 December 2015, 1:35 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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