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हंगपन 'दादा' को वीरता के लिए मरणोपरांत मिलेगा 'अशोक चक्र'

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:48 IST
(एजेंसी)

केंद्र सरकार ने रविवार को स्‍वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्‍या पर घोषणा की, कि हवलदार हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र दिया जाएगा.

हंगपन दादा इस साल की 27 मई को उत्‍तरी कश्‍मीर में घुसपैठियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे. लेकिन शहीद होने से पहले दादा ने चार आतंकियों को भी मार गिराया था.

भारत सरकार ने उनकी अदम्य वीरता और साहस को सलाम करते हुए अशोक चक्र से सम्मानित करने का फैसला किया है. अशोक चक्र शांतिकाल में दिए जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है.

सेना के हवलदार हंगपन दादा का जन्म अरुणाचल प्रदेश के बोदुरिया गांव में हुआ था. अपनी टीम में वे दादा के नाम से लोकप्रिय थे.

वे 1997 में असम राइफल्‍स के जरिए भारतीय सेना का हिस्सा बने थे. कश्‍मीर में वे काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन के तहत 35 राष्‍ट्रीय राइफल्‍स में तैनात थे.

आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान हंगपन दादा ने सारे हमले खुद पर झेल लिए और अपने साथियों पर कोई आंच नहीं आने दी. उनके परिवार में अब पत्‍नी चेजन लोवांग, उनकी 10 साल की बेटी रोखिन और छह साल का बेटा सेनवांग है.

केंद्र सरकार ने अशोक चक्र के साथ-साथ 81 अन्‍य वीरता पुरस्‍कारों का भी ऐलान किया है. इसके तहत 14 शौर्य चक्र, 63 सेना मेडल, दो नौसेना मेडल और दो वायुसेना मेडल भी शामिल हैं.

First published: 14 August 2016, 7:12 IST
 
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