Home » इंडिया » Handshakes in Delhi & daggers in Itanagar: The irony behind Modi's Inter-State Council
 

केंद्र और राज्यों के बनते-बिगड़ते संबंधों के बीच इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 July 2016, 8:42 IST
QUICK PILL
  • नई दिल्ली में इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक वैसे समय में हुई जब अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में शक्ति परीक्षण होना था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में शक्ति परीक्षण हो रहा है.
  • इससे पहले उत्तराखंड में भी राष्ट्रपति शासन लगाया गया था जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हटाया गया. उत्तराखंड में अब कांग्रेस की सरकार फिर से सत्ता में आ चुकी हैं. 

एनडीए सरकार ने बेहद खराब समय में इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक बुलाई है. इंटर स्टेट काउंसिल वैसी संस्था है जो राज्यों और राज्य बनाम केंद्र के बीच विवादों को सुलझाने का काम करती है. दिल्ली में यह बैठक वैसे समय में हो रही है जब अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में शक्ति परीक्षण होना है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में शक्ति परीक्षण किया जाना है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में बैठक की शुरुआत करते हुए एक बार फिर से यह बताने की कोशिश की है कि उनका सहयोगात्मक संघवाद का नारा महज नारा नहीं है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान सभी मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की और उनसे हाथ मिलाया.

हालांकि जमीन पर जो कुछ हो रहा है वह सहयोगात्मक संघवाद के नारे के बिलकुल उलट है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश यह साफ कर चुका है कि अरुणाचल प्रदेश में राज्यपाल ने चुनी हुई सरकार को गलत तरीके से बर्खास्त किया. राज्यपाल जे पी राजखोवा ने एक के बाद एक मनमाने फैसले लिए और इसकी वजह से राज्य में आखिरकार राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा.

राज्यपाल राज्यों में केंद्र सरकार के एजेंट होते हैं और ऐसे में यह कहना गलत होगा कि राजखोवा ने सब कुछ अपनी मर्जी से किया. उनकी वजह से आज की इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक में अरुणाचल प्रदेश के सीएम नहीं आ पाए क्योंकि आज वहां की विधानसभा में शक्ति परीक्षण होना है.

अरुणाचल प्रदेश ही एकमात्र राज्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड मामले में भी दखल दे चुका है. कोर्र्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड में फिर से कांग्रेस की सरकार बहाल हुई. साल की शुरुआत में मणिपुर और मेघालय में चुनी गई सरकारों को अपदस्थ करने की कोशिश की गई थी. बीजेपी का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देश में कांग्रेस की चुनी गई सरकारों को गैर संवैधानिक तरीके से हटाने का जरिया बन गया है.

रही बात दिल्ली की तो यहां केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच हर दिन नई जंग देखने को मिलती है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस बैठक में हिस्सा लिया लेेकिन इसी दिन केजरीवाल सरकार ने अखबारों में विज्ञापन देकर केंद्र सरकार के असहयोगात्मक रवैये को लेकर अफसोस जताया.

बीजेपी देश में अपनी मौजूदगी पुख्ता करने के लिए एक साथ कई रणनीति पर काम कर रही है. राज्यों में आने का एक तरीका चुनाव है और दूसरा तरीका मौजूदा सरकारों को अस्थायी करने का है. यह अभी तक कांग्रेस की आदत रही थी लेकिन अब राज्य सरकारों को अस्थिर किए जाने के मामले में बीजेपी कांग्रेस की राह पर चल पड़ी है.

इंटर स्टेट काउंसिल का गठन संविधान के अनुच्छे 263 के तहत किया गया था. संविधान में यह एकमात्र वैसा अध्याय है जिसमें केंद्र और राज्यों के संबंधों के बारे में बताया गया है. 

मोदी को इस बात के लिए बधाई दी जानी चाहिए कि उन्होंने 10 सालों के बाद इस काउंसिल को फिर से सक्रिय किया है. हालांकि इसी बीच केंद्र और राज्यों के संबंधों में तेजी से खटास आई है. अगर मोदी राज्य सरकारों को अस्थिर करने की प्रवृत्ति पर विराम नहीं लगाते हैं तो ऐसी बैठकों का कोई मतलब नहीं होगा.

First published: 17 July 2016, 8:42 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी