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खुश रहने वाली महिलाओं की उम्र उदास महिलाओं से ज्यादा नहीं होती

लमत आर हसन | Updated on: 11 February 2017, 6:44 IST

आपकी ज़िन्दगी बहुत आसान है अगर आप एक खुश रहने वाली महिला हैं. लेकिन इसका मतलब यह बिलकुल नही है की आप उस महिला से ज्यादा जिएंगी जो आपके बगल में रहती है और हमेशा परेशान और तनाव में दिखाई देती है.

ब्रिटेन में हुई एक रिसर्च के अनुसार जिस तरह तनाव आपको मार नही सकता वैसे ही खुश रहकर आप अपनी उम्र नही बढ़ा सकते.

लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन ने यह पता लगाया है की ख़राब स्वास्थ्य के कारण आप दुखी हो सकते हैं लेकिन इसका मृत्यु दर पर कोई सीधा असर दिखाई नहीं देता.

रिपोर्ट के अनुसार, "पिछली रिपोर्ट में खुश रहने वालों की मृत्युदर में कमी इसलिए दिखी थी क्योंकि शायद खराब स्वास्थ्य से नाखुश लोगों की मृत्युदर बढ़ गई थी." 

ख़ुशी का अध्ययन

द मिलियन वूमेन स्टडी ब्रिटेन में महिलाओं के ऊपर किया गया एक 10 साल लंबा अध्ययन है. ये महिलाएं 1996 से 2001 के बीच अध्ययन में शामिल हुई थीं और इनमें मृत्यु के कारणों को इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से संकलित किया गया था.

भर्ती के तीन साल बाद इन महिलाओं से उनकी खुशी, तनाव, स्वास्थ्य, संवेदनशीलता और रिलैक्स महसूस करने संबंधी एक प्रश्नावली दी गई. इसमें उन्हें स्वत: से अंक देने के लिए कहा गया. इसी के आधार पर वर्तमान रिपोर्ट तैयार होनी थी.

अंतरिम अवधि में मौत का कारण हृदय रोग और कैंसर था. जिनमें हृदय रोग नहीं था उनमें स्ट्रोक और क्रोनिक फेफड़े की बीमारी मृत्यु की अहम वजह रही.

यह अध्ययन 7,19,671 महिलाओं पर किया गया था जिसमें से 39 प्रतिशत हमेशा खुश रहती थीं जबकि 44 प्रतिशत महिलाएं कभी-कभार खुश रहती थी और 17 प्रतिशत नाखुश रहती थीं.

निगरानी के 10 वर्षों के दौरान प्रतिभागियों में से 4 प्रतिशत से अधिक की मौत हो गई. लेकिन जो लोग दुखी रहते थे और जो अपने को खुश बताते थे उनके बीच मृत्यु दर में कोई ख़ास फर्क नही था.

धूम्रपान ना करने वाले रहते हैं खुश

शोधकर्ताओं के अनुसार दुख लोगों को अजीब तरह से व्यवहार करने पर मज़बूर करता है जैसे की बहुत ज्यादा खाना और पीना या खुद को नुकसान पहुंचना.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सर रिचर्ड पेटो ने गार्जियन को बताया," अगर आप यह पूछेंगे की क्या इसका सीधा प्रभाव मृत्यु दर पर पड़ेगा, तो इसका जवाब है नहीं."

शोधकर्ताओं ने यह माना है की खुशी मापने के लिए कोई सही तरीका नही है, लेकिन खुशी के साथ अध्ययन में महिलाओं से जुड़े कारक वही हैं जो अन्य शोध में पाये गए है. 

वह महिलायें ज्यादा ख़ुशी महसूस करती हैं जो उम्रदराज़ हैं, संपन्न पृष्ठभूमि से आती हैं, शारीरिक रूप से सक्रिय हैं, धूम्रपान नहीं करती हैं, जिनका जीवनसाधी है, जो किसी धार्मिक समूह का हिस्सा हैं, सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहती हैं और पर्याप्त मात्रा में नींद लेती हैं, लेकिन ज्यादा नहीं.

First published: 30 December 2015, 8:06 IST
 
लमत आर हसन @LamatAyub

संवाददाता, कैच न्यूज़

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