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हंदवाड़ाः पुलिस लड़की को अभी तक 'निगरानी' में क्यों रखे हुए है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 May 2016, 7:49 IST
QUICK PILL
  • जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में एक नाबालिग लड़की के संग हुई कथित छेडछाड़ के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन. में कई लोगों की मौत हो गई. नाबालिग लड़की अभी भी पुलिस की निगरानी में है.
  • मामला पूरी तरह थमा नहीं था कि लड़की के पिता को नौकरी से निलंबित कर दिया गया. हालांकि अब कुपवाड़ा के डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि उन्हें नौकरी से निलंबित नहीं किया गया है.

जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में कथित तौर पर यौन उत्पीड़न की शिकार नाबालिग लड़की का मामला ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा. ताजा मामला लड़की के पिता को नौकरी से निलंबित किए जाने से जुड़ा है. चार मई को कुपवाड़ा के डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि लड़की के पिता को निलंबित नहीं किया गया है. पिछले महीने इस मामले के सामने आने के बाद हुए प्रदर्शनों में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है.

लड़की को पिता को बाद में पुलिस ने छोड़ दिया जबकि लड़की पुलिस की निगरानी में ही है.

लड़की के पिता राज्य सड़क और भवन निर्माण विभाग में कुली के रूप में काम करते थे. घटना के बाद से ही लड़की और उसके पिता पुलिस की 'प्रोटेक्टिव कस्टडी' (सुरक्षा के लिए पुलिस की निगरानी) में रखा गया था. जिसके कारण वो दफ्तर नहीं जा पाए.

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उसके पिता के निलंबन का आदेश उनके विभाग के कार्यकारी अभियंता ने दिया था. हंदवाड़ा के स्थानीय अखबार से विभाग के कार्यकारी अभियंता ने कहा था, "वो अनाधिकृत रूप से काम पर नहीं आ रहे हैं इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है."

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अभियंता ने कहा था, "पिछले कुछ दिनों से वो नौकरी पर नहीं आ रहे हैं इसलिए उनका वेतन भी रोक लिया गया है." कुपवाड़ा के डिप्टी कमिश्नर राजीव रंजन ने एक बयान जारी करके स्पष्ट किया कि लड़की के पिता को निलंबित नहीं किया गया है.

रंजन ने कार्यकारी अभियंता को पत्र लिखकर इस मामले में अभूतपूर्व तेजी दिखाने के लिए स्पष्टीकरण भी मांगा. रंजन ने अपने पत्र में लिखा था, "लड़की के पिता के मामले में आपने अभूतपूर्व तेजी दिखाई जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि आप हंडवाड़ा मामले को हवा देने की बदनीयत रखते हैं."

लड़की को पुलिस की निगरानी में रखने को लेकर भी कई लोग आपत्ति जता रहे हैं. इस मसले पर लडकी के परिवार वालों और अलगाववादी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं.

राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी राज्य की सीएम महबूबा मुफ्ती से पूछा कि 'हंदवाड़ा की लड़की के संग क्या हो रहा है?'

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पुलिस की इस बात के लिए भी आलोचना हो रही है कि उसने लड़की को वीडियो संदेश देने के लिए बाध्य किया. वीडियो में लड़की का चेहरा देखा जा सकता था. ये वीडियो व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया में लीक हो गया था. वीडियो में लड़की ने कहा था कि सेना के जवानों ने उसका यौन उत्पीड़न नहीं किया था.

बाद में सेना ने आधिकारिक तौर पर ये वीडियो जारी किया. हालांकि इस वीडियो में लड़की का चेहरा छिपाया गया था.
 
लड़की के अभिभावकों ने पुलिस से लड़की को छोड़ने की मांग की है. उन्होंने हाई कोर्ट में इस बाबत मुकदमा भी दर्ज कराया है. जबकि पुलस का कहना है कि उसने 'लड़की के अभिभावकों के कहने पर उसे पुलिस ने अपनी निगरानी में रखा हुआ है.'
 
लड़की की रिहाई के लिए घाटी में विरोध प्रदर्शन होने लगे. कोअलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी (सीसीएस) नामक नागिरक संगठन इन प्रदर्शनों की अगुवाई की.

सीसीएस की संयोजक खुर्रम परवेज़ ने कैच को बताया, "लड़की पीड़ित है, अपराधी नहीं. पुलिस किसी को इतने लंबे समय तक पुलिस की निगरानी में कैसे कर सकती है."

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परवेज़ कहते हैं, "उसका यौन उत्पड़ीन हुआ है या नहीं ये अलग मामला है. उसे घर जाने देना चाहिए."

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नईमा महजूर की भूमिका की भी इस मामले में आलोचना हो रही है. उनपर लड़की को पुलिस की निगरानी से निकलवाने के लिए पर्याप्त प्रयास न करने का आरोप है.

हालांकि महजूर ने अपने एक साक्षात्कार में लड़की को न छोड़े जाने और वीडियो बनाने की आलोचना की है. महजूर ने कहा, "पुलिस थाने में लड़की सुरक्षा के लिए गई थी न कि वीडियो बनवाने. और अगर लड़की के परिवार वाले उसे ले जाना चाहता है तो पुलिस को उसे जाने देना चाहिए."

इस मामले की गूंज सोशल मीडिया पर भी सुनायी दी. लड़की के समर्थन में ट्विटर पर #इनसॉलिडैरिटीविथहंदवाड़ागर्ल और #फ्रीहंदवाड़ागर्ल हैशटैग ट्रेड करने लगे.

ट्विटर पर एक यूज़र सुहैल अहमद ने वीडियो मैसेज ट्वीट किया, "मैं हंदवाड़ा की लड़की के साथ हूं. जिस किसी ने भी लड़की का वीडियो बनाया है उसे इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहिए था. दोषियों को सजा मिलनी चाहिए था."

लड़की के पिता ने पुलिस को चकमा देते हुए हाल ही में एक प्रेस वार्ता की थी. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "पुलिस हमारी हर गतिविधि पर नियंत्रण रखे हुए है. वो हमें श्रीनगर में हाई कोर्ट की सुनवाई में भी नहीं जाने दे रहे हैं."

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लड़की के पिता ने मीडिया को बताया, "हमें पहले दो दिनों तक पुलिस थाने में रखा गया. उसके बाद हमें अलग अलग गांवों में भिन्न-भिन्न घरों में रखा गया. पुलिस के जवान सार्दी वर्दी में घरों के बाहर पहरा दे रहे थे."

लड़की के पिता के अनुसार पुलिसवाले लड़की के चरित्र को लेकर तंज भी कस रहे थे और पूरे मामले के लिए उन्हें ही जिम्मेदार बता रहे थे.

लड़की के माता-पिता के अनुसार लड़की ने पुलिस के दबाव में वीडियो मैसेज दिया है. उन्होंने कहा, "एक बार उसे आजाद हो जाने दें फिर हमारी बेटी अदालत में बयान देगी और सबकुछ साफ हो जाएगा."

ये पूछने पर कि उनकी बेटी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने भी अपना बयान दोहराया है. इसपर पिता ने कहा, "मैं उसके साथ जज के पास गया था लेकिन मुझे बाहर बैठने के लिए कहा गया. जब मुझे अंदर बुलाया गया तो वो अपना बयान दे चुकी थी."

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ये पूछने पर कि वो अपनी बेटी को पुलिस की सुरक्षा निगरानी से बाहर क्यों निकालना चाहते हैं? लड़की के पिता ने कहा, "इतने दिनों तक पुलिस मेरी और मेरी बेटी की सुरक्षा कर रही थी. लेकिन हमारा परिवारवालों का क्या? वो लोग तो घर पर ही हैं."

लड़की के पिता ने कहा, "अगर पुलिस मेरी बेटी को छोड़ देती है तो मैं अपने गांववालों के पास जाकर अपनी समस्या पर उनके बात करूंगा. वो सभी बहुत अच्छे दिन वाले हैं."
 
लड़की की मां ने कहा कि उनकी बेटी छवि धूमिल कर दी गई है. उन्होंने कहा, "पुलिस ने उसके मां-बाप की इजाजत लिए बिना उसका वीडियो बनाया. जिसमें उसका चेहरा भी दिखायी दे रहा था. अब सब उसे पहचान गए हैं. उसके भविष्य को लेकर मैं चिंतित हूूं?"

दूसरी तरफ पुलिस और सेना अब तक मामले की जांच रिपोर्ट सौंपने में विफल रहे हैं. सेना ने अदालत में दिए अपने हलफनामे में  वीडियो मैसेज और मामले की निगरानी में रखने का पूरा ठीकरा पुलिस पर फोड़ दिया है.

आर्मी के प्रवक्ता मेजर केएस सुरेश ने कहा, "सेना को वीडियो बनाने से कोई संबंध नहीं है. हमने जो वीडियो शेयर किया वो सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद था."

First published: 10 May 2016, 7:49 IST
 
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