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ऐतिहासिक फैसला: हाजी अली दरगाह में अब मजार तक जा सकेंगी महिलाएं

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:20 IST
(फाइल फोटो)

महिला अधिकार की दिशा में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि मुंबई की हाजी अली दरगाह में महिलाएं अब अंदर तक प्रवेश कर सकेंगी.

अब तक महिलाओं को केवल दरगाह की मुख्य इमारत के बाहर तक जाने की इजाजत थी. इस आदेश के साथ ही अब महिलाएं मुंबई की इस मशहूर दरगाह में बिना बेरोक-टोक अंदरूनी हिस्से यानी मजार तक जा सकेंगी.

अदालत ने साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं. हाजी अली दरगाह में प्रवेश के लिए भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड की तृप्ति देसाई भी लंबे अरसे से अभियान चला रही थीं. कई बार उनको दरगाह में प्रवेश से रोका गया था.

'महिलाओं पर पाबंदी असंवैधानिक'

बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बारे में जानकारी देते हुए याचिकाकर्ता के वकील राजू मोरे ने कहा, "बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी असंवैधानिक है. हाजी अली दरगाह ट्रस्ट का कहना है कि वो फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे."

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'महिलाओं के लिए बड़ी जीत'

इस मामले में याचिकाकर्ता जकिया का कहना है, "बहुत खुश हूं. मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ दिलाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है."

वहीं भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की है. तृप्ति ने कहा, "यह एक ऐतिहासिक फैसला है. हम हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं. महिलाओं के लिए यह एक बड़ी जीत है."

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अदालत ने ट्रस्ट की ओर से दरगाह के भीतरी हिस्से यानी मजार में प्रवेश पर पाबंदी को गैर जरूरी माना और बैन को हटाने का आदेश दिया. इसके साथ ही अब महिलाएं दरगाह में चादर चढ़ा सकेंगी.

इससे पहले नौ जुलाई को दो जजों की बेंच में मामले में आखिरी सुनवाई हुई थी. जस्टिस वीएम कनाडे और जस्टिस रेवती मोहिते डेरे की डबल बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी.

ट्रस्ट ने इस्लाम के खिलाफ बताया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से मामला सुलझाने को भी कहा, लेकिन दरगाह के अधिकारी महिलाओं को प्रवेश नहीं करने देने पर अड़े रहे.

दरगाह के ट्रस्ट का कहना है, "यह प्रतिबंध इस्लाम का अभिन्न अंग है और महिलाओं को पुरुष संतों की कब्रों को छूने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. अगर ऐसा होता है और महिलाएं दरगाह के भीतर प्रवेश करती हैं तो यह 'पाप' होगा."

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वहीं राज्य सरकार ने कोर्ट से कहा कि महिलाओं को मजार में प्रवेश करने से तभी रोका जाना चाहिए, अगर यह कुरान में निहित है. सरकार ने कहा, "दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को कुरान के विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता है."

इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) के नेता हाजी रफत ने कहा, "हाई कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए. लेकिन चूंकि अब उन्होंने फैसला दे दिया है लिहाजा हम सुप्रीम कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील करेंगे."

385 साल पुरानी दरगाह

हाजी अली दरगाह में 2011 से महिलाओं का प्रवेश बंद है. मुंबई में बाबा हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह का निर्माण 1631 में हुआ था. दरगाह की काफी मान्यता है. यहां भारत के अलावा दुनिया भर से लोग आते हैं.

भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड की तृप्ति देसाई ने इस साल अप्रैल महीने में दरगाह में दो बार घुसने की कोशिश की थी. हालांकि उन्हें नाकामी हाथ लगी थी. वहीं सीएम आवास की तरफ बढ़ने पर उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था.

इससे पहले तृप्ति देसाई ने शनि शिंगणापुर और नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर के गर्भ गृह में महिलाओं के प्रवेश की सफल मुहिम चलाई थी. देसाई ने कहा था कि वह दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर रोक की परंपरा को तोड़कर ऐसी जगहों पर महिलाओं को बराबरी का हक दिलवाएंगी.

भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड की तृप्ति देसाई ने इसी साल हाजी अली दरगाह में घुसने की नाकाम कोशिश की थी. (पीटीआई)

छह हफ्ते की मोहलत

हाजी अली दरगाह ट्रस्ट की अपील पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए छह हफ्ते की मोहलत दी है.

सामाजिक कार्यकर्ता हिना जहीर का कहना है, "अगर महिलाएं पवित्र काबा के पास तक जा सकती हैं, तो दूसरी जगहों पर प्रतिबंध क्यों लगाया जाता है?"

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए जहां ट्रस्ट की ओर से प्रतिबंध के आदेश को असंवैधानिक करार दिया है, वहीं अब आने वाले दिनों में यह मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचने वाला है.

First published: 26 August 2016, 11:31 IST
 
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