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पटेल का पत्र मोदी के नाम: पहले वोट, अब चोट

सुधाकर सिंह | Updated on: 29 August 2016, 7:44 IST

सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली समुदाय के लिए नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर निकाली गई विशाल पटेल रैली की पहली बरसी पर, आंदोलन के निर्वासित नेता हार्दिक पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने 2002 के गोधरा दंगों के लिए सीधे-सीधे प्रधानमंत्री को दोषी ठहराया है. 2002 में साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग में 58 यात्रियों की मृत्यु के बाद गोधरा में दंगे भड़क गए थे जिसमेें हजारों की संख्या में लोग मारे गए थे.

इतना ही नहीं, युवा नेता पटेल ने यह भी लिखा है कि बतौर प्रधानमंत्री, मोदी ने 2002 के दंगों में जेल में डाले गए पटेलों की रिहाई के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है.

हार्दिक के आरोपों में कोई नई बात नहीं है और मोदी कई वर्षों से ऐसे आरोपों को झेलते आ रहे हैं, लेकिन अब तक मोदी के खिलाफ इस तरह के आरोप विपक्षी दल, धर्मनिरपेक्षता के पक्षधर और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने ही लगाए हैं.

ऐसा पहली बार हुआ है, जब इस प्रकार के आरोप पटेल समुदाय के किसी व्यक्ति ने लगाए हैं, जिस समुदाय के बारे में माना जाता है कि वह पंरपरागत रूप से भाजपा का समर्थक रहा है और गोधराकांड के बाद हुए दंगों में इस समुदाय ने संघ परिवार को सर्वाधिक 'कारसेवक' उपलब्ध करवाए.

हर कोई जानता है कि 2002 के दंगे नरेन्द्र मोदी द्वारा आयोजित किए गए थे

हालांकि, राजद्रोह के मामले में जमानत पर चल रहे आरोपी हार्दिक पटेल के इस खुले पत्र से प्रधानमंत्री मोदी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाल. यह सत्तारूढ़ भाजपा के लिए शर्मिंदगी की बात है. पटेल समुदाय पिछले तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हुआ है. चाहे पार्टी को बाहुबल की जरूरत हो या बेहिसाब पैसे की या फिर मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में हुए भव्य समारोहों के लिए व्यापक जनसमर्थन की, जो मोदी की पहचान हैं.

पटेल कोटा के लिए नेता हार्दिक पटेल द्वारा प्रधानमंत्री को गुजराती में लिखे खुले पत्र को विधिवत रूप से प्रेस को लीक किया गया.

पत्र की शुरूआत कुछ इस तरह से होती है- ‘हर कोई जानता है कि 2002 के दंगे नरेन्द्र मोदी द्वारा आयोजित किए गए थे.’

पत्र में प्रिय या आदरणीय किसी भी प्रकार का संबोधन न देते हुए पटेल ने सीधे ‘विषय’ लिखा- ‘मोदीजी, आपने पटेलों की पीठ में छुरा घोंपा है.’

23 वर्षीय हार्दिक 2002 के दंगों के दौरान नौ वर्ष के थे, लेकिन उनके पिता चूंकि उनके पैतृक शहर वीरमगाम में भाजपा के एक सदस्य हैं, इसलिए हार्दिक ने दंगों में पटेल समुदाय की भूमिका के बारे में जरूर काफी कुछ सुन रखा होगा.

युवा नेता हार्दिक ने न केवल 2002 के दंगों का आरोप मोदी पर लगाया बल्कि यह भी कहा कि, ‘सांप्रदायिक दंगों का फायदा उठा कर आप पहले मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बन गए.’ अब तक मोदी पर इस तरह का आरोप मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और समाज सेवियों द्वारा ही लगाया जाता रहाा है.

यह पहली बार है जब मोदी के खिलाफ इस तरह के आरोप उस पटेल समुदाय से लगाए जा रहे हैैं जो राज्य में दो दशक तक भाजपा शासन का सर्वाधिक लाभ उठाने वाला समुदाय रहा है, लेकिन पिछले साल सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग उठाने वाली उनकी रैली का दमन किए जाने के बाद से पटेलों ने पार्टी पर तलवारें तान दी हैं.

मोदी पर पटेलों की पीठ में छुरा घोंपने वाले इस पत्र के दूसरे पेज पर स्पष्ट किया गया है कि दंगा मामलों में कई पटेलों को दोषी करार दिया गया है. इसमें एक पूरी सूची दी गई है, जिसमें कईयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

मोदी 2002 के दंगों के बल पर प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन इन पटेलों को जेल से रिहा करने के लिए उन्होंने कोई प्रयास

दंगे से जुड़े मामलों और उनके लिए दोषी ठहराए गए पटेल युवकों की संख्या की सूची संलग्न कर हार्दिक ने कहा है कि मोदी 2002 के दंगों के बल पर प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन इन पटेलों को जेल से रिहा करने के लिए उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया.

देश के कानूनों से पूरी तरह अनभिज्ञ युवा नेता हार्दिक इतने नादान हैं कि वे मोदी से पटेलों को जेलों से रिहा करवाने की उम्मीद कर रहे हैं.

हार्दिक ने पत्र में लिखा है कि, ‘बतौर प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति को सिफारिश कर सकते हैं कि वे पटेल युवकों को क्षमादान कर रिहा कर दें.’ हार्दिक चाहते हैं लेकिन मोदी ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि वह अब स्वयं को भारत और दुनिया के समक्ष एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं.

हार्दिक, जो वर्तमान में सशर्त जमानत के तहत राजस्थान के उदयपुर में रह रहे हैं, ने सूची में 2002 के दंगों के दौरान सरदारपुरा, ओड, दीपदा दरवाजा, नरोदा पाटिया और मेहसाणा मामलों के लिए दोषी करार दिए गए तमाम पटेल अभियुक्तों के नाम लिखे हैं.

लेकिन 2002 में, हार्दिक की उम्र काफी कम थी, इसलिए वे नहीं जानते कि मोदी ने उन्हें बरी करवाने की कोशिश की थी. इसीलिए उन्होंने अभियोजन पक्ष के वकीलों के रूप में विहिप और आरएसएस कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से वे इस इरादे में नाकाम रहे.

First published: 29 August 2016, 7:44 IST
 
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