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सदन में शक्ति परीक्षण: लौटेंगे हरीश रावत के अच्छे दिन!

आकाश बिष्ट | Updated on: 7 May 2016, 8:47 IST
QUICK PILL
  • बर्खास्त किए गए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड विधानसभा में शक्ति परीक्षण की तारीख 10 मई तय की है.
  • 9 बागी विधायकों को वोटिंग से बाहर रखे जाने के बाद उत्तराखंड में विधायकों की कुल संख्या अब घटकर 62 हो गई है. ऐसे में 32 विधायकों के समर्थन से रावत मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी वापसी कर सकते हैं. 

हरीश राव के अच्छे दिन शायद आ चुके हैं. बर्खास्त किए गए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड विधानसभा में शक्ति परीक्षण की तारीख 10 मई तय की है. 

अदालत के फैसले के तुरंत बाद ही रावत के घर पर त्योहार जैसा माहौल हो गया. माना जा रहा है कि रावत बेहद आसानी से बहुमत साबित कर देंगे.

9 बागी विधायकों को वोटिंग से बाहर रखे जाने के बाद उत्तराखंड में विधायकों की कुल संख्या अब घटकर 62 हो गई है. ऐसे में 32 विधायकों के समर्थन से रावत मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी वापसी कर सकते हैं. 

देहरादून में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए रावत ने कहा कि उन्हें विधायकों के समर्थन को लेकर कोई शंका नहीं है. वह सदन में इसे साबित कर देंगे. 

कांग्रेस के 27 और प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट के छह विधायकों की समर्थन से कांग्रेस के समर्थक विधायकों की संख्या 33 हो जाती है जो बहुमत के लिए जरूरी 32 से एक अधिक है. अदालत ने उन विधायकों को वोटिंग के अधिकार से दूर रखा है जिनकी सदस्यता रद्द कर दी गई है.

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि सरकार सदन में शक्ति परीक्षण के लिए तैयार है. उन्होंने पूर्व चुनाव आयुक्त को इस दौरान शक्ति परीक्षण की निगरानी करने के लिए कहा. 

कोर्ट ने हालांकि रोहतगी की इस अपील को खारिज करते हुए राज्य के प्रधान सचिव को इस कार्रवाई की निगरानी किए जाने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि शक्ति परीक्षण की पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी.

बेंच में शामिल जस्टिस दीपक मिश्रा और शिव कीर्ति सिंह ने 10 मई को सुबह 11 बजे से दोपहर बाद एक बजे तक राष्ट्रपति शासन हटाए जाने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि वोटिंग के दौरान सभी सदस्य बारी-बारी से हाथ उठाएंगे और फिर उनकी गिनती प्रधान सचिव की तरफ से की जाएगी.

18 मार्च को केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की सरकार को हटा कर वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया था

कोर्ट ने कहा कि प्रधान सचिव सभी दस्तावेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को 11 मई को कोर्ट को जमा कराएं. इसके साथ ही कोर्ट ने प्रधान सचिव और डीजीपी को शांतिपूर्ण मतदान कराए जाने का आदेश दिया.

सबसे अहम पहलू यह रहा कि कोर्ट ने उन विधायकों को वोटिंग से दूर रखने का फैसला किया जिनकी सदस्यता खारिज की जा चुकी है. फिलहाल इन विधायकों की सदस्यता को खारिज किए जाने का मामला नैनीताल हाई कोर्ट में लंबित है.

18 मार्च को एप्रोप्रिएशन बिल पारित नहीं किए जाने के आरोप में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की सरकार को हटा कर वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया था. 

इसके ठीक एक दिन पहले ही कांग्रेस की सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कहा गया था. इसके बाद एक स्टिंग सामने आया था जिसमें रावत कथित तौर पर विधायकों को घूस देते हुए दिखाई दे रहे थे. केंद्र का कहना था कि यह वीडियो बताता है कि राज्य में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह से विफल हो गया था.

स्टिंग के फुटेज को चंडीगढ़ सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में उसकी सत्यता जांचने के लिए भेजा गया है. 5 मई को सीबीआई ने रावत को इस मामले में जवाब तलब किया है. हालांकि इस बीच सुप्रीम कोर्ट की तरफ से शक्ति परीक्षण को साबित किए जाने का फैसला कांग्रेस के लिए राहत बनकर आया है. लेकिन अभी रावत की समस्या खत्म नहीं हुई है.

First published: 7 May 2016, 8:47 IST
 
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