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हरियाणा में स्कूली पाठ्यक्रम में हुए बदलाव पर राजनीति गरम

राजीव खन्ना | Updated on: 23 May 2016, 8:00 IST
QUICK PILL
  • बीजेपी शासित कई राज्यों को स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर विपक्षी दलों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
  • कांग्रेस महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के योगदान को कम कर दिखाए जाने के खिलाफ जबरदस्त विरोध कर रही है.
  • सरकार के फैसले का विरोध कर रहे लोगों को सबसे ज्यादा आश्चर्य सर छोटू राम के नाम को हटाए जाने को लेकर हुआ है. छोटू राम बंटवारे से पहले पंजाब के बड़े नेताओं में से एक थे.
  • बीजेपी शासित कई राज्यों को स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर विपक्षी दलों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

    कांग्रेस महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के योगदान को कम कर दिखाए जाने के खिलाफ जबरदस्त विरोध कर रही है. कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी शासित राज्यों में पाठ्यक्रमों में बदलाव का काम बेहद शातिर तरीके से किया जा रहा है.

    हालांकि बीजेपी की मनोहर लाल खट्टर सरकार पांचवीं की किताबों में कई बदलावों को लेकर सबसे ज्यादा निशाने पर है. 

    सरकार ने समकालीन नायकों के एक चैप्टर को हटा दिया था लेकिन इसकी चौतरफा आलोचना के बाद सरकार इन नायकों को फिर से शामिल करने पर सहमत हो गई है.

    हरियाणा के गौरव नाम वाले अध्याय में सर छोटू राम, रणवीर सिंह हुडा, देवीलाल और बंसीलाल का जिक्र किया गया था. सरकार ने चौथी की कक्षा में गौरव गाथा नाम से एक अध्याय जोड़ा जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल, भगत सिंह, लाला लाजपत राय और लोकमान्य तिलक के साथ अन्य नायकों को शामिल किया गया है. जिन नायकों के नाम को हटाया गया है, उसमें आधुनिक युग के कई नायक हैं.

    सरकार के फैसले का विरोध कर रहे लोगों को सबसे ज्यादा आश्चर्य सर छोटू राम के नाम को हटाए जाने को लेकर हुआ है. छोटू राम बंटवारे से पहले पंजाब के बड़े नेताओं में से एक रहे हैं और जाट आंदोलनों के शीर्ष नेता रहे हैं. छोटू राम पर मोहम्मद इकबाल का गहरा असर था. राम को दो बड़े कृषि कानून के लिए याद किया जाता है जिसने किसानों को कर्जदारों से राहत दिलाई और भूमिहीनों को जमीन.

    रणबीर सिंह हुडा स्वतंत्रता की लड़ाई के नायक रहे और वह साथ ही कांग्रेस के सदस्य भी रहे. उन्हें भाखड़ा नांगल बांध को बनाने के लिए याद किया जाता है. उस वक्त वह संयुक्त पंजाब के कृषि मंत्री थे. उनके बेटे भूपिंदर सिंह हुडा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनका पोता दीपेंदर सिंह हुडा रोहतक से सांसद हैं.

    सरकार के फैसले का विरोध कर रहे लोगों को सबसे ज्यादा आश्चर्य सर छोटू राम के नाम को हटाए जाने को लेकर हुआ है

    बंसीलाल और देवीलाल हरियाणा के दो मशहूर लाल हैं. तीसरे अहम लाल भजन लाल हैं. तीनों ने लंबे अर्से तक हरियाणा की राजनीति को प्रभावित किया.

    बंसीलाल को आधुनिक हरियाणा का जनक माना जाता है. वह केंद्र और राज्य दोनों जगह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहें. तीन बार वह हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे. दो बार कांग्रेस की तरफ से जबकि एक बार हरियाणा विकास पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री बने. वह केंद्रीय रक्षा और रेलवे मंत्री भी रहें.

    देवीलाल भी जाटों के लोकप्रिय नेता थे. वह मुख्यमंत्री के साथ पूर्व उप प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं. उन्हें शेर ए हरियाणा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि उन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल का विरोध किया था.

    2011 में भूपिंदर सिंह हुडा के कार्यकाल में इन नेताओं के योगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था. हरियाणा कांग्रेस प्रेसिडेंट अशोक तंवर ने खट्टर सरकार पर जमकर निशाना साधा.

    तंवर ने कहा, 'यह चिंताजनक है. बच्चों को निश्चित तौर पर आजादी के लिए योगदान देने वालों के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही जिन्होंने बाद में हरियाणा के निर्माण में भूमिका निभाई. इन लोगों ने हरियाणा में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत कीं और साथ ही किसानोें की बेहतरी के लिए काम किया. ऐसे में इन लोगों को स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम से हटाने का क्या मतलब है.'

    राज्य सरकार पर पहले से ही जाट आंदोलन को लेकर आरोप लगते रहे हैं

    तंवर ने कहा कि कांग्रेस नेता इस मसले को सार्वजनिक मंच पर उठाएंगे. कांग्रेस नेताओं ने खट्टर पर जाट नेताओं के योगदान को कमतर किए जाने का आरोप लगाया.

    राज्य सरकार पर पहले से ही जाट आंदोलन को लेकर आरोप लगते रहे हैं. राज्य में जातीय विभाजन रहा है और जाटों के खिलाफ 35 जातियां खड़ी रही हैं. विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर इस विभाजन को भड़काने का आरोप लगाया है. हालांकि बीजेपी नेतृत्व इससे इनकार करता रहा है.

    इंडियन नेशनल लोकदल ने भी इस मामले में सरकार पर हमला बोला है. पार्टी के नेता अभय चौटाला ने कहा, 'सरकार ने उन लोगों के नाम को हटाया है जिन्होंने हरियाणा के विकास में योगदान दिया है. हरियाणा सरकार जानबूझकर पाठ्यक्रमों में बदलाव कर रहे हैं ताकि लोग आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएं. बच्चों को हरियाणा के संघर्ष और उसके नेताओं के बारे में जानना चाहिए. हम अन्य नेताओं के योगदान के बारे में पढ़ाए जाने के खिलाफ नहीं है लेकिन दूसरे नेताओं के नाम को हटाना राजनीति से प्रेरित है.'

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किताबों को नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग की सिफारिशों के मुताबिक तैयार किया जा रहा है. 

    अधिकरी ने कहा, 'हम जानते हैं कि स्कूल कि किताबें बेहद संवेदनशील होती हैं. आज की तारीख में यह इस लिहाज से भी संवेदनशील है कि जिन नेताओं के नाम हटाए गए हैं उनके बेटे राजनीति में हैं.'

    जानकारों की माने तो बीजेपी के अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह ही प्रशासन को भगवा रंग देने की कोशिश कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने करनाल में बागवानी यूनिवर्सिटी खोले जाने की घोषणा की है जिसका नाम महाराणा प्रताप विश्वविद्यालय होगा. 

    राजपूत यूथ ब्रिगेड एसोसिएशन की मांग को स्वीकार करते हुए उन्होंने बलदेव नगर चौक आौर कमानी चौक का नाम बदलकर महाराणा प्रताप चौक किए जाने का फैसला लिया है. वहीं पंचकूला के चौक का भी नाम महाराणा प्रताप के नाम पर रखा जाएगा. खट्टर ने तरौरी में भी पृथ्वीराज चौहान के नाम पर संग्रहालय किए जाने की घोषणा की है.

    First published: 23 May 2016, 8:00 IST